भोलेनाथ के गुफा चैतुरगढ़़






गरमी के मउसम आते मन होथे चलव कहूं घूमे-फिरे, सैर-सपाटा बर। सुद्ध, सांत वातावरन अउ परदूसन मुक्त प्रकृति के तीर धर्मिक, ऐतिहासिक या सुघ्‍घर जगा म। आवव त आपमन ल परिवार समेत अइसने आनंदमयी, प्रकृति के धरोहर जगा म ले चलथन। फेर इहां जाय के पहिली एकठिन बात के खिलाय रखे बर परही भई। न कचरा-परदूसन फइलावन न कोनो ल फइलावन दन। समझ गेंव न, त फेर चलव।
पौरानिक कथा – भस्मासुर राक्‍छस ह भगवान भोलेनाथ के अराधना करके, औघड दानी ल परसन्न करके बरदान म भस्म कंगन लेके तीनों लोग म अखंड राज करहूं कहिके ठानिस। बरदान मिलिस तहां नियत बदल गे अउ वोहा भोलेनाथ ल भस्म करे बर दउडिस। भगवान आगू-आगू, पीछू-पीछू। ऐला देखके भगवान बिसनू ह पारवती दाई के मोहनी रूप धरके दूनो के बीच म आइस। भस्मासुर ह मोहनी तीर आइस तहां भगवान भोलेनाथ के एक ठिन गुफा म खुसर गे। मोहनी के नृत्यकला म पड़़के भस्मासुर भस्म होगे।
भगवान भोलेनाथ जेन गुफा म खुसरे रिहिस उही जगा ह चैतुरगढ ए। चैतुरगढ म भस्मासुर-संकर गुफा हे। इहां मां महामाया के दरसनीय मंदिर घलो हे। तीर म पहाडी हे। पहाडी के ऊपर तरिया हे। ये जगा ह धरम अउ कला के अद्वितीय संगम हे।
कइसे पहुचंय – बिलासपुर ले पाली 50 बिचुहचै अउ पाली ले चैतुरगढ 30 किलोमीटर दूरिहा हे। चैतुरगढ म ऐतिहासिक मंदिर हे। इहां बइसाख, जेठ म जाय सकथव। दिनभर रहि सकथव। उहां रात रुके बर बनबिभाग के रेस्ट हाउस घलो हे, फेर पहिली ले इजाजत ले बर परथे। ब्लाक मुख्यालय पाली म रुके बर रेस्ट हाउस, होटल, धरमशाला हे। इहां ले बिहनिया नौ बजे निकल के सांझकुन पांच बजे लहुट सकथव। इहां जाय बर पराइवेट टेक्सी मिलथे। चैतुरगढ ह अब्बड सुष्घर जगा हे।

शीतल प्रसाद पाटनवार
शिवाजी नगर, बिलासपुर





हिन्‍दी में पढ़ें ललित शर्मा के ब्‍लॉग में – चैतुरगढ: मैं कहता हौं आँखन की देखी — ललित शर्मा
पंकज सिंह जी पाली शिवमंदिर वाला चित्र भी ललित शर्मा जी के ब्‍लॉग से साभार