विदग्‍ध कवि

राष्‍ट्रीय विचारधारा के देस जाति खातिर अभिमान करइया विदग्‍ध कवि मन्‍नीलाल कटकवार के अवतार 23 अगस्‍त 1923 अउ महाप्रस्‍थान 14 फरवरी 2004 म होय रहिस। कटकवार जी खुदे म एक संस्‍था रहिन जांजगीर तहसील के कई युवक मन के उन प्रेरना स्‍त्रोत रहिन। उंकर रचना मन मा देश भक्‍ति के एक कती तो लहर उठत हे त दूसर कती करूना के धार बोहात हे।
लीलागर अउ नगेसर कइना उंकर छत्‍तीसगढी़ के स्रेस्‍ठ खंड काव्‍य आय जेमा नारी के करूना मिलथे। उन हिन्‍दी के प्रतिनिधि गीतकार आय। ‘धरती के नयनोत्‍सव’ उंकर अपरकासित गीत संग्रह आय 19 परकासित ग्रंथों के रचयिता मदनलाल जी उनके अभिन्‍न मित्र ही नही बल्‍कि प्रेरना स्‍त्रोत घलोक रहीन। गुप्‍ता जी के निधन के शोक समाचार से विदग्‍ध सोक संतप्‍त कटकवार जी भी उंकरे पाछू परमधाम चले गइन।