Category: किरीट सवैया

किरीट सवैया : नाँग नाथे मोहना

खेलन गेंद गये जमुना तट मोहन बाल सखा सँग नाचय।
देवव दाम लला मन मोहन देख सखा सबके सब हाँसय।
आवय ना मनखे जमुना तट कोइ नहावय ना कुछु काँचय।
हावय नाँग जिहाँ करिया जिवरा कखरो नइ चाबय बाँचय।

देख तभो जमुना तट मा मनमोहन गेंद ग खेलत हावय।
बोइर जाम हवे जमुना तट मा मिलके सब झेलत हावय।
खेल करे हरि गोकुल मा मिल मीत मया मन मेलत हावय।
खेलत गेंद गिरे जमुना जल लाव कही सब पेलत हावय।

जमुना जल के तल मोहन जावय नाँग लगे बड़ गा फुसकारन।
मोहन हा कुचरे फन ला बइरी ल धरे झट लागय मारन।
नाँग कहे दुरिहा मँय जाहँव जान बचावव हे जग तारन।
आय हवे हरि ले अवतार ग संकट दूर भगाय ग कारन।

देर भये जल भीतर मा तब बाल सखा मन हा घबरावय।
दाइ ददा सब तीर खड़े किसना किसना कहि नीर बहावय ।
नाँग ल नाथ ग नाचत नाचत मोहन हा जल बाहिर आवय।
देख सबो मन धीर धरे मुरलीधर के जयकार लगावय।

नाचत हे फन मा मनमोहन बाजत हे मुरली मन भावन।
मोर मुकूट ह माथ सजे मनमोहन रूप दिखे बड़ पावन।
एक घड़ी भगवान लगे हरि ताहन लागय माखन खावन।
हे मन मोहन तोर मया बरसे सब उप्पर गा जस सावन।

जीतेन्द्र वर्मा “खैरझिटिया”
बालको(कोरबा)
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किरीट सवैया : पीतर

काखर पेट भरे नइ जानँव पीतर भात बने घर हावय।
पास परोस सगा अउ सोदर ऊसर पूसर के बड़ खावय।
खूब बने ग बरा भजिया सँग खीर पुड़ी बड़ गा मन भावय।
खेवन खेवन जेवन झेलय लोग सबे झन आवय जावय।

आय हवे घर मा पुरखा मन आदर खूब ग होवन लागय।
भूत घलो पुरखा मनखे बड़ आदर देख ग रोवन लागय।
जीयत जीत सके नइ गा मन झूठ मया बस बोवन लागय।
पाप करे तड़फाय सियान ल देख उही ल ग धोवन लागय।

पीतर भोग ल तोर लिही जब हाँसत जावय वो परलोक म।
आँगन मा कइसे अउ आवय जेन जिये बस रोक ग टोक म।
पालिस पोंसिस बाप ह दाइ ह राखिस हे नव माह ग कोख म।
हाँसय गावय दाइ ददा नित राहय ओमन हा झन शोक म।

जीयत मा करले तँय आदर पीतर हा भटका नइ खावय।
छीच न फोकट दार बरा बनके कँउवा पुरखा नइ आवय।
दाइ ददा सँग मा रहिके करथे सतकार उही पद पावय।
वेद पुराण घलो मिलके बढ़िया सुत के बड़ जी गुण गावय।

जीतेन्द्र वर्मा “खैरझिटिया”
बाल्को(कोरबा)
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किरीट सवैया : कपूत नहीं सपूत बनो

देखव ए जुग के लइका मन हावय अब्बड़ हे बदमास ग।
बात कहाँ सुनथे कखरो बस दाँत निपोरय ओ मन हाँस ग।
मान करे कखरो नइ जानय होवत हे मति हा अब नास ग।
संगत साथ घलो बिगड़े बड़ दाइ ददा रख पाय न आस ग।

पूत सपूत कहूँ मिल जातिस नैन नसीब म काबर रोतिस।
राम सहीं लइका हर होतिस दाइ ददा नइ लाँघन सोतिस।
जानत होतिस दाइ ददा तब फोकट बन ला काबर बोतिस।
नाँव बुझावँव जे कुल के तब ओखर भार ला काबर ढोतिस।

आस धरे बड़ पालय पोंसय पूत बने बन मान बचावव।
ध्यान रखो ग सदा सुख के दुख के झन जी अब नाच नचावव।
जावत हावव छोड़ कहाँ घर द्वार सबो मिल साथ बसावव।
लाय हवे जग मा तुँहला भगवान हरे नित माथ नवावव।

जीतेन्द्र वर्मा “खैरझिटिया”
बाल्को(कोरबा)