छत्‍तीसगढ़ी जनउला (पहेली-प्रहेलिकायें)

बिना पूंछी के बछिया ल देख के, खोदवा राउत कुदाइस
खेत के मेंड ऊपर बैठके, बिन मूंड के राजा देखिस
(मेंढक, सर्प और गिरगिट)

नानक टुरी के फुलमत नांव हे, गंवा के फुंदरा गिजरिया गांव
(पैली, काठा )

काटे ठुड़गा उलहोवय नहीं
(बोडरी )

एक ठन धान के घर भर भूसा
(चिमनी )

कर्रा कुकरा, अंइठ पूंछी, अउ छू दिहीच, ते किकया उठीच
(शंख)

खा पी के जुठही बलावय
(बहारी )

दिन मन अल्लर राहय, रात कन अडे़ राहय
(छांद डोरी )

पेट भरी डउकी कुला ला चाटे
(चोंगी )

बन ले लानेंव बेंदरी, ओखर छेदेंव कान
दूध भात के भोजन करेंव, फेक देंव

मैदान
( पतरी )

गुरमेंट के मुंदरी पहिराइस, फोक ल टोर के कुला ल चाटिस
(चोंगी)

पाँच कबूतर पांचे रंग, महल में जाके एके रंग
(पान सुपारी )

अइंठत बोरे, चुचुवात निकारे
(डुवा)

गांव में आगी लगे, वो गांव में कुंआ
पान पतई जरगे, गोहार पारे कुंवा
(हुक्‍का)

नानकुन डबरी बने, बूडे़ भारी जहाज
पूछी कोती ले पानी पीथे, कोनो पंडित करो बिचार
(दिया)

बिना पंख के सुवना, उडि़ चलत अकास
रूप रंग उनके नही, मरै न भूख पियास
(जीवात्‍मा)

एक गांव में दुइ बहिनी, दूनो के एके नांव
दूनो के कोख में एके बालक, अउ होवत छोडे़ बोही गांव
(सुतई-सीप)

पूंछी उठा के खसले डारै
(जूता)

पेट चिरहा, पीठ कुबरा
(कौड़ी)

राजा के राज में नइए, मालिक के बगीचा में नइए बिन टोरे खबा जाय
(करा-ओला)

अटपटी छेरी के फटफटी कान, छेरी खाए कई गुना धान
(ढ़ेंकी)

उड़त देखे कांग कुड़ी, बैठत डेना पसार
लाखन जिवरा मार के, अपन परे उपास
(मछरी मारे वाले जाल)

एक गोड के घोडा बने, दुइ झन भये सवार
आगू हटे न पाछू हटे, बेड़ा में बहुत भगाय
(रंहचूली, झूलना)

होत साथ करधन पहिराय
(चोंगी)

धन कोरी बिकट बंधना, जे नई जाने ते चाबे नहना
(ककई)

नानचुन टूरा कूद कूद के पार बांधे
(सूजी-सुई)

पहाड़ ले उतरे रेचकी घोड़ी, ओकर पीला अठारा कोरी
(चलनी)

रात भर नंगरा, दिन भर पहिरे
(अड़गसनी)

मूठा में धरे, अउ खंचवा मं भरे
(जांता-चक्की)

कारी गाय के कारी पिला, कारी खद्दर खाय
पाथर उपर पानी पियै, ये जनाउर राय
(छुरा)

फांदे के बेर एक ठन, छोरे के बेर दू ठन
(दतवन-दातौन)

करिया घोड़ा भागे, लाल घोड़ा कुदाए
(आगी के लपट)

काटे ल कटायै नहीं, भोंगे ले भोंगावे नहीं
(छांव)

मारहूं त रो देबे, धर दुहू त चुप हो जाबे
(बर्तन)

एक पैसा ले लेनी देनी, पीछू कोती फेंक देनी
(फुंदरा)

फूले न धरे, गर मर जाय
(डलिया)

छितका कुरिया म बाग गुर्राये
(जांता)

तोर घर गे रहेंव, मोला देय पोंछ के
(बर्तन)

नदिया के तिर-तिर चिक्कन माटी, उठ रे मोर बंड़वा हाथी
(ढेंकी )

दस खीला जडे़ हे, दरबार में खडे़ हे, मैदान में पडे़ हे
(पतरी )

नदिया के तीर तीर चल बोकरा, पानी अंटागे मर बोकरा
(दिया)

एक सींग के बोकरा, मुंह कोती ले खाय बाखा कोती ले पगुराय
(जांता)

आए लूलू जाय लूलू, पानी ले डराय लूलू
(जूता)

भाई खडे़ ह, आंयर परत हे
(पोतनी)

सुलूंग सुटकेनी, ओकर फुनगी में गांठ
नई जानही ओकरे नाके ला काट
(नदिया तीर के गोंदिला)

अतका जड़ चुमिया में लोला पिला, ओला खाय माई पिला
(नारियर)

कुट कुटेला कुटते जाय, ओकर ददा के मेंछा टुटते जाय
तोर दाई के पेट फुटते जाय
(गेहूं)

बीच तरिया में केकरा फड़फड़ावय
(लाई)

उपर ले दिखये बड लोढ़वारी
ढ़ेढा कोती बीख, येहा काये तेला बता दे
झांकी हे भीतर तीन
(खीरा)

बारा महीना के चुरे भात, जब खाबे त ताते तात
(मिरचा)

एक फूल फूले, सौ फर फरे
(केरा-केला)

फूल फूले रिंगी चिंगी, फर फरे लमडोरा
(मुनगा)

सूखा डबरी में बगुला फड़फड़ाए
(लाई-मुर्रा)

बिना पानी के, उज्जर सूत
(दूध)

कटोरा ऊपर कटोरा, बेटा बाप ले गोरा
(नरियर)

पान गुजगुज फर लड़वा, ऐला नई जानही तेकर बाप भकुवा
(प्याज)

ऐंदुल असन बेंदुल असन, फोर देखें व सेंदुर जसन
(मसरी)

फरे न फूले नवे न डार, जब ले जीवय तबले खाय
(नमक)

थोकुन ओला, थोकुन ओला धरमस के उइला
(चटनी)

गांव तीर तीर मरी मरे, कउंवा कुकुर नहि खाय
तेला मनखे चिपचिप खाय
(गन्ना )

पान के ओधा, मांस के घोंघा
(भांटा)

भरैन फूलै, सूपा पर टूटे
(पान )

झिमरी टुरी के भितरी लेड़ा
(मुरई)

दिखब म लाल, छुअब म गुजगुज
(पताल)

धड़ कटै धरनी गिरे, गंगा नहायै जाय
हाड़ा दिखे ओके शंख सम, खाल बेचाए जाय
(पटुआ, सन)

बोवत देख्यों बाटरा, जामत मा कुसियार
ढाई महीना के छोकरा, दाढ़ी मेंछा म हुसियार
(जोंघरी-भुट्टा)

बगर बगर के भैंस चराय, बांधे पडरू मोटाय
(मखना)

ओमनाथ के बखरी में, सोमनाथ के

कांटा
एक ठन फूल फूले, पचास ठन मांटा
(केरा)

तीन मूड शंकर नो हे, दूध देथे ते गाय नो हे
रुख में रथे, ते पंछी नो हे
(नरियर)

खुसर खुसर खोर्री, छे आंखी तीन घोरी
(नागर, बैला, मनखे)

फूल फूले रिंगी चिंगी, फर फरे कटघेरा
उहू कथा जान के, जाबे अपने डेरा
(भसकटिया)

सुरुंग सुलोटी, फुलगी मं गांठ, नइ

जानही तेकर नाक ला काट
(लहसून)

राजा के राज में नइये, अउ बनिया के

दुकान में नइये
(बरफ)

हरदी के बूग बाग, पीतल के लोटा
ए कहनी ल नई जानबे, त बेंदरा के बेटा
(बैल)

सोन के तिजोरी में, लोहा के ढकना
फोर के देखेंव त, चार ठन पखना
(तेंदू)

लोहा कस पेंड़ में, सोन कस फूल
चांदी कस फर में, पथरा कस झूल
(बंबूल)

सोन कस गघरी, मैन कस ढपना
जे नई जाने तेला चाबे न हना
(तेंदू)

डलियन टूटे, बजरियन जाय
फरै न फूले, नवे न डार
(पान)

सगा घर सगा जाय, धर सगा सगा ला,
मार सगा सगा ला
(लोहा, हथौड़ी)

नान किन टूरी बिख टोनही
(मिरचा)

छिछिल तलैया मं, डूब मरै सितलैया
(पूड़ी)

बन ले लान्यों बेन्दरी, घर में छेदो कान
दूध भात के भोजन करके, फेंक दियो मैदान
(पतरी)

असाले में मसाले में, चार सींग वाले में, लाल नरियर के हरियर पूंछ
(लौंग)

लाल नरियर के हरियर पूछ, नी जानव तोर कतकले पूंछ
(बंगाला)

फूले फरै घुमर रहि जाय, एक झन टोरे सब झन खाय
(पान)

अहो रतनसिंह अहो रतनसिह, ऐंठ के

बांधे जूरा
लहू के धर बोहागे, हाड़ा के दू कूरा
(कुसियार-गन्‍ना)

दूनो कोठा के गोबर ला, एके हाथ में हेरै
(नाक)

तरी पचरी उपर परी, बिच में मोंगरी मछरी
(जीभ)

अत्थर ऊपर पत्थर, पत्थर ऊपर दू पइसा
बिन पानी के महल बनावैं, यह कारीगर कैसा
(दिंयार-दीमक)

बिना पांव के अहिरा भइया, बिना सींग के गाय
अइसन अचरज हम नई देखेन, खारन खार कुदाय
(सांप, मेंढक)

चार गोड़ दुई पांखी, मूड़ ले बडे आंखी
(दंतईया-बर्र)

पेट खलाखल पूछी गाभिन, नइ जाने तोर बेटी रांधिन
(चींटा)

करिया बन में रइथंव, लाल पानी पीथौं
(जूंवा-जूं)

रांध रइथे नई ते बांधे, सरी रात के अंधियारी एकै कूढ़ा होय
(हाथी)

पैर म चक्की बांध के, हरिना कूदा होय

(हाथी के पांव का चिन्‍ह)

आही तब नई आवय, नई आही तब

आही
(नदी, नाला)

लाल बइला पिछवाय हे, करिया बइला

अगुवाय हे
(कुहरा-धुआ)

बीच तरिया में कंचन थाली
(पुरइन पत्ता)

तरिया पार में थारी चिक चिकाय
(सूर्य )

गाड़ा भर गेहूं म एक ठन गोटी

(चंदा-चन्द्रमा)

देखब म दूनो रोटी एक बरोबर
(सूरज, चंदा)

पर्रा भर लाई, घर भर छरियाही

(चांदनी, अकाश)

पर्रा भर लाई, गने न सिराई
(चंदैनी-तारे)

नन्द बबा के नौ सौ गाय, रात चरत दिन

बेड़े जाय
(चंदैनी-तारे)

में जाथंव ते दे बे
(कपाट)

बच्छर दिन के भात, जभे छूबे तभे तात

(खातू )

माइ पिला के एक ठन करधन
(बारी के घेरा)

काँधे आय कांधे जाय, नेंग नेंग में मारे जाय
(बाजा)

सब जरै सब जरै, राजा के लिंगोटी झन झरै
(रद्दा-रास्‍ता)

कारी गाय करंगा पीला, मरगे गाय छटक गे पीला
(बन्दूक)

नानकुन टूरा गोटानी असन पेट, कहां जाबे टूरा रतनपुर देस
(चिट्ठी)

हहात हहा, ए तमासा कहां
पीठ उपर पोंद नाचे, ए तमासा कहां
(घोड़ा)

मोल तोल कतेक बेर, धरीच ततेक बेर
हाय सूं कतेक बेर, आधा म गीच ततेक बेर
पांव पलौटी कतेक बेर, सबो गीच ततेक बेर
(चूरी)

धर सगा सगा ल, मार सगा सगा ल
(हथौड़ी)

तें फार मेहर डारथंव
(पोता, धान)

ताकत हे तुकावत हे, दूनो गोड़ अलगावत हे
(कोकड़ा)

भाई के हर हालथे, भउजी के हर

चटके हे
(लुरकी, खिनवा)

तीन गोड़ के बरहा बने, दुइ गोड़ के गाय
एक गोड़ के अहिरा बने, सकल दूध दुहि खाय
(पटवारी की तिपाई, परकार और कलम)

अरे एक टांग, काय रे, चार टांग
दू टांग कहा गे हे, दस टांग ला मारे

(छत्ता, बाघ, आदमी, केकड़ा)

बिना पूंछी के बछिया ल देख रे, खोरवा राउत कुदाइस
खेत के मेड़ उपर बइठ के, बिन मूड के राजा देखिस
(मेंढक, सांप, केकड़ा)

अरे गड़ेर काए ओरमें, ओ देखत ये कोन ए रे
तोला मोला खाथे तेन ताय रे
(मुला, कांटा, आदमी)

बाप डरंगा, बेटा पोन्डा, नाती निन्धा

(पेड़, फूल, फल)

छिन्दक छिन्दक फूल, बारा राजा होइन मंजूर
(डूमर फुल)

अरे गडे़ कायरे ओर में, चल रे बजार जाबो
हमर गोसिया लेजही त जाबो
(भांटा, मुरई)

एक पेड दसपति के, तेकर बारा घाव
तीस तीस के झोथा, तेकर भिन्ने भिन्ने पांव
(मास, रात, दिन)

खटिया गांथे तान वितान, दू सुतइया बाइस कान
(रावण, मन्दोदरी)

तिल सरीखे गउ बने, चार मुख छय गोड़
अउ नौ मन के धड़ बने हे, पूछी अठारा हांथ
(4 बेद, 6 शास्त्र, 9 व्याकरण, 18 पुराण)

दस चरण धरती चले, पचास चरण अकास
तीन सीस दुइ नैन बने, साधू करो बिचार
(विष्णु, रुद्र, ब्रह्मा, चक्र, कमल, तीर, बैल, गरूड़, हंस)

बरुना चकती कर गहे, बगहा के असवार
लपा सरीखे मिलना, दिन में सौ सौ बार
(लक्ष्मी, परबती, सरस्वती )

कारी छेरी के गर में डोरी, चल रे छेरी हाट के बेरी
(तराजू )

अक्‍कड़ लकड़ी के जक्‍कड़ बंधना, नइ जानबे त चाब दिही नाहना
(ककई)

चार गोड़ के चारिक चप्‍पो, ओकर उपर निप्‍पो
आइस गप्‍पो ले गयो निप्‍पो, तब बांचिस चारिक चारिक चप्‍पो
(भैंसा, मेंढ़क, चील)

लाल बइला भागत हे, करिया बइलाल कुदावत हे
(आग, धुंआ)