कल 2 अक्‍टूबर अहिंसा के पुजारी के पुण्‍यस्‍मरण के साथ ‘गुरतुर गोठ’ का प्रवेशांक

मेकराजाला म छत्‍तीसगढी भाखा के हमर ये पतरा म कुंआर महीना के अंक म हम आपमन बर लाए हन छंटुआ, कबिता, कहिनी, बियंग अउ बेरा-बेरा के बात । हम काली बडे फजर ले हमर संपादक सुकवि बुधराम यादव जी के दू आखर ला परसतुत करबो तेखर बाद ले सरलग येमा एक दिन म दू ठन रचना दस दिन ले परकासित होवत रहिही ।

आघू धरम के महीना, कातिक महीना म हम थोरकिन अउ जादा रचना के संग आपमन के आघू आबोन । हमर गुरतुर गोठ बर अब धीरे धीरे रचना मिले ल सुरू होगे हे फेर अभी कबिता ह जादा हावय । आप मन बताहू कि सरलग कबिता ला आप पढना पसंद करहव त हम परसतुत करत रहिबो ।

गुरतुर गोठ के जम्‍मो संगी