पं.श्‍यामलाल चतुर्वेदी के कहिनी : रतनपुरहिन सियानिन

घाट घटवँधा, गली खोर परछी चौंरा, जउन लँग कोलबिल कइय्या गलबजार कस माते रथे तिहां जमों जान डारथें के ये लंग अवस के रतनपुरहिन सियानिन होबेच करही। डहर चलती लइकनमन जउने लंग देखतिन तिहां दउंड़ के तिर मं आके गोहनाये लगतिन- ये बुढ़ीदाई ! एको ठन किस्सा कहानी कहि देना ओ ! ये डोकरी ये ममादाई ! आंय ओ ! एक ठन नान मुन कुछ कौह न ओ ! कभू तो डोकरी हांस भरय अउ कभू कभू कऊवा के भंसेड़ तिस-भडुवा भेट्टा होवा बेरा चिन्हें न कुबेरा जउने लंग पाथे…

Read More