हमर छत्तीसगढ़़ म अभी जउन नवा पीढी के लइकामन पढ-लिख के तियार होवत हें तेन मन ह छत्तीसगढी़ भासा ले दूर भागत हें। वोमन छत्तीसगढी म बोले बर नई चाहंय। छत्तीसगढी भासा जउन ह हमर मातृ भासा ए, तेमा बोले बर लजाथें। घर म ददा-दाई, बबा, कका दाई मन लइकामन के संग छत्तीसगढी म कुछू पूछथें त वोमन वोकर जुवाब हिन्दी म देथें। येहा बड दु:ख के बात आय। हमर देस के दूसर राज के लइकामन अपन ‘मातृभाषा’ बात करइ ल अपन सान समझथें। ऐकर ले उलट हमर छत्तीसगढ के…
Read MoreYear: 2017
लोककथा : अडहा बइद परान घात
एकठन गांव म एकझिन लइका रहय। वोहा एक दिन दूसर गांव घूमे बर गीस। रद्दा म वोहा देखिस के ऊंट ह बगुला खात रहय अउ बगुला ह वोकर नरी म फंसगे। ऊंट ल सांस ले म तकलीफ होय लगिस। वोहा भुईंया म घोलंड के छटपटाय लागिस। अतका देखके ऊंट के मालिक ह एकझन बइद ल बला के लानिस। बइद ह जोर-जोर से कहिस- बागुल बारी जाय, थुला जाय कहिके ऊंट के नरी ल जोर- जोर से मारिस। बगुला ह फुट गे अउ ऊंट ह खडा होगे। वो लइका ह सब…
Read Moreपुरखा मन के दूत होथे कउवा
चालीस-पचास बछर पाछू के बात आय। ममा गांव जावंव त पीतर पाख म ममा दाई ह बरा- सोहारी बनाय अउ तरोई के पाना म ओला रख के मोहाटी म मडा देवय। तहान ले जोर-जोर से कहाय- ‘कउंवा आबे हमर मोहाटी, कउंवा आबे हमर मोहाटी।’ ममा दाई के कहत देर नइ लागय अउ कांव-कांव करत अब्बड अकन कठउंवा ह आवय अउ बरा-सोहरी ल चोंच म दबा के उडा जावय। तब ममा दाई काहय – ‘कउंवा मन खाथे, तेला पुरखा मन पाथे।’ नानपन के ए बात ह अब सपना कस लागथे। काबर…
Read Moreशराबबंदी बर महिला मन के अभियान ल हमर पूरा समर्थन अऊ सहयोग : डॉ. रमन सिंह
भारत माता वाहिनी अऊ महिला कमांडो के पांच हजार सदस्य मन ल डरेस अऊ सीटी दे के घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह हर शराब के विरोध म बालोद जिला के महिला मन के भारत माता वाहिनी अऊ महिला कमांडो के पांच हजार सदस्य मन द्वारा चलाए जावत जन-जागरण अभियान के बड़ई करनि। डॉ. सिंह हर कहिन के शराबबंदी बर अभियान चलावत ए महिला मन ल राज्य सरकार के पूरा समर्थन हे अऊ उमन ल हर संभव सहयोग मिलही। ओ मन ल निःशुल्क डरेस अऊ सीटी दे जाही। डॉ. सिंह हर…
Read Moreअपन-अपन समझ
बरसाती दोपहरी म अपन अंगना के परछी म सुभीत्ता बइठे-बइठे दयावती सोचत रहिस- ‘तीजा, हमर मन के सबसे बडे तिहार। ए बछर के तीजा म..।’ दयावती ल एक-एक बात, अपन हिरदय म आरी चले कस लागय। ए दारी नवा कालोनी के नमिता अउ पुरानी बस्ती के अचला तीजा म मइके नइ जा सकिन। त वोला, जउन वोकर मन के दूर के रिस्ता के मौसी होथे, तीजा के बिहान म ‘मइके के पानी’ पिये खातिर, वो दूनो ल घर म बुला ले रहिस। तीजा के निरजला उपास के सेती हालत अइसने…
Read Moreसाहित्य म भ्रस्टाचार
हमर देस म कोनो छेत्र नइ बांचे हे जिंहा भ्रस्टाचार नइये। राजनीति म भ्रस्टाचार ह तो काजर के कोठी कस होगे हे। जेन राजनीति म जाथे वोकर उप्पर करिया दाग लगथेच। भ्रस्टाचार के पांव ह दूसर छेत्र म घलो पड गे हे। साहित्य छेत्र जिंहा अब तक मनीसी, चिंतक, साधु-संत जइसन मन के बोलबाला रिहिस आज उहां नकलची अउ भ्रस्ट लोगनमन के दबंगई चलत हे। दूसरमन के किताब ल अपन नांव ले छपवइया मन के घलो कमी नइये। छत्तीसगढ के साहित्य जगत म घलो अइसन होवत हे। पंडित मुकुटधर पांडेय,…
Read Moreविकास के काम ल गिनाए के जरूरत नइ होवय, काम खुदे बोलथे : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमत्री हर किसान मन ल देइस नवा शक्कर कारखाना के सौगात रायपुर, 21 जनवरी 2017। मुख्यमत्री डॉ. रमन सिंह कहिन के विकास के काम मन ल बहुत जादा गिनाए के जरूरत नइ होवय। काम खुदे बोलथे, एक सड़क बनथे, तो वो ह जनता ल अपने आप दिख जथे। राज्य सरकार जउन विकास के काम करत हे वो काम ह खुदे बोलत हे। ये वाले नवा शक्कर कारखाना घलोक एकर एक अच्छा उदाहरण हे। मुख्यमत्री हर आज संझा कबीरधाम जिला के ग्राम बिशेषरा (विकासखण्ड-पंडरिया) म जिला के दूसर अऊ राज्य के…
Read Moreअपन सुवारथ रईही त मोहलो मोहलो
आज के समे मा कोनों ककरो नई होवय ग, कोन हितवा ये कोन बईरी ये काकर सुवारथ कामे हे समझ नई परयI बिना सुवारथ के कोनो मनखे ककरो तीर नई ओधय, अईसने मोला लागथेI अब देख ले गाँव मा पिछलेच सरपंच चुनई के गोठ आय, सरपंच बने बर नंदलाल भाई ह पूछत पूछत घर आवय,भिलई ले गाँव जाव त आगू पीछू होवत रहय, आगू आगू ले गोठीयावय,बने बात बेवहार करय। फेर मेंहा समझ गे रहेव, तभो ले मेंहा वोला बोलेव देख ग नंदलाल भाई चुनई मा हार जीत लगे रहिथे,…
Read Moreचुनाव सिरिफ दू साल दूरिहा, बजट होही लोक लुभावन
20, जनवरी, 2017 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव अब सिरिफ दू साल बांचे हे। एती ए समे नवा साल के बजट बनाए बर सरकार म बइठका उपर बइठका होवत हे। बुधवार अऊ बिरसपत के दिन मुख्यमंत्री हर कई ठन विभाग मन के साहेब मन संग बइठ के ओखर बजट अउ मांग मन उपर गोठ-बात करिन। ये समें के बजट लोक लुभावन हो सकत हे – मुख्यमंत्री रमन सिंह हर संकेत दे हावे के ए साल 2017-18 के बजट लोक लुभावन हो सकत हे। सरकारी टैक्स कम हो सकत हे, जवान…
Read Moreहेलमेट के भूत
हमर मइके रइपुर म नवा रहपुर बन गे हे, तेन ल तो तेहां जानत हस। टूरा के दाई ह अपन अउ अपन मइके के बढई सुनके खुस होगे। भला कोन माइलोगिन खुस नई होही। लडियावत कहिस- नवा रपुर बने ले कहां एको गे हंव मइके। मेहा कहेंव- ले ना ये बखत तोर पूजभजित मन के बिहाव के नेवता आही तक चल देबे। टूरा के दाई ह मगन होके कहिथे- अई ह, नवा रदपुर के रोड मन तो अब अब्बड चौंक-चाकर हावय कहिथें। जुन्ना रइपुर म मोटर गाडी के पीं-पों, मेला…
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