छत्तीसगढ़ के व्‍यंग्‍यपरक हिंदी उपन्‍यासों की रचनधर्मिता

शोधकर्ता: सुराना, अभिनेष
गाइड : शर्मा, शैल
कीवर्ड: व्‍यंग्‍यपरक उपन्‍यास
पूर्ण तिथि: 2005
विश्वविद्यालय: पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय
छत्तीसगढ़ के व्‍यंग्‍यपरक हिंदी उपन्‍यासों की रचनधर्मिता

अनुक्रमणिका

अध्याय – 1 : छत्तीसगढ़ की राजनीतिक-सामाजिक स्थितियाँ और छत्तीसगढ़ का व्यंग्य-लेखन
1.0 छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि
1.1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1.2 सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
1.3. छत्तीसगढ़ का व्यंग्य-साहित्य एवं व्यंग्यकार
1.4. छत्तीसगढ़ में व्यंग्यानुकूल सामाजिक एवं राजनैतिक परिस्थितियाँ
1.5. छत्तीसगढ़ में गद्य-व्यंग्य लेखन एवं व्यंग्य उपन्यासकार
1.6. शोध-कार्य की प्रविधि एवं सीमाएँ
1.6.1. पूर्व शोधकार्य पर एक दृष्टिकोण
1.6.2. शोध-कार्य की प्रविधि एवं सीमाएँ
1.6.3. शोध-कार्य का उद्देश्य एवं महत्त्व

अध्याय – 2 : व्यंग्य और आधुनिक हिन्दी व्यंग्य साहित्य
2.0. व्यंग्य: स्वरूप एवं प्रकृति
2.1. व्यंग्य की परिभाषा
2.2. व्यंग्य के प्रकार एवं प्रतिमान
2.3. उपन्यास का स्वरूप एवं छत्तीसगढ़ के व्यंग्य-उपन्यासों का सामाजिक सरोकार और परिवेश
2.3.1. स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी-उपन्यासों में व्यंग्य का विकास
2.4. हिंदी उपन्यास और छत्तीसगढ़ के हिंदी व्यंग्य-उपन्यास का स्थान
2.4.1. छत्तीसगढ़ के हिंदी व्यंग्य उपन्यास
2.4.2. किस्सा बहराम चोट्टा का- विश्वेन्द्र ठाकुर
2.4.3. दास्तान दो जमूरों की – शरद कोठारी
2.4.4. भगवान विष्णु की भारत यात्रा – त्रिभुवन पांडेय
2.4.5. भोंदू पुराण – पुरुषोत्तम अनासक्त
2.4.6. चुनाव -विनोद साव
2.4.7. मिठलबरा की आत्मकथा – गिरीश पंकज
2.4.8. माफिया- गिरीश पंकज

अध्याय – 3 : छत्तीसगढ़ के व्यंग्यपरक हिन्दी-उपन्यासों की रचनाघर्मिता
3.1. साहित्य की रचनाधर्मिता और रचनाप्रक्रिया
3.2. उपन्यासों की रचनाधर्मिता
3.3. छत्तीसगढ़ के व्यंग्यपरक उपन्यासों की रचनाधर्मिता और यथार्थ
1.3. छत्तीसगढ़ के व्यंग्यपरक हिन्दी उपन्यास और
1.4. सामाजिक-राजनैतिक दृष्टिकोण एवं लेखकीय उत्तरदायित्व

अध्याय – 4 : छत्तीसगढ़ के व्यंग्यपरक हिन्दी-उपन्यासों की शैली
4.1. शैली और व्यंग्य का शैली-विन्यास
4.1.1. वर्णनात्मक शैली
4.1.2. मिथक शैली
4.1.3. फैंटेसी शैली
4.1.4. रेखाचित्र शैली
4.1.5. दृष्टांत शैली
4.1.6. पत्रात्मक शैली
4.1.7. प्रतीक शैली
4,1.8. संवाद शैली
4.2. छत्तीसगढ़ के हिन्दी व्यंग्य उपन्यासों का शैलीगत अध्ययन
4.2.1. वर्णनात्मक शैली
4.2.2. पत्रात्मक शैली
4.2.3, प्रश्नोत्तर शैली
4.2.4. संवाद शैली
4.2.5. फैंटेसी शैली

अध्याय – 5 : छत्तीसगढ़ के व्यंग्यपरक हिन्दी-उपन्यासों की भाषा-शैली
5.0. व्यंग्य उपन्यासों की भाषा शिल्प
5.1 चयन
5.2. विचलन
5.3. समानांतरता
5.4. दास्तान दो जमूरो की : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.4.1. भाषा शिल्प
5.4.2. शब्द चयन
5.4.3. वाक्य-नियोजन
5.4.4. विचलन
5.4.5. समानांतर
5.4.6. मुहावरे-लोकोक्तियाँ-सूक्तियाँ
5.4.7. रचनागत वैशिष्ट्य
5.5. महापात्र : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.5.1 भाषा शिल्प
5.5.2. शब्द चयन
5.5.3. मुहावरे-लोकोक्तियाँ-सूक्तियाँ
5.5.4. वाक्य-नियोजन
5.5.5. रचनागत वैशिष्ट्य
5.6. मिठलबरा की आत्मकथा : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.6.1. भाषा शिल्प
5.6.2. शब्द चयन
5.6.3. विचलन
5.6.4. समानांतर
5.6.5. वाक्य-नियोजन
5.6.6. रचनागत वैशिष्ट्य
5.7. माफ़िया : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.7.1. भाषा शिल्प
5.7.2. शब्द चयन
5.7.3. वाक्य नियोजन
5.7.4. विचलन
5.7.5. समानांतर
5.7.6. रचनागत वैशिष्ट्य
5.8. चुनाव : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.8.1. भाषा शिल्प
5,8.2. शब्द चयन
5.8.3. वाक्य नियोजन
5.8.4. विचलन
5.8.5. समानांतर
5.8.6. मुहावरे-लोकोक्तियाँ-सूक्तियाँ
5.9. भोदू-पुराण : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.9.1. भाषा-शिल्प
5.9.2. शब्द चयन
5.9.3. लोकोक्तियाँ
5.9.4. विचलन
5.9.5. समानांतर
5.10. भगवान विष्णु की भारत यात्रा : व्यंग्य उपन्यास की भाषा
5.10.1. भाषा शिल्प
5.10.2. शब्द चयन
5.10.3. वाक्य नियोजन
5.10.4. विचलन हे
5.10.5. समानांतर
5.10.6. रचनागत वैशिष्ट्य

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