Bihar Election: बिहार SIR पर ओवैसी की चुनाव आयोग से मांग: समय बढ़ाया जाए, नहीं तो मतदाता होंगे प्रभावित

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अधिक समय देने की मांग रखी।

चुनाव आयोग से मिलने के बाद ओवैसी ने कहा, “हम SIR के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह जरूरी है कि इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। यदि 15–20% लोग छूट जाते हैं, तो वे न केवल वोटिंग अधिकार, बल्कि नागरिकता से भी वंचित हो सकते हैं। यह सिर्फ दस्तावेज़ की नहीं, बल्कि आजीविका की भी बात है।”

एआईएमआईएम बिहार प्रमुख अख्तरुल ईमान ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में कई लोग बिना दस्तावेजों के हैं। बाढ़, प्रवासन और गरीब तबके की दुश्वारियों को देखते हुए, पुनरीक्षण प्रक्रिया को रोकने या टालने की जरूरत है। उनका कहना है कि कम पासपोर्ट धारिता (2%), कम शैक्षणिक योग्यता (14% स्नातक) और प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या के चलते बड़ी आबादी इससे प्रभावित हो सकती है।

इस बीच, SIR प्रक्रिया के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है, जहां 10 जुलाई को सुनवाई होगी। याचिकाकर्ताओं में राजद सांसद मनोज झा, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और ADR शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने 24 जून को बिहार में SIR प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे, ताकि अपात्र नाम हटाए जाएं और केवल योग्य नागरिक ही सूची में रहें। लेकिन विपक्षी दल इसे जल्दबाज़ी और राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं।

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