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पं.श्यामलाल चतुर्वेदी के कहिनी : रतनपुरहिन सियानिन
घाट घटवँधा, गली खोर परछी चौंरा, जउन लँग कोलबिल कइय्या गलबजार कस माते रथे तिहां जमों... -
सरगुजिहा कहनी – काकर ठन बिहाव करबे
कतवारू गांव कर किसान रहिस। जांगरटोर मेहनत के कारन ओकर घरे कोनों चीज कर कमी नइ... -
छत्तीसगढ़ी कविता के सौ साल: संपादक-डॉ. बलदेव
हमर तो ए मेर उद्देस्य एकेच ठन आय के छत्तीसगढ़ के सब्बोच अंचल के कवि मन...
