छत्तीसगढ़-गौरव

हमर देस ये हमर देस छत्तीसगढ़ आगू रहिस जगत सिरमौर।दक्खिन कौसल नांव रहिस है मुलुक मुलुक मां सोर।रामचंद सीता अउ लछिमन, पिता हुकुम से बिहरिन बन बन।हमर देस मां आ तीनों झन, रतनपुर के रामटेकरी मां करे रहिन है ठौर।।घुमिन इहां औ ऐती ओती, फैलिय पद रज चारो कोती।यही हमर बढ़िया है बपौती, आ देवता इहां औ रज ला आंजे नैन निटोर।। राम के महतारी कौसिल्या, इहें के राजा के है बिटिया।हमर भाग कैसन है बढ़िया, इहें हमर भगवान राम के कभू रहिस ममिओर।।इहें रहिन मोरध्वज दानी, सुत सिर चीरिन…

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शिवशंकर शुक्‍ल के कहिनी

एक गांव मा एक बनिया रहत रहिस । ओखर मन करिस त वो ह परदेस कमाय बर निकल गिस ।दूसर देश म जाके बनिया ह गजबेच्चओ धन कमाईस । फेर धन के भोरहा म वो ह अपन नोनी बाबू ल नई भुलाईस । बनिया ह अपन कमई के जन दोगानी मोटरिया के अपन गांव लहुटे बर तियार होगे । फेर वो ह मने मन गुनिस के घर अमरे के पहिली चिठी डार दौं त घर मा परवार के जम्मो झिन सकला जाहीं । अईसे गुन के बनिया ह गांव बर…

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नवा साल आगे रे

नवा साल आगे रे, अपन जिनगी ल गढ़। मुड़ के पाछू मत देख, आघू-आघू बढ़॥ पहागे रात करिया, आगे सोनहा फजर। सुरूज उत्ती म चढ़गे, किसान खेत डहर॥ खोंदरा ले चिरइया बोलै, चींव-चींव अडबड़। नवा साल आगे रे, अपन जिनगी ल गढ़॥ दु हजार दस फेर कभू नइ तो बहुरय। घर बइठे तरिया भर, पानी नइ तो पुरय॥ दाई-ददा के पुरखौती, चीज म मत अकड़। नवा साल आगे रे, अपन जिनगी ल गढ़॥ अंधवा बर आंखी बन, भैरा बर कान जी। कोंदा बर मुंह बन, अप्पढ़ बर गियान जी॥ खोरवा,…

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