अबिरथा जनम झन गंवा

अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके।
भगवान ल दोस झन दे रे, कुछु नई दे हे कहिके॥
भगवान दे हे सुग्घर
दु हाथ, दु गोड़।
मिहनत ले तंय रे,
मुहु झन मोड़।
सोन ह कुन्दन बनथे, आगी म तपके।
अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके॥
तोला अऊ देहे बढ़िया,
दु ठन आंखी, दु ठन कान।
अइसन पाके अनमोल रतन
काबर बने हस अनजान?
फोकटे झन घूमत र, दूसर के बात म आके।
अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके॥
भूल के तंय अब रे,
शिकवा झन करबे।
गोंड़िया के बात ल धरबे,
अऊ अपन करम करबे॥
जीवन सुफल हो जही चल लक्ष्य बनाके।
अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके।
भगवान ल दोस झन दे रे, कुछु नई देहे कहिके॥

शेरसिंह गोड़िया
मुकाम कोलियारी, पो. गैंदाटोला
तह. छुरिया, जिला राजनांदगांव