Tag: Bodhan Ram Nishad Raja

हमर स्कूल

हमर गॉव के गा स्कूल,
सरकारी आवय झन भूल।
दीदी-भैया पढ़े ल, चले आहु ना…
खेल-खेल में सबो ल पढ़हाथे,
अच्छा बात ल बताथे…..दीदी…

रोज-रोज नवा-नवा, खेल खेलवाथे।
गोटी-पथरा बिन गिन, गिनती लिखाथे।।
हमर गॉव के……..दीदी……..

फल-फूल अंग्रेजी के, नाम हमन पढ़थन।
दुनिया ल समझेबर, जिनगी ल गढ़थन।।
हमर गॉव के……..दीदी………

दार-भात,कपड़ा के, झन चिंता करहु।
सर-मैडम बने-बने, ध्यान दे के पढ़हु।।
हमर गॉव के ……..दीदी………

सरपंच अउ पंच के एमा, हावै भागीदारी।
जिला अधिकारी संग, सबके जिम्मेदारी।।
हमर गॉव के………दीदी………..

मिलही बने शिक्षा, संगीत अउ गान के।
तुंहर सम्मान के, देश के अभिमान के।।
हमर गॉव के……….दीदी………….

अपन-अपन किश्मत,बनाहु संगवारी।
पढ़े-लिखेमन के जी, मान होथे भारी।।
हमर गॉव के……….दीदी………

शिक्षा ल पाये के, हमर अधिकार हे।
नइ छोड़ो स्कूल ल, उंहा रोज तिहार हे।।
हमर गॉव के……….दीदी………..

बोधन राम निषाद राज
सहसपुर लोहारा, कबीरधाम (छ.ग.)

निषाद राज के छत्तीसगढ़ी दोहा

माता देवी शारदा, मँय निरधन लाचार।
तोर चरन में आय हँव, सुन दाई गोहार।।

माता तोरे रूप के, करहूँ दरशन आज।
पाहूँ मँय आशीष ला, बनही बिगड़े काज।।

हे जग जननी जानले, मोरो मन के आस।
पाँव परत हँव तोर ओ, झन टूटै बिसवास।।

दुनिया होगे देखले, स्वारथ के इंसान।
भाई भाई के मया, होंगे अपन बिरान।।

आगू पाछू देखके, देवव पाँव अगार।
काँटा कोनो झन गड़य, रद्दा दव चतवार।।

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काँटा गड़गे पाँव मा,माथा धरके रोय।
मनखे गड़गे आँख मा,दुख हिरदय मा होय।

मन मंदिर मा राखले,प्रभु ला तँय बइठाय।
सदा तोर मन खुश रही,घर बन सब हरसाय।।

बड़े फजर भज राम ला,जिनगी कर उद्धार।
मन ला पबरित कर चलव,होही डोंगा पार।।

जय जय सीता राम के,करुना के हे खान।
अवध राज महराज हे,कृपा सिंधु भगवान।।

राम लखन अउ जानकी,गए रहिन बनवास।
सोना मिरगा देख के,सीता  मन  उल्लास।।

शब्दार्थ:- गड़गे=चुभना,तँय=तुम,तोर= तुम्हारा,बड़े फजर=सुबह,पबरित=पवित्र,
डोंगा=जीवन की नाव,मिरगा=हिरण।

बोधन राम निषाद राज
व्याख्याता पंचायत “वाणिज्य”
सहसपुर लोहारा, कबीरधाम (छ.ग.)