भारत ल मदर इंडिया कइथन, भारत माता मं काबर लजाथन? छत्तीसगढ़ मं हमन रइथन, छत्तीसगढ़-महतारी कहे मं काबर लजाथन? छत्तीसगढ़ के अनाज सबे खाथन, जय छत्तीसगढ़ कहे मं काबर लजाथन? दूसर ल सनमान सबे करथन, दाई-ददा के पांव छुए म काबर लजाथन? दाई ल मम्मी कइथन, दाई कहे म काबर लजाथन? ददा ल डैडी कइथन, ददा कहे म काबर लजाथन? कका ल अंकल कइथन, कका कहे म काबर लजाथन? काकी ल आंटी कइथन, काकी कहे म काबर लजाथन? अंगरेजी म सान से गोठियाथन, छत्तीसगढ़ी बोले म काबर लजाथन? हाय-हलो सनमान…
Read MoreYear: 2010
अबिरथा जनम झन गंवा
अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके। भगवान ल दोस झन दे रे, कुछु नई दे हे कहिके॥ भगवान दे हे सुग्घर दु हाथ, दु गोड़। मिहनत ले तंय रे, मुहु झन मोड़। सोन ह कुन्दन बनथे, आगी म तपके। अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके॥ तोला अऊ देहे बढ़िया, दु ठन आंखी, दु ठन कान। अइसन पाके अनमोल रतन काबर बने हस अनजान? फोकटे झन घूमत र, दूसर के बात म आके। अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके॥ भूल के तंय…
Read Moreबरसा के बादर आ रे
मयारू आंखी काजर कस छा रे। बरसा के बादर आ रे॥ सुक्खा होगे तरिया, नरवा। बिन पानी के कुंआ, डबरा॥ बियाकुल होगे जीव-परानी। सबो कहंय-कब बरसही पानी॥ मोर मीत के केस छरिया रे। बरसा के बादर आ रे॥ पंखा डोलावय हवा सरर-सरर। बरसे पानी झझर-झरर॥ मेघ ह गरजय, घुमरय, बरसय। चिरई-चिरगुन, परानी मन हरसय॥ मेघ-मल्हार तैं गा रे। बरसा के बादर आ रे॥ सबके तन-मन ल जुड़ा दे। खेत-खार हरिया दे॥ नदिया म धार बोहा दे। भुंइया ल हरियर रंग सजादे॥ परब-तिहार ल ला रे। बरसा के बादर आ रे॥…
Read Moreलीम चउरा के पथरा
लीम चउरा के पथरा बिकट चिक्कन खड़भूसरा रहिस होगे कइसे बड़ चिक्कन ओ तो जानत हवय सबके अन्तर मन। पंच-पटइल बइठ नियाव करिस सुन्ता सुम्मत के नवा रद्दा गढ़िस। उधो-माधो के भाग ह खुलिस सरकारी योजना म साहेब दूनों के नाव लिखिस। मंगलू बुधियारिन के भांवर परिस इही मेर दूनो झन के पिरित सिरजिस। बिहने ले सांझ होथे गजब तमासा भौंरा-बांटी, बिल्लस तास-तीरी पासा। पुनु रतिहा दिसना दिसाथे धरके कलरकइहा ल दूर फुरसूद सोथे। अनगइहां मन आके इही मेर थिराथे सगा सोदर के पता ठिकाना ल पाथे। गांव भरके मनखे…
Read Moreजिनगी कइसे चलही राम
सिरावत हे गांव ले जम्मो बुता काम जिनगी कइसे चल ही राम… नागर नंदागे अउ टेकटर ह आगे हसियां हिरागे अउ हरवेस्टर ह छागे चुटकी म नाहकत हे दाउ के काम… मंडल गउटियां सब सहर धरलिस भइया बनिहार ल बनी नहीं, नइए पउनी के पोसइया उजरत हे छइयां जनावत हे घाम… चारों खूंट अंधियार हे नइ मिलय उहर ऊप्पर ले पंचैती लंगरा, घोरत हे जहर सरग सही गांव ह, होवत हे नरक समान आज देखबे गांव त अंधियारी म बुड़त हे इही गांव के सेती सहर जगर-मगर बरत हे भलाई…
Read Moreढेलवानी – कहिनी
‘बहू ह बने खाय बर दिस हे मितान चैतु कथे। दिन बीतत गिस एक बखत सुकारो ह अपन घर वाला ल काहत राहय। ते ह तो भारी भलमंता बने हस तोर मितान ल बनी के पइसा अउ भात बासी घलो देवत हस। काकर घर अइसने पइसा खाय बर देत होही। आज ले ओला खाना देय बर बंद करहूं। अब्बड़ दिन होगे तोर मितान ल खावत-खावत।’ एक ठक गांव म बिसाहू अउ चैतु रिहिस। दूनो झन के चेहरा ह मिलती-जुलती रहिस, तेकरे सेती गांव के सियान समारू ह बिसाहू अउ चैतु…
Read Moreचौकीदार घुघवा ( बाल कहिनी)
एक समे के बात ए। सब पंछी मन सकला के तय करीस के आज ले हमर चौकीदार घुघवा रइही। जगवारी अऊ रखवारी के बूता ल घुघवा के सिवा अऊ कोनो दूसर पंछी मन नई कर सकयं। रात के घुघवा ह सबला देख सकत हे। मुखिया पंछी के निरनय ल सब मान लेथें। घुघवा के चौकीदार बने ले चिरई-चिरगुन मन खुसी मनाइन। रात के बेफिकरी होके राहयं। सोच-गुन म परगे ओमन जऊन इंखर सिकार करय। इंखर अंडा-पिलवा ल खाय। घुघवा के चौकस रखवारी ले ऊंखर सिट्टी-पिट्टी गुम होगे। बड़ मुसकिल होगे…
Read Moreदमांद बाबू : कबिता
मही म रांधे हे, नोनी भुंज बघार के।ले-ले सुवाद, ‘दमांद बाबू’ भाजी बोहार के।डारे हे नोनी मिरचा के फोरन।कब चुरही हम्मन अगोरन।बघारे हे नोनी गोंदली डार के।ले ले… चेतावय दाई, बिगरे झन नोनी।माहंगी के भाजी, नई देइस पुरउनी।रांधबे नोनी सुग्घर झाड़-निमार के।ले-ले… मही-मही कही के, दाई पारे गोहार गा।गजब मिठाय हे भाजी बोहार गा।मत पूछव खरखरइ परसी दुआर के।ले-ले… दमांद ल पसंद हे बोहार भाजी।‘बिदुर’ घर खाइस ‘भगवान’ भाजी।‘मया के भाजी’ खाले चटकार केले-ले… हांसत खलखलावत बिते तुंहर जिनगानी।मिलत राहय सबर दिन, एक लोटा पानी।बइठ जा ‘दमांद बाबू’ पलटी मार…
Read Moreकहिनी – जुड़वा बेटी
जसोदा ल होस आगे। संघरा दू दू नोनी के महतारी बने के खुसी म जम्मो दु:ख, पीरा ल भुलाके हांस-हांस के गोठियाए ल धर लीस। वो बेचारी ल का पता द्वापर जुग के यसोदा माता जइसे येमा के एक झन लईका के महतारी ओहा नोहय। सच्चाई ह तो नोहर अउ परमपिता परमेश्वर के छाती म दबके रहिगे। तीन चार दिन के चहल-पहल अउ उछाह के पाछू नोहरसिंग के घर आज के रतिहा हा सांय-सांय करत हे। बर्तन-भाड़ा अउ समान मन येती-वोती जतर-कतर परे हे। ईंकर बटोरा करईया घर मालकिन जशोदा…
Read Moreजिनगी ल बचाव भइया : जितेन्द्र कुमार साहू ‘सुकुमार’ के कबिता
जिनगी बड़ कीमती हे बचाव भइयारही-रहिके मुंहू म आगी झन लगाव भइयातुहर पर्डरा दांत होही बिरबिट करियागुटखा, तम्बाकू झन खावव भइयाबड़ मेहनत करके सकेले हाबे पुरखा मनधनहाल धुंगिया म झन उड़ावव भइयाबेरा ले पहिली हो जहू तुमन डोकराअतेक जादा झन इतरावव भइयाये सबो नसा के गलत परभाव हरे ताव म अतेक झन चिचयाव भइयातुमर बढ़िया रहूं तब रही हमर राजदेस, समाज अउ हमर गांव भइयामान लो ये अड़हा सुकुमार के बात लमऊत ल झटकुन झन बलाव भइयाठन-ठन ले सुक्खा तरिया होगे भाटोमोर मया के किसानी परिया होगे भाटोआगी फेकत हे…
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