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करमागढ़ म साहित्य संगोष्ठी के होही आयोजन




कवि गोपीनाथ बेहरा के 03 पुस्तक के विमोचन होही
कोसीर/रायगढ – रायगढ जिला तमनार विकास खण्ड के करमागढ शिव कुटीर म राष्ट्रीतय कवि संगम रायगढ जिला इकाई द्वारा 03 मार्च 2017 के मंझनिया बेरा 02 बजे ले साहित्य संगोष्ठीर कार्यक्रम के आयोजन रखे गए हावय। संगोष्ठी कार्यक्रम म नेवताए कवि मन कार्यक्रम म शामिल होहीं। कार्यक्रम म तमनार के वरिष्ठी साहित्यकार गोपीनाथ बेहरा जी के 03 पुस्तक के विमोचन होही जेमा ‘मन का स्वर’, ‘हमारा दर्शनीय भारत (निबंध)’ अउ ‘विचार वीथी (निबंध)’। कार्यक्रम के तैयारी म राष्ट्रीयय कवि संगम रायगढ़ जिला इकाई के पदाधिकारी मन जुट गए हें। साहित्यकार गोपीनाथ बेहरा के कृतित्व म साहित्य संगोष्ठीक कार्यक्रम के माई पहुना विशिष्टर साहित्यकार छत्तीसगढ़ के लोक सुर लक्ष्मण मस्तुरिहा हें अउ कार्यक्रम के अध्यक्षता अश्वनी पटनायक करहीं। इंचे विशिष्टर अतिथि के रूप म महेश कुमार शर्मा राष्ट्रीवय कवि संगम छत्तीसगढ़ प्रान्त संगठन मंत्री , डॉ. बलदेव साव राष्ट्रीतय कवि संगम रायगढ जिला इकाई संरक्षक , अंजनी कुमार अंकुर राष्ट्रीेय कवि संगम रायगढ जिला इकाई अध्यक्ष , साहित्यकार शिवकुमार पाण्डेय, बद्री प्रसाद मिश्रा , प्रफुल्ल कुमार पटनायक, अमित पुरोहित रायगढ हरिभूमि ब्यूरो चीफ, श्रीमती उजागरमती राठिया सरपंच जोबरो ल आमंत्रित हवंय। कार्यक्रम संयोजक वरिष्टर साहित्यकार राष्ट्रीपय बाल कवि शंभूलाल शर्मा जी के मार्गदर्शन म आयोजित होही। साहित्यकार गोपीनाथ बेहरा तमनार अंचल के वरिष्टर कवि आय जिंखर जनम 19 जुलाई 1940 को होए रहिस। उनला शुरू ले ही साहित्य के प्रति लगाव रहीस। साहित्य सृजन म बेहरा जी गीत, कविता, हाइकू, निबंध म अपन लेखनी सरलग चलावत हें। मेरा मन , गीत मेरे गीत , स्मृति के झारोखें से मेरा गांव इंखर प्रकाशित कृति हे। अवइया 03 मार्च के इंखर मन का स्वर , हमारा दर्शनीय भारत (निबंध) अउ विचार वीथी (निबंध) के विमोचन होही।
कोसीर ले संवाददाता लक्ष्मी नारायण लहरे ‘साहिल’



कल 2 अक्‍टूबर अहिंसा के पुजारी के पुण्‍यस्‍मरण के साथ ‘गुरतुर गोठ’ का प्रवेशांक

मेकराजाला म छत्‍तीसगढी भाखा के हमर ये पतरा म कुंआर महीना के अंक म हम आपमन बर लाए हन छंटुआ, कबिता, कहिनी, बियंग अउ बेरा-बेरा के बात । हम काली बडे फजर ले हमर संपादक सुकवि बुधराम यादव जी के दू आखर ला परसतुत करबो तेखर बाद ले सरलग येमा एक दिन म दू ठन रचना दस दिन ले परकासित होवत रहिही ।

आघू धरम के महीना, कातिक महीना म हम थोरकिन अउ जादा रचना के संग आपमन के आघू आबोन । हमर गुरतुर गोठ बर अब धीरे धीरे रचना मिले ल सुरू होगे हे फेर अभी कबिता ह जादा हावय । आप मन बताहू कि सरलग कबिता ला आप पढना पसंद करहव त हम परसतुत करत रहिबो ।

गुरतुर गोठ के जम्‍मो संगी