मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सारंगढ़ हेलीपेड में हुआ आत्मीय स्वागत

Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के सारंगढ़ नगर में आयोजित संत गुरु घासीदास जयंती समारोह का आयोजन पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और राजस्व मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा का दोपहर में सारंगढ़ आगमन हुआ। जैसे ही मुख्यमंत्री और मंत्रीगण समारोह स्थल पहुंचे, वहां उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने

फूल-मालाओं और गुलदस्तों से उनका आत्मीय स्वागत किया। समारोह में रामनामी समाज की विशेष भागीदारी देखने को मिली। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के रामनामी समाज के अध्यक्ष कौशल रामनामी और वरिष्ठ समाजसेवी समारु राम रामनामी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए समाज की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर रायगढ़ के सांसद राधेश्याम राठिया, बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला, कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे और पुलिस अधीक्षक आन्जनेय वार्ष्णेय भी मंचासीन रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय, जिला पंचायत सदस्य संतोषी अरविन्द खटकर और शिवकुमारी साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक निर्मल सिन्हा, केराबाई मनहर, ज्योति पटेल, टीकाराम पटेल, सुभाष जालान, कामदा जोल्हे, जगन्नाथ केशरवानी, अजेश अग्रवाल, मनोज जायसवाल, विलास सारथी, देव कुमारी लहरे, हरिनाथ खूंटे, समीर ठाकुर और शिवकुमारी चौहान समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और सत्ताधारी दल के पदाधिकारी भी समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में संत गुरु घासीदास जी के विचारों को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी का संदेश—“मनखे-मनखे एक समान”—आज भी सामाजिक समरसता और समानता की प्रेरणा देता है। सरकार संतों और महापुरुषों के आदर्शों पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अनुसूचित जाति समाज के उत्थान और शिक्षा-कौशल विकास से जुड़े सरकारी प्रयासों की जानकारी दी, जबकि प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा ने जिले में चल रही विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए जनता के सहयोग के लिए आभार जताया। कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामूहिक जयकारों के साथ समारोह का समापन हुआ। पूरे आयोजन में अनुशासन, सामाजिक एकता और गुरु घासीदास जी के आदर्शों की झलक साफ दिखाई दी, जिससे सारंगढ़-बिलाईगढ़ क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।

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