यमराज ह पिकनिक मनाय जब धरती म आइस






धरती में खास करके भारत में देवारी तिहार के तैयारी चलत रहिस। रंग रोगन फटाका झालर बलफ से दुकान मन ला सजाय जावत रहिस हे। हीरकयमराज हा दूरबीन लगाके धरती कुती ला देखिस अउ उदास होगे। आगू में जुगाली करत यमवाहन (भैंसा) खड़े रहिस हे। मालिक यमराज के उदास चेहरा देख के वो हा चिन्ता में पडग़े। यमराज हा बहुत सेण्अमेण्टल होगे रहिस हे। भैंसा जी बोलिस का बात ये महाराज आप बहुत उदास दिखत हो? यमराज बोलिस-वाहन, सबके पूजा होथे सिरिफ मोर पूजा कोनो नइ करय। यमराज के आंसू डबडबागें। भैंसा जी थोकिन हंसिस, थोकिन देर तक नेता मन के पान चबाय के अंदाज में जुगाली करिस अउ रस ला गुटके के बाद बोलिस। तुंहरो पूजा होथे महराज फालतू टेंसन लेके उदास मत होवव। धरती में खास करके भारत में नरक चतुर्दसी के दिन सबो जनता तुंहर याद करथे। न तुंहर मंदिर हे, न कथा होवय न आरती तभो ले जनता अपन लंबा उमर के परार्थना तुंहर से करथे। बिसवास नइ होवत हे तब चलौ ये दरी भारत के दौरा में निकले जाय। यमराज थोकिन खुस हो के बोलिस सिरतोन काहत हस वाहन? के मोर मन रखे बर अइसन बोलत हस? भैंसा जी बोलिस हण्ड्रेड एण्ड टेन परसेण्ट सही बात ये महराज। अब तुमन ये मत पूछौ के मैं हा वो करिया भंइसा ला भैंसा जी काबर लिखत हौं। अरे भई परान लेबर जब यमराज आथे तब वोला अपन पीठ में चढ़ाके कोन हा लाथे? उही करिया भ्ंइसा हा लाथे ना? अरे भई मैं तो वो करिया भंइसा ला परसन्न करना चाहत हौं ताकि जब मोर परान हरे के बारी आवत तब वो हा थोकिन बिलम जावय। कोनो मेर थोकिन सुरता लेवय या रस्ता में खड़े होके देर तक चुरुक-चुरुक पिसाब करय या कोनो स्मार्ट भैंस ला देख े बिदक जावय अउ बारा महीने में बारा तरीके से तुझको पियार करुंगा रे….. ढिंग चिंगा…. वाले गाना ला भैंस के पाछू-पाछू रेंगत गावय अउ यमराज ला मोर पता के बजाय दूसर के पता में ले जा के भटका देवय। अरे एक दिन भी बिलम जही तब मैं हा एक ठन कविता या लेख तो अउ लिख सकत हौं ना?
के बीच सहमति बनगे के धरती में भारत वष्ज्र्ञ के दौरा करे जाय। यमराज बोलिस अरे यार भारत तो ठी हे ये वर्ष माने तो साल होथे न? भैंसा जी कहिस महराज वर्ष के एक अर्थ भू खण्ड भी होथे। भारत वर्ष माने भारत-भूमि। यमराज फेर परस्न करिस-तोला कोन बतइस हे? भैंसा जी बोलिस एक दिन मैं हा स्कूल के पिछोत में चरत रेंहेंंव अउ पाटकर सर हा हिन्दी के पीरेउ में पढ़ावत रहिस हे तब सुने रहेंव।…. अच्छा तब तो माने ला लगही। अइच्दा अब ये बता के यात्रा बर का-का समान धरके जाय बर परही? जेखर से कोनो तकलीफ झन होवय। भैंसा जी कहिस महराज वइसे तो सबे समान धरती में मिल जथे फेर भी कुद रखना है तब तुंहर मजी मई, मैं का बोलंव? मैं तो सिरिफ दही भर ले के जाइूं काबर के भारत में दही या तो मिलय नहीं या मिलथे तेन हा दूध पावडर के बने रहिथे। दूध पावडर के दही हा थोकिन बिसरइन आथे, मोला परसंद नइ आवय। किरिस्न भगवान के जमाना का गय, दूध-दही के नहिया सुख गे। दूधवाले मन सबो दूध ला पइसा के लालाच में डेरी में बेंंच देथे, ओखर लइका मन ीाी दूध-दही बर लुलवा जथे। मोला दूध के संग मुर्रा अडबड़ मिठाथे।
यमराज प्ूछिस रम रखैं के व्हिस्की? भैंसा जी कहिस महराज ओखरो जरूरत नइये। उहां गांव-गांव में दारू खुलेआम मिल जथे। दूध नई मिलही पर दारू चोबीसों घण्टा मिल जथे। आजकल तो जेबमें कनिहा में खोंच के लोगन घर पहुंच सेवा दे बर लग गेहे। हां कुद चिल्हर पइसा जरूर रखे बर परही काबर के उहां चिल्हर अउ छोटे नोट के भारी कमी हे, तेखर सिती दुकानदार मन टोकन थम्हा देथे। यमराज फेर पूछिस एकाध अप्सरा रख लौं, मनोरंजन बर? वोला भैंस में बइठा के ले चलथन। तैं भैंसी के संग वेलेण्टाइन डे मनाबे अउ मैं अप्सरा के संग केसिनो या डान्सबार जाहूं। वो मोला सीला के जवानी… अउ मुन्न बदनाम हुई… गाना में डान्स देखाही। भैंसा जी बोलिस महराज अप्सरा के भी जरूरत नइये उहां बड़े-बड़े सहर के होटल मन में एखर मन के रैकेट चलथे। ए टू जेड ग्रुप के मिल जथे। जहां तक भैंस के बात हे तब भारत के हर सहर में पांच-पांच ठन खटाल हे। उहा एक से एक स्मार्ट भैंस हे। बेनी जइसे सींगवाले, कोस्टक जइसे सींगवाले, मच्छर अगरबत्ती जइसे सींगवाले, छोटे, मंझोले, बड़े सबो साईज के भैंस उपलब्ध हे। यमराज फेर बोलिस अरे यार टेंसन में मोर माथा बहुत पिराथे, मस्तक सूल हर पावडर रख लेथौ। भैंसा जी बोलिस महराज टेंसन मत ले। उहां के झण्डू बाम बहुत फेमस हे। इहां तक मुन्नीबाई तको हा झण्डू बाम लगा अउ पीरा गायब।




देर तक बहस करे के बाद यात्रा सुरु होगे। रस्ता में यमराज बोलिस-वाहन रस्ता कइसे कटही? हिन्दी फिलिम के कोना गाना याद होही ते सुना। भैंसा जी बोलिस हम गाना सुरु करबो तक सबके कान फट जही, बरम्हा जी हा हमन ला बेसुरा ही पेदा करे हे। मैं कुद चुटकुला सुना देथौं-परीक्षा में एक ठन परस्न आय रहिस लौह पुरुस के काम अर्थ होथे? एखर अर्थ होथे के दृढ़ विचार वाले आदमी ला लौह पुरुष कहे जाथे पर लइका लिखे रहिस जेन लोहा खरीदोि अउ लोहा बेंचथे वोला लौह पुरुष कहे जाथे। विज्ञान में एक परस्न आय राहय, रमन प्रभाव काला कहिथे? डॉ.सी.वी.रमन हा समुद्र के पानी के रंग नीला होय के एक सिद्धान्त निकाले रहिस जेला रमन प्रभाव कहे गीस। लइका किखे राहय एक रुपिया अउ दू रुपिया वाले चांउर से छ.ग. से गरीबी दूर होगे, इही रमन प्रभाव ए। गाय के निबंध में एक लइका लिखे राहय गाय हमारी माता है, हमको कुद नहीं आता है। गुरुजी लिख दीस बैल तुम्हारा बाप है, नम्बर देना पाप है अब गाय हा माता होइस तब भैंस हा बड़े दाई होगे अउ छेरी हा काकी होगे काबर के एखरो मन के दूध हमन पीािन। यमराज हा खूब ठहाका मार के हांसिस। अइसे तइसे उन भारत के सीमा में आगे। भैंसा जी पूछिस महराज भारत के कोन से राज्य लेण्ड करौं? यमराज हा सोच बिचार के कहिस यार भारत के सबो राज्य के दौरा तो कर चुके हन। नवा राज बने हे उंहे ले चल-झारखण्ड, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़। भैंसा जी बोलिस झारखण्ड अउ उत्तराखण्ड बर रिवर्स गेयर लगाय बर परही जेमा तकलीफ होही काबर के कल एक ठन भैंस हा मोर पाछू कोती ला सींग में हकन देहे। घाव में दवई लगाय हौं पर दरद अभी कम नई होय हे। कल मैं मर्डर पिच्चर देख के थोकिन बहक गे रेहेंव। अब सामने छत्तीसगढ़ हे उंहे ले चलथौं। एक्सीलेटर दबइस अउ पहुंचगे छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ में राउत मन देवारी के तैयारी में लगे राहय। छत्तीसगढ़ आते साठ यमराल ला हजामत बनवाय के सुरता आइस। एक ठन सेलून के पास रुक गे पर यमरानी के हाथ के बने कच्चा अइरसा खाय के कारन पेट में कुद गुडग़ुड होए लगिस लकर-धक सुलभ में घुसके फुलफोर्स के ताकत लगाइस तब थोकिन बने लागिस। सुलभ से निकलिस तब भैंसा जी एक ठन फरमाइस कर दीस-सीतल सेलून में मोर आगू के सफेद बाल ला डाई लगवा के करिया करवा देतेव महराज। सफेद चेंदुवा ला देख के सबो भैंसी मन मोला डोकरा होगे अइसे समझथे अउ बनत बात हा बिगड़ जथे। मोर करिया सरीर में ये सफेद चेंदुवा हा सफेद दाग कस अलकरहा लगथे। यमराज के मइनता भोगा गे। जोर से दपकारिस चुप बे, सिर से पांव तक तै करियाच करिया हस। रात के अंधियार में उही चेंदुवा ला देख के तोला खोजथौं, उहू ला करिया कर देबे तब मोला अंधरौटी आ जही भैंसा जी उदास होगे। यमराज हा चापलूसी करत बोलिस देख वाहन वो हा सफेद बाल नोहय, तोर माथा के चन्दा ए, पुन्नी के चन्दा वाला वोइसने परकासित राहन दे। पुन्न के चन्दा सबो ला इन मिलय। इहां तक संकर जी भी हा दूज के चन्दा से काम चलावत हे। तैं पुन्नी ला अमावस में काबर बदलना चाहत हस यार?
सेलून से निकल के कुद आघू बढिऩ तब राउत मन सोहई सजावत रहिन। भैसा जी ला खुस करे बर यमराज बोलिस-वाहन तोर बर ये गतहार खरीद दौं का? भैंसा जी बोलिस महराज तोर जनरल नालेज बहुत कमजोर हे। येला तो भैंसी मन पहिनथे। यमराज परस्न करिस काबर? जवाब मिलिस काबर के ये हा भैंस अउ गाय मन के मंगलसूत्र ए, अउ मंगलसूत्र औरत मन पहिनोि पुरुस मन नहीं।
आघ्ज्ञू गीस तब एक ठन टाकीज मिलिस जिहां तकदीरवाला फिलिम चलत रहिस हे। उहा अड़बड़ भीड़ देख के यमराज पूछिस इहां अतेक ट्रेफिक जमा काबर हे? भैंसा जी बममतइस के इहां पिच्चर चलत हे ये टाकीज ए। काभू पार्टी आफिस में कभी पिच्चर हॉल में टिकिट पाए बर लाईन लगाय बर पइथे। दूनों झन मनखे रूप धरके पिच्चर हॉल में घसगे। पिच्चर के फेमस सीन आय के बाद यमराज पूछिस ये कोन एक वाहन? भैंसा जी कहिस वोखर डॉयलाग नइ सुने का हम है यम, यम है हम? ये कादर खान ए जेन यमराज के रोल करत हे। ये पिच्च ला बने देख ले, यमराज ला का-का करना चाही तेन येमा बताय गेहे। पिच्च्र छुटते ही दूनों झन मतांल कोती खरीदी करे बर चल दीन। बने-बने जिनिस देखके यमराज हा यमरानी बर समान खरीदे लगिस, भैंसा जी हा अपन भैंसबाई साहब बर खरीदिस। दूनों झन देवारी के खूब मजा लीन। यमराज ला गपागप होटल के केक अड़बड़ पसंद आइस, खाइस अउ लेगे बर भी खरीदिस।




यमपुरी पहुंच के यमरानी के जन्म दिन के केक काटे गीस। भैंसा जी हा अपन पुछी ला एण्टीना कस ठाढ़ करके घोलण्ड के वोखर पांव परिस अउ पेंउंस के डबबा गिफ्ट करिस। हैप्पी बर्थ डे टू यू मैडम कहिके जुगाली कर-करके हकन के गबर-गबर खाके केके के आनन्दर ले बर धर लीस। यमराज ला थोकिन संतोस होइस के चलौ कोनो न कोना बहाना लोग मोरो पूजा करथे। ओती भैंसा जी हा अपन भैंसबाई साहब ला सोहई गिफ्ट दीस। भैंसबाई साहब एकदम सरप्राइज होगे पूछिस व्हाट इज दीस? भैंसाजी बोलस डा………र …लि… ग ये मंगलसूत्र ए, छत्तीसगढ़ से स्पेसली तोर बर लाय हौं। ये बेसरम के फूल ए बिना पानी डारे भी जिन्दा रहिथे, हमर बारी में लगा देबे। तोर खोपा में लाय के काम दीही। कल एला पहिन के यमरानी घर बइठे बर चल देबे, अइसन कलरफुल मंगलसूत्र तो ओखरो जघा नई ए, अउ खोपा में बेसरम फूल के गजरा लगाय बर झन भुवाबे। पंड़वा के दाई, पारा मोहल्ला के सबो भैंसी मन तोर सन्दरता ला देख के दंग रहि जही अउ जलन घलो मरही। मैं हा लइका मन बर किसम-किसम के खजानी लाय हौं, अइसे कहिके झोला से ठेठरी खुरमी, अइरसा, चंउसेला, पपची, मुर्रालाडू, भक्कालाडू, उसनाय केंवट कांदा ला उलद दीस। ये खेड़ा ए भैंसा प्रजाति बर एकदम पोष्टिक हे। बने जतन के रख।
तैं मोर कतका खियाल रखथस, आई लव यू कहिके भैंसबाई हा भैंसा जी के छाती से चिप गे। भैसा जी हा गाना गाए बर धर लीस… रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना… भूल कोई हमसे न हो जाए…. अउ एखर बार का होइस होही तेखर कल्पना तुमन कर सकथौ। सबोच बात ला मही थोर बतावत रहूं जी?

डॉ.राजेन्द पाटकर ‘स्नेहिल’
हंस निकेतन-कुसमी, व्हाया-बेरला



One Thought to “यमराज ह पिकनिक मनाय जब धरती म आइस”

  1. प्रमोद यादव

    बढ़िया व्यंग्य…मनोरंजक…बढ़ाईई..,

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