जस गीत – काली खप्परवाली

काली खप्परवाली आगे ,काली खप्परवाली लप लप लप जीभ लमावत, रूप धरे विकराली सब दानव ल मरत देख के, शुम्भ निषुम्भ गुस्सागे चंड मुंड कहाँ हौ कहिके , जल्दी तीर म बलाए जावव पकड़ के तुम दुर्गा ल , लावव मोर आगू Read More

गजल : दिन कइसन अच्छा

दिन कइसन अच्छा आ गे जी। मरहा खुरहा पोक्खा गे जी ।। बस्ती बस्ती उजार कुंदरा महल अटारी तना गे जी ।। पारै हाँका हाँसौ कठल के सिसका सिसका रोवा गे जी ।। पीए बर सिखो के हमला अपन सफ्फा खा गे Read More

छत्‍तीसगढ़ी हाईकुु संग्रह – निर्मल हाईकुु

रचना कोनो बिधा के होवय रचयिता के अपन विचार होथे। मैं चाहथौं के मोर मन के बात लोगन तीर सोझे सोझ पहुंचय। चाहे उनला बदरा लागय के पोठ। लोगन कहिथे के भूमिका लेखक के छाप हँ किताब ऊपर परथे। अइसन छापा ले Read More

मोर गाँव के बिहाव

नेवता हे आव चले आव मोर गाँव के होवथे बिहाव। घूम घूम के बादर ह गुदुम बजाथे मेचका भिंदोल मिल दफड़ा बजाथे रूख राई हरमुनिया कस सरसराथे झिंगुरा मन मोहरी ल सुर म मिलाथे टिटही मंगावथे टीमकी ल लाव।।1।। असढ़िया हीरो होण्डा Read More

छत्तिसगढि़हा कबि कलाकार

पानी हॅ जिनगी के साक्षात स्वरूप ये। जीवन जगत बर अमृत ये। पानी हँ सुग्घर धार के रूप धरे बरोबर जघा म चुपचाप बहत चले जाथे। जिहाँ उतार-चढ़ाव, उबड़-खाबड़ होथे पानी कलबलाय लगथे। कलकलाय लगथे। माने पानी अपन दुःख पीरा, अनभो अनुमान Read More

मोर गाँव ले गँवई गँवागे

मोर गाँव ले गँवई गँवागे बटकी के बासी खवई गँवागे मुड़ ले उड़ागे पागा खुमरी पाँव ले पनही भँदई गँवागे सुग्घर दाई बबा के कहिनी सुनन जुरमिल भाई बहिनी करमा सुआ खोखो फुगड़ी लइकन के खुडवई गँवागे खाके चीला अँगाकर फरा जोतै Read More

व्‍यंग्‍य : बवइन के परसादे

कोनो भी बाबा के सफलता के पछीत म कोर्ह न कोई बवइन के पलौंदी जरूर होथें। मैं अपन चोरी चमारी के रचना सुना सुनाके तीर तखार के गाॅव म प्रसिध्द होगे हौं। फेर घर म जोगडा के जोगड़ा हौं। उही चिटियाहा चड्डी Read More

कहानी : मंतर

अहिल्या हॅं दुये चार कौंरा भात ल खाये रिहिस होही। ओतकेच बेरा परमिला झरफिर झरफिर करत आइस । ओरवाती के खालहे म बैठ गे। अहिल्या देखते साथ समझ गे। परमिला हॅ आज फेर अपन बेटा -बहू संग दू -चार बात कहा -सुनी Read More

तुँहर जउँहर होवय : छत्तीसगढी हास्य-व्यंग संग्रह

छत्तीसगढी सहज हास्य और प्रखर ब्‍यंग्य की भाषा है। काव्य मंचों पर मेरा एक एक पेटेंट डॉयलाग होता है, ‘मेरे साथ एक सुखद ट्रेजेडी ये है कि दिल की बात मैं छत्तीसगढी मे बोलता हूँ, दिमाग की बात हिन्दी में बोलता हूँ Read More

नशा मुक्ति के गीत

1.नशा हॅ नाशी होथे नशा हॅ नाशी होथे सुख के फाॅसी होथे घिसे गुड़ाखू माखुर खाए दाँत हलाए मुँह बस्साए बीड़ी म खाँसी आथे गुटका खाए पिच पिच थूके दारू पीए कुकुर अस भूँके धन के उद्बासी होथे चिलम तिरैया के आँखी Read More