दूसर हो जाथे

जे हर पर के प्रान बचाथे तेकर से इस्वर सुख पाथे बुधमता मन सिरतो कहिथे वनिजेच मां लछमी बसथे मनखे-मनखे होथे अंतर कोनो कीरा कोनो कंकर दुनों दिन ले बिनसिन पांड हलुवा मिलिस मिलिस नई माड़ दू कौरा जब जाथे भीतर तभे Read More

सुकलाल प्रसाद पाण्डेय के छत्‍तीसगढ़ी वर्णमाला गीत

वर्णमाला के स्वर अ के अमली खूबिच फरगे। आ के आंखी देखत जरगे। इ इमान ल मांगिस मंगनी। ई ईहू हर लाइस डंगनी। उ उधो ह दौड बलाइस। ऊ ऊघरू ल घला बलाइस। ऋ ऋ के ऋषि हर लागिस टोरे। सब झन Read More