नवा बैला के चिक्कन सिंग चल रे बैला टिंगे-टिंग : किरकेट के कहिनी

पूरा संसार म भारतीय क्रिकेट के नाम इहां तक होगे के आस्ट्रेलिया टीम के कप्तान रिकी पोंटिंग के हे लगिस कि भारत के बिना क्रिकेट में मजा नइए। सन् 2011 में फेर विश्वकप बर क्रिकेट मैच होही अउ भारत उपमहाद्वीप के चार देस लंका पाकिस्तान बंगलादेश अउ भारत में से एक ला मेजबानी करे के हे। ये संसार में मनोरंजन बर बहुत किसम के खेल होथे। अपन-अपन समय के मुताबिक सब प्रसिध्द रहिन। खेल मन ला दो भाग में बांट देथन पहिली घर भीतर कमती जगह में खेले जाने वाला…

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सबके अपन रंग

पेड़ पौधा मन अपन रंग बदलथे लोग अपन सुवारथ बर खाये पीये के जीनिस ला रंगा के बेचत है। जीव जंतु मन अपन रंग बदलथे। टेटका मेचका मन अपन दुसमन ला चकमा देबर रंग बदलके वाला होथे। बिगर बुध्दिवाला मन अपन रंग बदल सकत हे, त बुध्दि वाला मनखे अपन रंग ला बदले बर काबर छोड़ही। मनखे ला जेती देखले वोती रंगे-रंग के गोठ ला गोठियात मिलहीं। नीरस कोनों अपन जिनगी ला देखना नी चाहे। माई लोगिन के काय पूछना। उंकर तो रंगे अलग रिथे। बेरा संग सबो मन अपन…

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श्यामू विश्वकर्मा के कबिता : मन के आंसू मन म पोंछ ले

मन के पीराकर देथे तन ल खोखलाचाहे होवय जवाननई छोड़य लईका-डोकरा।घुट-घुट के बेंगवाजइसे येती-ओती तलमलाथेनिकाल देबे कुंआ ले ये बेंगवाबिन पानी के फड़फड़ाथे॥तस मन के पीराबन के भाला तन ला कोचयमने हर बिमार पड़े हेत तन के पिरा कोन सोचय।ये मन के पिरा हर,मरत ले नई छुटयखाले चाहे कतको किरियामया हर नई टुटय॥नइये चिनहारी मया केसब मया एके म समाय हेमया म मया हरमन के पिरा हर बंधाय हे॥कोन रइगे सुध लेवइया।काकर करा गोहराबेसब जान-अन्जान होगेये मन के पिरा ले के काकर करा जाबे॥कर ले सुध अपन तन के ।बनके…

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राघवेन्द्र अग्रवाल के गोठ बात : जान न जाइ नारि गति भाई

एक ठन गंवई रहय। उहां मनसे परेम लगा के रहत रहंय। एक दुसर के सुख-दु:ख म आवंय-जायं, माई लोगिन, बाब पिला मन घला संघरा गुठियावयं बतावयं, कोनो ल काकरो ऊपर सक-सुभा नि रहय, फेर परेम के पूरा ह काला अपन डहर तिर लिही तेला कोनो नि जानंय, इही कथें आयं, कहत बांय हो जाथे कहिके। वो गांव म एक झन पुरोहित रहय। कथा वार्ता कहयं घर-घर जाके अऊ अपन गिरस्थी के गाड़ी ल चलावत रहय। वोला अडबड़ दिन ले को जानी का बात वोकर मन म रहत ते, अपन गोसइन…

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रघुबीर अग्रवाल पथिक के छत्तीसगढ़ी मुक्तक : चरगोड़िया

छत्तीसगढ़ के माटी मा, मैं जनम पाय हौं।अड़बड़ एकर धुर्रा के चंदन लगाय हौं॥खेले हौं ये भुँइया मा, भँवरा अउ बाँटी।मोर मेयारूक मइया, छत्तीसगढ़ के माटी॥ छत्तीसगढ़ मा हवै सोन, लोहा अउ हीरा।हवैं सुर, तुलसी, गुरु घासीदास, कबीरा॥हे मनखे पन, अउ अइसन धन, तबले कइसन।चटके हवै गरीबी जस माड़ी के पीरा॥ कहूँ खेत के धान, निचट बदरा हो जाही।नेता हर चितकबरा अउ लबरा हो जाही॥का होही भगवान हमर अउ हमर देश के?खाल्हे ले उप्पर तक ह खदरा हो जाही॥ भला करइया खावै गारी।गरकट्टा मन खीर सोंहारी॥हमर लहु ला चुहक चुहक…

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कलजुगहा बेटा : नान्हे कहिनी

रतिहा के दस बजे के बेरा दसरी डोकरी के खैरपा ल कोनो लाठी मं ठठाइस अऊ जोर-जोर ले गारी देवत चिल्लाइस त बेचारी ह खटिया ले उठिस। खैरपा ल खोलिस, तभे ओखर जवान बेटा ह मन्द के नसा म गिरत-हपटत भीतरी आइस। बेटा के मुंह ह मंद के दुर्गन्ध म बस्सात रहय। बेटा ह चिल्लाइस ये दाई, मोला सौ रुपिया अभीच्चे दे, मोला खचित काम हे। दसरी डोकरी ह ओला गुस्सा म किहिस अरे नालायक, सबो जेवर-गहना ल जुआं, सराब म उड़ा दे हस। बहू ल घर ले भगा देहस…

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कारी गाय अउ ओखर दूध

 कारी गाय के बहुत महत्व हावय। कारी गाय के तो अतका महिमा हे के वोकर दूध अऊ कारी तुलसी के पत्ती ल छै महिना तक खाय त कैंसर तक ठीक हो जाथे अइसे काशी नगरी के प्रख्यात वैद राजेश्वर दत्त शास्त्री के कहना हे। एक समे रहिस जब मनसे प्रकृति के संग म रहय तेखर सेती उनकर जिनगी सहज, सरल रहय। वो समे म गउ माता के पूजा करंय वोला महतारी मानंय, उंकर दे दूध, दही, घीव ल पी खा के मनसे तंदुरुस्त रहंय। महाभारत म गउ माता के बिसे म…

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कबिता : नवा हे बिहान

मोर मयारु छत्तीसगढ़ गजब हे महान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ तन म पसीना ओगार के चोवा रुकोवत हे। खेत-खार म मोर नगरिहा, करम के बीजा बोवत हे॥ ये अड़हा किसान ल नइए गरब गुमान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ कोलकी-कोलकी बइला रेंग, बइला के सिंग म माटी गा। नवा बहुरिया लाए हाबे चटनी संग म बासी गा॥ रापा, कुदारी, नागर कोप्पर जेकर मित-मितान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ बलावय वोला चिरई चुरगुन अऊ मेड़ पार गा। सबके…

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कहिनी : चलनी में दूध दुहे, अउ करम ला दोस दे

छत्तीसगढ़ के जुन्ना हाना ह बड़ प्रभावकारी खुद जीवन के उपयोगी होथे। चलनी में दूध ल दुहबे तब का फायदा होही? पूरा दूध जमीन ऊपर गिर जाही। ये नुकसान ल देख के आदमी अपन भाग्य ल दोस देथे। का करबो भाई! मोर किस्मत खराब हे। पूरा दूध भुइंया में गंवागे। अइसने एक गांव में दुकालू अउ दुकलहा मितान रहिन। दुकलहा हमेसा रोते रहाय अउ अपन दु:ख ल दुकालू ल सुनावत राहाय। एक दिन दुकलहा के एक बइला मरगे तब एकड़ा बइला बर फेर जोड़ी खरीदे बर बजार गइन। बजार में…

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मोबाईल हास्य कबिता

एक दिनमे ह लेड़गा भईया ल कहेंवसुन गा भईयामोर घर जामे ह मोबाइल लभूला गें हंवओला घर ले धर के लाऐला सुन केवो ह दौड़त-दौड़तमोर घर गीसघर के मोहाटी मामोर बाई ल बइठे पाईसमोबाईल के बदला मामोर बाई ल धर के आईस। हरखराम पेंदरियाश्रीराम मंदिर रोड महासमुन्द (छग) आरंभ मा पढव : – शताब्दि की चयनित कहानियों में डॉ.वर्मा की भी कहानी पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’

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