छत्तीसगढ़ी नाटक – मतदान बर सब्बो झन होवव जागरूक

(चुनाव के बुता म लगे शिक्षक घर-घर जा के मतदाता मन के सूद लेथे अउ मतदान करे बर सब्बो ल जागरूक करत हे) शिक्षक रददा म रेंगत जात रहिथे त ओखर भेंट एक पागल मनखे ले हो जाथे, पागल- जय हिंद गुरुजी Read More

संसो झन कर गोरी

संसो झन कर गोठ हा करेजा म रहि जाही। मया करे के येही बेरा हे नई तो पहर हा सिरा जाही।। आबे मोर तीर म ता तोला मया के झुलना झुलाहुं। लाली टिकली ला तोर मुड़ म सजाहुं। आँखि ला टेढ़ के Read More

कलाकार के कला के नई रहिगे हे मोल

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”] अभी के बेरा म छत्तीसगढ़ म कला के कमी नई हे अउ कलाकार मन के घलोक कमी नई हे, फेर कला के मान करईया मन के कमी होंगे हे। अब सब झन कला या कलाकार Read More