Tag: Askaran Das Jogi

बस्ता

घाठा परगे खाँध म
धर लेथन बस्ता
कभू-कभू हाथ म

झोला के पट्टी संघार के
बोह लेथन बस्ता
लकड़ी के साँगा डार के

ज्ञान के जोरन आय
सबो पढ़थैं जेला
प्राथमिक शिक्षा कहाय

पीठ म पाठ लदाथे
भाग गढ़े खातिर
कतको दूरिहा रेंगाथे

फूलतिस हँसी फूल अस होंठ म
बस्ता के लदना होतिस कम
जब रहितिस ग्रंथालय सबो स्कूल म

बस्ता बस ले बाहिर
जेन बोहैं तेने जानैं
बोहे बर कइसे होगैं माहिर |

असकरन दास जोगी

चँदा दिखथे रोटी कस

अक्ति के बोनी बितगे
हरेली के बियासी
लाँघन-भूखन पोटा जरत
कोन मेर मिलही भात तियासी
देवारी बर लुवई-टोरई
मिस के धरलीन धान
खरवन बर रेहरत रहिगेन
गौटिया मन देखाइन अपन शान
जन-जन खाइन
मालपुआ फरा ठेठरी
नइ खुलिस हमर बर
ककरो गठरी
गाँव म घर नहीं
न खार म खेत
चँदा दिखथे रोटी कस
कर लेतेव कोनो चेत

असकरन दास जोगी
9340031332
www.antaskegoth.blogspot.com

धन्यवाद ल छत्तीसगढ़ी मँ का कइथें ?

अमरू- बाईक ल फर्राटा स्पीड मँ चलावत गेंट ले अँगना भीतरी घुसरीच। थथर-थईया करत धरा-रपटी बाईक खड़ा करके अँगना मँ बइठे अपन बबा कोती दौंड़ीच।
जुगुल दास- ओकर बबा हर ओकर हालत ल देख के अपन पढ़त किताब ल बंद करके कइथे, अरे धीर लगा के गाड़ी चलाय कर अराम से आव। तोला आज का होगे हे ?
अमरू- तीर म आके कहत हे,का बतावँ बबा आज तो जउँहर फंसगेवँ।
जुगुल दास- हो का गे तेला तो बता ?
अमरू- आज हमर बी.ए. सेकेण्ड ईयर क्लास के पहिला दिन रहिस, हमर कॉलेज मँ हिंदी पढ़ाय बर दिल्ली ले नवा मैडम आय हे।
जुगुल दास- त का होगे?
अमरू- पुरा बात ल तो सुन बबा।
जुगुल दास- ले न बता न ग।
अमरू- का हे न कक्षा मँ आईस सबसो परिचय पुछिस अउ परिचय बताईस तहाँ पढ़ाय ल चालू करिस।
पढ़ात-पढ़ात का कथिच का मथिच छत्तीसगढ़ी के बारे मँ पुछे ल धरलीस।
जुगुल दास- त बता दे रइते न।
अमरू- जतका पुछिस सब बतायेवँ कक्षा के अउ संगी मन घलो बताईन। फेर…?
जुगुल दास- फेर का ?
अमरू- बबा मैडम ह पुछिस धन्यवाद ल छत्तीसगढ़ी मँ का कइथें ? जतका झन कक्षा मँ रहेन सब के बोलती बंद होगे कोनो उत्तर नइ दे पायेन।
मैडम सब झन ल कहे हे अपन-अपन घर मँ पुछ के आहव कइके।
जुगुल दास- त तोला ए जानना हे की धन्यवाद ल छत्तीसगढ़ी मँ का कइथें ?
अमरू- हव बबा बता न ग ?




जुगुल दास- अमरू ल तरेरत आँखी करके कइथे हत रे जोजवा अतका ल नइ बता सके।
अमरू- कहत हे नइ बता सकेवँ तभे तो पुछत हवँ।
जुगुल दास- अपन भाव ल बदलत कइथे अरे जोजवा धन्यवाद ल छत्तीसगढ़ी मँ धन्यवाद ही कइथें धन्यवाद के छत्तीसगढ़ी मँ अउ कोनो आखर नइहे। एहर छत्तीसगढ़ी भाखा मँ आगत आखर आय, हिंदी ले मंगनी लेके बउरत हन।
अमरू- अइसन काबर ग बबा धन्यवाद ल धन्यवाद ही कहत हन एला नवा रूप तको तो देहे जा सकत हे धन्बाद घलो तो कइ सकत हन ?
जुगुल दास- अरे यार तुम नवा जमाना वाले मन करा इही तो गलत बात होथे। सोंचना न समझना, अपने अपन हाँकना, भला कोनो आखर के स्वरुप अउ अर्थ ल बिगाड़ के का मिलही।
अमरू- मुँह ल लटकाए खड़ा होगे।
जुगुल दास- बात अइसे हे बेटा हमर छत्तीसगढ़ के संस्कृति सबले अलग अउ निराला हे, इहाँ अपनापन के भाव बहुत जादा हे।
एक ठन बात घोख… तुम आजकल के पढ़ईया लिखईया मन कइथव न दोस्ती म नो सॉरी नो थैंक्स, अपन बीच मँ का धन्यवाद कहना यार छोड़ न।
अमरू- हव बबा अइसना तो कइथन।
जुगुल दास- हाँ अइसना कइथव बस अउ सबले जादा थैंक्स सॉरी धन्यवाद ल बोहाथव घलो, फेर हमर छत्तीसगढ़िया संस्कृति ह ए सैध्दांतिक बात ल व्यवहारिक जिनगी मँ उपयोग करथे।
अमरू- वो कइसे बबा ?
जुगुल दास- अरे अमरू बेटा हमर छत्तीसगढ़िया व्यवहारिक जिनगी बड़ मयारू हे सबके बीच भारी अपनापन हे मया हे , हमन कोनो ल दूसर नइ मानन तेकरे सेतिर धन्यवाद, थैंक्स जइसन आखर के निर्माण नइ होइस अउ ओकर उपयोग घलो। हमर पुरखा मन के सोंच ल देख कतका बढ़िया रहिस। एक बात अउ सामने वाला हमर बर कुछु करे रइथे त ओकर उपकार अउ सहयोग ल छोटे नइ करना चाहिन कोनो हमर बर भलाई के काम करिन त ओकर भविष्य बर दुआ करे के काम करिन … जेन तुमन दोस्ती म नो सॉरी नो थैंक्स कइथव वो सैध्दांतिक वाक्य ह छत्तीसगढ़ के व्यवहारिक जिनगी आय।
अमरू- का बबा आप तो गजब के बात बतायेव, अब इही बात ल मैडम ल काली बताहूँ काहत अमरू घर डाहर घुसर जाथे।
जुगुल दास- मुस्कावत फेर अपन किताब ल पढ़े ल धर लेथे।
अमरू- दूसर दिन अपन कक्षा म बबा के बताये बात ल मैडम ल बताथे मैडम अउ कक्षा के सबो संगी ए बात ल जानके बहुँत खुश होथे अउ अमरू घलो ल बताके हाय जीव लागथे, मैडम सो साबासी घलो मिलथे।

असकरन दास जोगी
9340031332
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विष्णुपद: छंद – मोखारी

बबा लाय हे दतवन नोनी,दाँत बने घँसबो !
जीभ सीप के कुल्ला करबो,कुची फेंक हँसबो !!1!!

बनतुलसा बर बोइर बमरी,टोर लन चिरचिरा !
करंच मउहाँ सब्बो दतवन,लीम हे किरकिरा !!2!!

बमरी सोंटा के मोखारी,गाँव-गाँव चलथे !
घड़ी-घड़ी मा खेलत खावत,आज कल निकलथे !!3!!

हँसिया बाँधै डँगनी धरके,दतवन अभी मिलही !
लाम छँड़ा ला टोरै सब्बो,दाँत तभे खिलही !!4!!

नवा जमाना धरके आगे,टूथ ब्रस घँसरबे !
टूथ पेस्ट तो रइथे बढ़िया,देख तहूँ फँसबे !!5!!

मजा कहाँ जी दतवन जइसन,करू लीम बमरी !
दाई बाबू माँगत हावै,चलना जी लमरी !!6!!

बैकटेरिया मरथे नोनी,बढ़िया मुँह लगथे !
साफ दाँत तो दिखथे चकचक,बदबू हर भगथे !!7!!

सुरता बढ़थे बमरी घँसले,यहू बुता करले !
आवाज मधुर बोइर करथे,ध्यान यहू धरले !!8!!

नैन जोति तो बढ़थे बर ले, श्वेत प्रदर हँटथे !
रक्त प्रदर के नाशक होथे,केत बने मिटथे !!9!!

दतवन के अब देखव जादू, घर-घर सुख लमरे !
लाख बिमारी नाशक बनके,मेटे बर टमरे !!10!!

मूत्र रोग अउ पथरी स्वाँसा,दाँत सेंध्द हिलना !
मुँह के छाला अउ पायरिया,सबला हे मिटना !!11!!

पेट चेहरा बढ़िया सेहत,झुमरत मन करले !
कफ ब्लड प्रेशर जाही सबके,गाँठ बाँध धरले !!12!!

अइसन होथे जी मोखारी,जादू बड़ चलथे !
देश मोर तो घँसथे दतवन,केत हाँथ मलथे !!13!!

असकरन दास जोगी
मो.नं.: 9340031332

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धूवा मारे : विष्णुपद छंद

(भ्रूण हत्या)

धूवा मारे काबर पापी,पाबे का मन के !
बेटा मिलही ता का करबे,चलबे का तनके !!1!!

बेटी-बेटा मा भेद करे,लाज कहाँ लगही !
नाक-कान तो बेंचे बइठे,कोन भला ठगही !!2!!

नारी-नारी बर जी जलथे,मोर इही कहना !
ममता देहव तबतो दाई,सुघर संग रहना !!3!!

धूवा सँचरे लालच ठाने,मशीन मा दिखथे !
चेक कराके फाँदा डारे,पापी मन हिलथे !!4!!

डॉक्टर बनथे संगी तुँहरे,लोभ फूल खिलथे !
नियत-धरम के सौदा करथे,कोख तहाँ मिटथे !!5!!

कतको धूवा अलहन सँचरे,मया जाल फँसके !
धूवा मारव काबर संगी,आज तुमन हँसके !!6!!

नाबालिक में धूवा परगे,बोल कोन रखही !
पाप मान के फेंकैं सबतो,कुकुर खड़े भखही !!7!!

करथव काबर अइसन गलती, रोथन मर मरके !
बिनती हे तुम रोकव अलहन,जीथन डर डरके !!8!!

जेकर उजड़े कोख जान ले,हिरदे हा जरथे !
जीथे काया दिखथे सबला,अंत्तस हा मरथे !!9!!

जानौं बढ़िया बात सबो जी,गुरुजी जब रहिसे !
छोड़व अइसन पाप करम ला, सबला तब कहिसे !!10!!

बैना संस्कृति चालू करके,क्रांत्ति करदिच सगा !
सतगुरु घासी जेकर परिचय,सबला कहवँ जगा !!11!!

कोख तरी तब लइका बाँचै,धूवा बंस पलै !
पढ़े लिखे अब पापी होगैं,कोख मरघट चलै !!12!!

गुरु घासीदास अमृतवाणी : एक धूवा मारे तेनो तोर बराबर आय

असकरन दास जोगी
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कका के बिहाव : सार-छंद

कका बता कब करबे शादी, देख जवानी जाथे !
बइठे रोथे दादी दादा, संसो घानी खाथे !!1!!

ढ़ींचिक-ढ़ींचिक नाचत जाबो, बनके तोर बराती !
पागा-पगड़ी माथ बँधाये, देखे राह घराती !!2!!

गँड़वा-डीजे जेन लगाले, नागिन पार बजाबो !
बुड़हा-बुड़ही रंग जमाही, सबला खींच नचाबो !!3!!

दाई कइही जी देरानी, घर अँगना के रानी!
आव-भाव मा देवी रइही, देही सबला पानी !!4!!

रोजगार के करले जोखा, करथच रोज बहाना !
गाँव गली मा सुनथे बाबू, देथैं कतको ताना !!5!!

नवा-नवा तो कपड़ा लाबे, बनबे बढ़िया राजा !
इसनो अबरख साज लगाबे, दिखबे सुघ्घर ताजा !!6!!

काकी पाबो भाग जगाबो, मया दया तो देही !
पइधे रइबो हमतो रोजे, चूमा-चटका लेही !!7!!

अटकन-चटकन वो खेलाही, हार-जीत के खेला !
ठोंस सजा हे चीपो-लादो, पाही रोज झमेला !!8!!

केंउ मेंउ के पारी आही, हमतो कान बचाबो !
काकी लमरत दौंड़ लगाही, ओला तेज भगाबो !!9!!

पत्तो कइही आरा-पारा, तोरे सोर उड़ाही !
कइबे तँयहर चटनी पीसे, बोलत साठ गुड़ाही !!10!!

गाहीं बढ़िया गीत भड़ौनी, सुनबो कान दबाके!
खाबो पींयर भात अघाके, लाडू खास चबाके !!11!!

देख कका तँय करले शादी, देख-ताक के आजा !
जाबो आँसो हमन बराती, लान लगाबो बाजा !!12!!

असकरन दास जोगी
ग्राम : डोंड़की, पोस्ट+तह : बिल्हा,
जिला : बिलासपुर (छ. ग.)
मो. नं. : 9340031332
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कहानी : डाक्टर बिलवा महराज के बेटा पीच दारू

आज गाँव म स्वक्षता अभियान बर रैली निकले हे,मेडम-गुरु जी मन आगू-पाछु रेंगत हे ! स्कूल के जतका लइका हें सब लाईन लगाय ओरी-ओर रेंगत हवैं अउ नारा लगात हें ! स्वक्षता लाना हे.. गाँव बचाना हे, बोलव दीदी बोलव भईया हर-हर…शौंचालय बनवाबो घर-घर नारा ल चिल्लावत रैली ह जावत हे ! भक्कल अपन दुकान म बइठे-बइठे देखत हे संग म ओकर गोसइन चुनिया घलो हे भक्कल चुनिया ल कइथे ए गाँव के कुछ नइ हो सकै, चुनिया कइथे सहीं काहत हवच ! भक्कल खुर्सी ले उठथे दुकान के कोंट्टा म परे कचरा पेटी-टीपा ल उठाथे अउ हमला का करे ल हे जेकर शासन तेकर भाषन कहत टीपा के कचरा ल दुकान के आगू के डीपरा म फेंक देथे ! ओही मेरा गाँव के संड़हवा अउ गाय मन बइठे रइथे भक्कल ल कचरा फेंकत देख के गरुआ मन आके कुछु खाय के फेंके होही कइके छुछनथें कुछु नइ मिलै त कागज-पाथर अउ झिल्ली ल चगुलाय ल धर लेथें! भक्कल हर्रे कहत दुकान डाहर आके अपन गोसइन चुनिया ल कइथे सुन तो आज बिलासपुर जाहवं दुकान ल सम्हालबे ! चुनिया कइथे ठीक हवै जी! अब भक्कल ओ मेर ल चल देथे, थोकन बाद नहा-खोर के भक्कल दुकान म ओलिहाथे अउ आगरबत्ती ल जलाथे दुकान के दरवाजा के तीर कोंट्टा म एक झन बड़े नाक वाले मनखे दाँत ल निपोरे हे अइसन फोटो भिथिया म चिपके हे ! भक्कल बड़ा भाव-भजन से ओकर आरती देखावत हे, चुनिया कइथे ये काय जीयत-जागत मनखे के फोटो ल निच्चट आगरबत्ती जलाके पूजा करथच ग ? भक्कल कइथे हत रे लेड़ही मोर नाव हे भक्कल… फेर तोर थोरको नइहे अक्कल चुनिया खखुआ के कइथे टेड़गा-टेड़गा झन गोठियाय कर जी सोज-बाय बात ल कहे कर ! भक्कल कइथे अच्छा ले त सुन बात अइसे हे ए हर आय दारू वाले बाबा जब तक एकर हे शासन तब तक हमर जइसन के चलही राशन त काबर एकर पूजा नइ करबो ! चुनिया कइथे अच्छा ले ठीक हे त, भक्कल ले अब दुकान ल सम्भालबे मैं ब्लैक म दारु लेहे के बात करे हवं लेहे बर जाना हे !
चुनिया भक्कल ल कइथे सुन तो जी आप तो जावत हव फेर कोनो उधारी माँगही त कइसे करहवं !
भक्कल दिमाग ल चाँट झन, पहिचान के मनखे रइही त दे देबे नइ रइही त झन देबे! चुनिया ले ठीक हे बने बात कहे कहूँ कोनो अनचिनहार ल उधारी दे देतेवं बाद म पुछते त खिसयाते तेकर सेती पुछे हवं! भक्कल ले बने करे कइके भात-उत खाके बिलासपुर निकल जाथे!




बारा बज गे हे दुकान म चुनिया बइठे हे पंखा चालू, डेक चलत हे पंखा के ठंढ़ा हवा संग डेक म गाना चलत हे पुरवा छुही तन तोर.. रोम-रोम घुरघुरा जाही ! अइसन आहूँ सुरता तोला…ऐंड़ी तरवा तोर तुरतुरा जाही !! चुनिया भक्कल ल सुरता करत हाँसत लजावत बइठे हे ! एतीबर चार झन टूरा दुकान के दुवार म आके खड़ा होइन ! चारो झन खुसुर-फुसुर एक-दूसर ल कइथें दुकानदारीन भारी रोमांटिक गाना सुनत हे देख के भाई हो कइके हाँसे ल धर लेथैं! अतका म चुनिया खड़ा होके कइथे दाँत ल निपोरव झन का लेना हे बतावव ! चारो टूरा चुनिया के गोठ ल सुन के सोजबाय खड़ा होके कइथैं दारू लेना हे मिल जही का ? चुनिया हव मिल जाही ! चारो टूरा म से एकझन कथे हमर सो पइसा नइहे उधारी म दे देते भौजी बाद म आके पइसा दे देहूँ! चुनिया बात तो ठीक हे फेर मैं तुमन ल चिनहत नइहवं देववं कइसे? एकझन टूरा कइथे तहूँ हद करथच भौजी मोला नइ चिनहच मैं ओ डाक्टर बिलवा महराज के बेटा तावं ओही जेन डाक्टर हे गाँव-गाँव घुम के सुजी-पानी देथे ! चुनिया अच्छा डाक्टर बिलवा महराज के बेटा आच ग ओहो मैं नइ चिनहे रहेवं ग! डाक्टर कका ह आथे ग हमरो घर लरे-परे म मलहा-पीतहा म बड़ काम आथे, ले ठीक हे दारू मिल जही, कैठन लेहव बतावव ! टूरा मन कइथे चार ठन पउवा दे देते संग म चखना बर मुंगदार, मिच्चर,गोंदली,पीये बर चार ठन डिस्पोजल अउ चार ठन पानी पाउच चुनिया निकाल के सब समान दे देथे !
चारो झन दुकान के पिछोत कोंट्टा म जाके पीथै-खाथैं अब झुमरत-झामरत जाय बर रेंगथैं! चुनिया डाक्टर बिलवा महराज के बेटा ल कइथे गुड्डू पइसा ल कब देहे बर आबे! टूरा कइथे काल आके खचीत दे देहवं आपमन चिंत्ता झन करव, चुनिया कइथे ले ठीक हे काली आके दे देबे धीरे-बाँधे घर जाहव गुड्डू ! हव काहत चारो झन चले जाथैं,दुकान म अउ दूसर ग्राहक आय ल धर लेथैं चुनिया समान देहे ल धर लेथे !




देखते देखत अब बेरा खसलिस अउ सांझ होगे भक्कल के आय के बेरा होगे रहिस! चुनिया दुकान के दुवारी म खड़े भक्कल के रस्ता जोहत हे, ओती बर भक्कल समान-सटका लादे मोटर-साईकल म दबाय गाड़ी आवत हे! चुनिया दूरिहे ल देख के खुश होगे, भक्कल दुकान मेर पहुंच के समान-सटका ल उतारे बर कहिस दोनो मिलके समान ल उतारत हें!
दुकान ले लगे चबुतरा म गांव के टुरा मन तास खेलत हें दुनो झन ल समान उतारत देख तास खेलइया मन काहत हे, ए चुनिया भौजी देख के समान ल उतारबे गिरा झन देबे नुकसान हो जाही अउ हाँसथें! चुनिया हाँसत कइथे मैं देख के उतारत हवं जी तुमन तो देख के घलो घर के बोझा ल उठा नइ सकव एमेर आके तास खेलत हव देखव घर के बोझा ल दूसर थोरे उठावत हे! भक्कल खलखला के हाँस डारथे, तास खेलइया मन के बोलती बंद हो जाथे! भक्कल कइथे का चुनिया बोली ले तीर चलाथच तभे तो मोर हिरदे ल भाथच,चुनिया तहूँ ह चल हट कइके समान ल धर के दुकान म घुसर जथे! भक्कल घलो समान अउ मोटर-साईकल ल घर म नहकाथे !
रात होगे भक्कल अउ चुनिया भात खावत टीबी देखत हें टीबी म सुपर-टेन खबर आवत हे चुनिया अउ भक्कल के कौंरा मुँह म नइ जावत हे मुँह ल फारे आँखी निटोराय टीबीच म नजर गड़े हवै :-
1.हॉस्पीटल म गैस के कमी ले लइका मन के गै जान !
2.आदिवासी जमीन अधिग्रहण करही सरकार !
3.दस नक्शली मार गिराईच पुलिस !
4.रायपुर के मंझोत म नाबालिक संग गैंग रेप !
5.छत्तीसगढ़ म पढ़ाय जाही ओड़िया भाषा !
6.सरकार बेंचिच दारू राजकोष छलके ल धरलिच !
7.बेरोजगारी बड़ बाय युवा झपावत हें अब बेंचहीं भजिया !
8.प्रदेश म बाढ़गे शिक्षित मन के प्रतिशत,शिक्षक मन के नइ होवत हे संविलियन !
9.किसान आगे अंकाल के चपेट म !
10.प्रदेश म योग्य व्यक्ति के कमी दूसर प्रदेश ल लाय जाही कर्मचारी !
चुनिया कइथे तहूँ ह ग काय कचर -पचर न्यूज ल देखथच चल तारक मेहता के उल्टा चश्मा म लगा, भक्कल कइथे भात ल तो खा चुनिया दिमाग ल झन खा ! चुनिया कइथे भातेच ल खावत हवं दिमाग ल तो तैं खावत हच दे रिमोट लगा नाटक म, भक्कल ले भइ लगा ले एले रिमोट, चुनिया न्यूज चैनल बदल के नाटक म लगा देथे !
दूनो भात खा डरथें टीबी देखत-देखत धो मांज के चुनिया अब खटिया म आथे अब बेरा रइथे दुकान के हिसाब पुछे के !
भक्कल कइथे चल चुनिया आज कतेक झन ल बेंचे कतेक के समान बेंचाईच बता? चुनिया आज जतका समान बेंचाईच ततका के हिसाब देइस, अउ उधारी कोन-कोन लीन तेकर हिसाब देइस ! चुनिया बोलथे एकझन अउ उधारी लिस हवै, भक्कल कहिस कोने? चुनिया कहिस डाक्टर बिलवा महराज के बेटा ह चार ठन पउवा संग म अउ आने समान मिलाके दू सौ अस्सी रुपिया के समान बिसाईच हे संग म ओकर तीन झन संगी रहिस !




भक्कल कइथे चुनिया डाक्टर बिलवा महराज के बेटा ल चिन्हे हच ओ, चुनिया हव ग चिन्हे हवं काल आके पइसा दे देहूँ कहिस हे ! भक्कल ले ठीक हे त भइ चल सो जा आराम कर अइसन कहत दूनों सो जाथैं!
बिहनहा होगे चुनिया अउ भक्कल उठथैं चुनिया घर के रोज के काम बुता ल करे ल धर लेथे अउ भक्कल दुकान म बइठे! आज बात कहत बेरा खसल गे संझा जुहर भक्कल चुनिया ल बलाके कइथे चुनिया डाक्टर बिलवा महराज के बेटा तो नइ आइस वो… चुनिया ले न आज नइ आइस त काल आ जाही कहां जाही नइ आही त डाक्टर सो ले लेबो, भक्कल ले बने कहत हवच!
अब अइसे-तइसे ओकर रस्ता देखत चार-पाँच दिन बितगे!
भक्कल चुनिया ल फेर कइथे मैं तोला बरजे रहेवं अनचिनहार ल उधार झन देबे कइके तैं नइ माने, उधारी ले के जुहर मनखे गरुवा बरोबर मुड़ी नवा के मांग के ले जाथैं अउ पइसा दे के बात आथे त भगवान बन जाथैं कहाँ गायब होथैं पता नइ चलै ! चुनिया ले न जी दे देही बिलवा महराज के बेटा ताय, भक्कल का दे देही चार-पाँच दिन होगे दे बर नइ आय हे अउ ए झोला-छाप डाक्टर घलो ह गवँई बुले नइ आय हे ! चुनिया ले त आज तैं ओकर गाँव जा पइसा माँग के ले आबे,भक्कल अब अइसने तो करे ल परही जा तो पंछा ल लान जाहवं! चुनिया पंछा ल लान के देथे भक्कल डाक्टर बिलवा महराज के गाँव जाय बर मोटर-साईकल म निकल जाथे!
भक्कल गाँव म पहुँचथे रस्ता म लुटवा ल भेंट डरथे लुटवा ल कइथे लुटवा भाई बिलवा महराज डाक्टर के घर कोन मेर हे, वो ह बताथे अभी महराज ह घर म नइ होही चउँक म जा पंचइत चलत हे तेन मेरा होही ! भक्कल अच्छा का के पंचइत चलत हे ग? लुटवा अरे का बताबे ग ए गाँव म अंध्धेर होगे हे परिया भुँईया ल झेंके हें बेजा कब्जा अउ बाँटे बर दू झन के बीच म झगरा चलत हे तेकर नियाव करे बर पंचइत जुरे हे!
अच्छा ले ठीक हे! लुटवा ह पुछथे तैं काबर आय हवच ग बिलवा महराज सो? भक्कल ले छोड़ न ग,लुटवा मोर करा पुछ लिए अउ तैं नइ बतावत हच गजब हस! भक्कल का बतावं ग मैं ह चार पांच दिन पहिली बिलासपुर गे रहेवं अउ मोर गोसइन ह बिलवा महराज के बेटा ल उधारी म दारू दे दिस अउ वो ह पइसा दे बर आयेच नइहे! लुटवा का बात करथच भक्कल बिलवा महराज के बेटा मन दारू नइ पियैं ग, भक्कल अरे भाई पीसे ग ओकरे सेतिर आय हवँ! लुटवा ले ठीक हे जा, भक्कल ओकर घर म ही जाथवं अगोरहवं पंचइत मेर का जाहवं ग अइसे कइके चल देथे! लुटवा मेर ल होवत बात ह पुरा गाँव अउ पंचइत तक पहुंच गे डाक्टर बिलवा महराज के बेटा पीच दारू कोनो भरोसेच नइ करत राहैं! कोन कहिस त पड़ोस के गाँव ले दारू बेंचइया भक्कल आय हे वोही ह बताइस हे अउ डाक्टर के घर म गइस हे!
अतका गोठ ल सुनके डाक्टर बिलवा महराज पंचइत के बेजा कब्जा वाले नियाव ल छोड़ के अपन घर कती गइस, ओकर संग म पंचइत के जम्मे मनखे गइन!
भक्कल गली के चौंरा म बइठे राहै बिलवा महराज के गोसइन सो गोठियात राहै ! एती बिलवा महराज पहुंच घलिस, भक्कल कइथे जोहार महराज बिलवा महराज जय जोहार ग फेर मोला अउ मोर लइका ल पुरा गाँव म निमस करवाथच तैं! भक्कल का बतावं महराज चार-पाँच दिन ले उपर होगे आपमन के बेटा उधारी म दारु पीके आय हे अउ पइसा दे बर गे नइहे! बिलवा महराज मोर बेटा मन दारू पीबे नइ करैं तैं कइसे काहत हवच मोर समझ ले बाहिर हे, बिलवा महराज संग पुरा गाँव वाले मन कहे ल धर लेथे महराज सहीं काहत हे कइके!




भक्कल कइथे अपन बेटा ल बलाके पुछ ले ग ! बिलवा महराज कइथे का नाव बताये हे, भक्कल नाव तो नइ जानव ग फेर डाक्टर बिलवा महराज के बेटा आवं कहे हे! बिलवा महराज गुस्सा जाथे, गाँव भर के मन चकित हो जाथें ! बिलवा महराज अपन गोसईन ल कइथे बलातो वो टूरा मन ल, महराजिन घर के भीतर जाके डलवा, ठेंगू आतो रे तुंहर ददा बलावत हे! दूनो झन निकलथैं का होगे दाई?, महराजिन का होगे दाई कइथव अाज कल दारू पिये ल धर ले हव चलव गली म बुलावत हे तुंहर ददा ह कइके चेथियावत गली डाहर निकालत हे! अतका म डलवा अउ ठेंगू सुकुडदूम, सकपकागैं,सोंचत हें हमन तो अइसन कुछु करे नइहन होवत का हे? महराजिन, डलवा, ठेंगू बाहिर आगे का होगे बाबू कइथैं? बिलवा महराज का होगे कइथव कइसे भक्कल के दुकान ल दारू पीके आय हव!
डलवा, ठेंगू सकपकाय! दाई किरिया बाबू हमन नइ पीये हन! भक्कल काबर लबारी मारथव ग बता देवव न! डलवा, ठेंगू हमन पीबेच नइ करन त काबर लबारी मारबो, बिलवा महराज डलवा अउ ठेंगू ल थपरियाय बर करथे त डलवा अउ ठेंगू गाल ल छपकत कइथे झन मार बाबू गुटखा भले खाथन दारू नइ पीयन ग! महराज के माथा चढ़गे गुटखा घलो खाथव चटा-चट देथे, गाँव के मन हाँस डारथैं !डलवा, ठेंगू कइथे दाई किरिया बाबू हमन दारू नई पीये हन ग!
बिलवा महराज कइथे अब बता भक्कल एमन तो पीयेच नइहन काहत हें ! गाँव के भींड़ म खुसुर-फुसुर चलत हे सरपंच साहब तको खड़े हे पाछु ल एकझन ह सरपंच ल धीरलगहा काहत हे साहब मोर पेंशन ह पाँच महिना होगे नइ मिले हे देवा देते,सरपंच चुपव न ग बाद म बात करबो ! फेर एकझन पाछु ले धीरलगहा काहत हे कान मेर सरपंच साहब आवास ल पास करे बर दस हजार ले हवच ग एकात किस्त तो पास करवा दे, सरपंच चुप तो रइ यार इहां बिलवा महराज के बेटा मन दारू पीये हें कइके आरोप लगे हे ये समस्या ल तोर समस्या बड़े हे का तोर काम हो जही भगवान ले बाद म अकेल्ला म बात करबो! पेंशन अउ आवास के समस्या वाले मन चुप हो जाथें!
एती भक्कल कइथे महराज आपेच के बेटा पीके आय हे ग मोर पइसा देवा नहीते दे ! बिलवा महराज मोर लइका मन तो दारू नइ पीये हन काहत हे तैं अइसे कर अपन गोसइन ल लान वो ह काला दारू दे हे चिनही अउ असली फुराजमोंगी ल करही! महराज के बात ल सुन के सरपंच अउ सब गाँव वाले मन तको कहे ल धर लेथैं हव भक्कल भाई तैं अपन गोसईन ल लानबे तभे अब फुराजमोंगी हो पाही ! भक्कल सब ल निवेदन करथे इहीच मेरे रइहव मैं जाहवं अउ आहवं कइके अपन मोटर-साईकल ल धरथे अउ जाथे, सब कइथैं इही मेरे रइबो!
भक्कल के आवत ले एती भींड़ म बात चलत हे लइका मन तो गुटखा भले खाथन दारू नइ पीयन काहत हे ये भक्कल जबरन बदनाम करत हे अइसन गोठ चलत! सरपंच खड़े-खड़े बिलवा महराज ल धीर धरावत हे ले न आवन दे फुराजमोंगी हो जही कहत हे! भींड़ ले एक झन मनखे धीरे-धीरे कगरियावत सरपंच डाहर जावत हे सरपंच के तीर म आके कइथे सरपंच साहब मोर डौकी-लइका सबके नाव राशन कार्ड म हे ग का बात ए ते मोर नाव नइ जुड़े हे जोड़वा देते मालिक ! सरपंच तुमन यार हद कर देव सच म इहां बेजा कब्जा के जमीन के नियाव होय नइहे अभी ए दे बिलवा महराज के बेटा मन ऊपर दारू पीये के आरोप लग गे, अउ तुमन नान-नान बात ल अभी करथव बाद म करहव न ले घर म आहव फेर ओहू चुप हो जाथे!
देखते देखत एती भक्कल अपन गोसईन चुनिया ल धर के आगे !
गाड़ी ले उतरथें भक्कल, बिलवा महराज, सरपंच अउ सब कइथें ले चीन चुनिया काला दारू दे रहे उधारी म! डलवा अउ ठेंगू ल आगु म बलाथे, चुनिया देखथे अउ कइथे एमन ल तो दारू नइ देहवं! बिलवा महराज, महराजिन, सरपंच, गाँव वाले सब खुश हो जाथें! भक्कल कउवा जाथे, चुनिया ल कइथे एमन ल नइ देहच त काला देहच? सब पुछथैं काला देहच? चुनिया कइथे मैं तो दारू बिलवा महराज के बेटेच ल देहवं अउ ले के जुहर ओही ह कहिस हे मैं डाक्टर बिलवा महराज के बेटा आवं कइके ! ए ह नोहै, महराज के अउ बेटा होही तेला बलावव !




सब हसथें अउ कइथें चुनिया महराज के दूझन बेटा हे तीसर नइहे! महराज कइथे भक्कल ले भाई फुराजमोंगी होगे दूध पानी सफा सफा ले अब तैं जा! भक्कल महराज फेर चुनिया काला दारू देइस समझ नइ आवत हे, भक्कल गुस्सा जाथे गुस्सा म सबके बीच म चुनिया ल काला उधारी देहच कइके भीठ म बद-बद मार देथे! सब छोड़ाथैं अउ ले जावव कइथैं! भक्कल गाड़ी ल चालू करथे चल बइठ तोला घर म अउ बताहूँ कइथे, चुनिया रोवत मोटर-साईकल म बइठत रइथे ! अचानक चुनिया के नजर एकझन ऊपर परथे आगू डाहर ले एकझन मनखे आवत हे साईकल म बोरी लादे हे गाना गावत आवत हे ! चुनिया भक्कल ल कइथे देख तो जी देख तो दोही हर आय बिलवा महराज के बेटा आवं कइके दारू पीच हे, आप पकड़व ओला ! भक्कल गाड़ी बंद करके खड़ा करके दउँड़थे पकड़े बर, गाँव के मन सब देखथें कइथे अरे ए तो लेढ़वा हरे! भक्कल लेढ़वा ल सायकल सुध्धा बिलवा महराज के दुवारी म लाथे, भक्कल कइथे कइसे बिलवा महराज के बेटा आवं कइके दारु पीये हच पइसा कइसे नइ देहच? लेढ़वा चुप हे! चुनिया तैं तो मिलगेच तोर कारन हम मार गारी खावत हन, महराज बपुरा के घर म आके इहां पंचइत जोरत हन चल पइसा दे ! बिलवा महराज कइथे कइसे बे लेढ़वा तैं मोरे बेटा आच बे मोर नाव ले के दारू पीथच अउ मोर बेटा मन ल अउ मोला बदनाम करथच! अतका म लेढ़वा सकपकाय हुंकत हे न भूंकत हे मुड़ी ल गड़ियाय चुप खड़े हे! चार पाँच झन मिलके लेढ़वा ल दमादम मार देथें, एक दूझन मन काहते हें महराजिन एग्रीमेंट कराले बाढ़े-पोढ़े नवा बेटा पागे हवस सेवा करही! महराजिन कइथे अइसना बेटा नइ चाही! सरपंच कइथे कइसे बे लेढ़वा भक्कल के पइसा देबे धुन नही बता? लेढ़वा डरे डर म देहवं सरपंच साहब, सरपंच साईकल अउ समान ल छोड़ के जा एकर पइसा ल लेके आ! लेढ़वा अपन घर दउँडत जाके पइसा ले के आके भक्कल अउ चुनिया ल पइसा देथे! अब भक्कल अउ चुनिया डाक्टर बिलवा महराज सो क्षमा माँगथे, महराज कइथे लेवव जावव! ए बात के फुराजमोंगी होगे भक्कल चुनिया हाँसत बाईक म बइठ के घर चल दिन! लेढ़वा ल सब गारी देवत घर जात हें सरपंच अँइठत रेंग दीच, बेजा कब्जा के जमीन बर नियाव अटक गे, महराज-महराजिन अपन बेटा ल धरके घर म घुसर गें! भींड़ के संग म अवास पास करे बर दस हजार दे हे तेन, जेला पेंशन नइ मिले हे तेन अउ जेकर नाव राशन कार्ड म नइ जुड़े हे तेनो मुड़ी ल नवाय नवाय घर डाहर जावत हें..

असकरन दास जोगी
ग्राम : डोंड़की, पोस्ट+तह: बिल्हा, जिला:बिलासपुर (छ.ग.)
मो.नं. : 9340031332
www.antaskegoth.blogspot.com
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छत्तीसगढ़िया मन कहां हें ?




छत्तीसगढ़ राज सोनहा भुईयां हिरा बरोबर चमकत हे ! मयारू मैना के बासई ह मन ल हर लेथे , देखते-देखत म गोंदा, मोंगरा अऊ दौना के रंग अऊ महकई हर अंगना-दुआर ल पबरित कर देथे ! गांव-गांव गली-गली म लोक कला के घुंघरू,मांदर अईसे बाजथे के हिरदे ल हुंक्कार के मुह म गीत के राजा ददरिया सऊंहात आ जाथे तिहां छत्तीसगढ़ के मया-मरम , सुख-दुख के कहानी ल एकक ठन पढ़-पढ़ के ओरिया देथे !

आज छत्तीसगढ़ ल अलग राज बने 16 बछर होगे हे 17 बछर होवईया हे ! बिकास के लहर छत्तीसगढ़ के कोंटा-कोंटा म चलत हे फेर कईसन बिकास कोनो ल समझ नई आत हे ! नवा-नवा सड़क, बिल्डिंग,गार्डन, पर्यटन के बिकास , बैपार के बिकास , रोजगार के बिकास, सिक्छा म बिकास, चिकित्सा म बिकास , फिलिम जगत, गीद-गोबिंद , नाचा-पेखन सगरी उदिम ह बाढ़त हे अऊ जुन्ना छत्तीसगढ़ ह नवा-नेवरिया छत्तीसगढ़ बनत हे ! जुन्ना छत्तीसगढ़ ल सिरजाय अऊ पाय बर हमर जम्में पुरखा मन अपन जिनगी अरपन कर दिन ! हमर पुरखा मन के करम के परताप आय के आज छत्तीसगढ़ राज सिरजीस फेर ओमन जेन सपना देखे रहिन का ओ सपना आज पुरा होवत हे ? हमला तो चिटकून घलो नई लागत हे ! जुन्ना छत्तीसगढ़ ल आज राजनिति अजगर ह अईंठत हे गुरमेट के अऊ हमर भासा, संसकिरिति, धरती, बैपार, सिक्छा , रोजगार ये सब ल एकक कर के लिले परत हावय, आज फेर जरूरत हे ओ पुरखा मनके हमला !

देखव ग छत्तीसगढ़िया मन बने टकटक ले निहार के तुमन जात अऊ धरम म बंट-बंट के एक दूसर ल छोटे बड़े बताके जुझत राहव ” तुंहर गरभ तुंहला खाय कोरे-कोर छत्तीसगढ़ लुटाय ” छत्तीसगढ़ के नस-नस ल सोकटा करत हें अब तो जागव ग , अब नही त कब जागहव ? लागथे छत्तीसगढ़ महतारी ह चिहूर पारके रोही तब जागहव ?
छत्तीसगढ़ के बिकास होवत हे ये बात तव समझ म आत हे फेर छत्तीसगढ़िया के बिकास नई होवत हे ये अचरूज बात लागत होही ! भाई हो गुनव, देखव, परखव तब तो समझ आही ग ?
चलव छत्तीसगढ़िया भाई मन करा गुने बर पद राख देथन तब जरूर गुनहीं ,परखहीं अऊ जुरीयाय के उदिम करहीं :-

१ कतका झन छत्तीसगढ़िया मन करा गैस ऐजेन्सी हावय ?
२ कतका झन छत्तीसगढ़िया मन सो पेट्रोल,डिजल के ठेंका हे ?
३ छत्तीसगढ़िया मन करा कार,बाईक सोरूम हवय का ग ?
४ छत्तीसगढ़िया मन करा राईस मिल हावय धुन नही ?
५ कतका झन छत्तीसगढ़िया मन के बड़े-बड़े मॉल म आफिस-दुकान हावय ?
६ बड़े-बड़े बिल्डिंग, नवा-नवा सड़क ये सब ल बनाय बर कतका झन छत्तीसगढ़िया मन ठेंका लेथव अऊ बड़े बिल्डर कै झन छत्तीसगढ़िया हवव ?
७ कोनो छत्तीसगढ़िया कपड़ा के थोक बिकरेता हें का ?
८ बड़े-बड़े कतको इसकूल, कालेज, बिस्वबिदयालय हावय इंकर मन के मालिक छत्तीसगढ़िया मन हें का ?
९ छत्तीसगढ़िया मन करा फाईव स्टार होटल हावय धुन नही ?
१० राजनिति म छत्तीसगढ़िया मन के कतका चलथे, धुन हर बात ल अपन पार्टी के मानथैं भले छत्तीसगढ़ के बुरा होवय चाही भला ?
११ छत्तीसगढ़ म हिंदी फिलिम के हिरो-हिरवईन,गायक-गायिका मन ल मुंहमांगे पईसा देके नेवततथैं अऊ इहां के कलाकार मन ल कतका मिलथे ?
१२ ऑऊट सोर्सिंग नाव के बेमारी ल तो सुनेच होहू ?
१३ छत्तीसगढ़िया मन करा बड़े-बड़े हसपिटल हावय का ?
१४ छत्तीसगढ़िया भाई हो तुंहर करा बड़े-बड़े कारखाना हावय का जी ?
१५ कतका झन छत्तीसगढ़िया मन कलेक्टर, कमिसनर जईसन आला अधिकारी के पद म हें ?
१६ छत्तीसगढ़िया मन सो छापाखाना अऊ बड़का अखबार , टीबी चैनल हवय का जेकर ले अपन दुख-पिरा,मांग, अपन कला ये सब ल छाप सकव देखा सकव बिना काट-छांट रोक टोक के ?
१७ सोना,चांदी,हिरा के बैपारी छत्तीसगढ़िया मन होहू ग ?




कतका ल ओरियावंवं ग इहां सड़क म रेंगबे त सड़क के तीर तखार म बिहारी मन के ठेला दिखथे , बजार हाट जाबे त सिंधी, बनिया,मरवाड़ी,पंजाबी मन के सोरूम, दुकान दिखथे ! जगा-जगा आफिस,भवन म जाबे त उत्तर परदेस अऊ बिहार के गार्ड दिखथैं ! छत्तीसगढ़ म कोंटा-कोंटा म राजिस्थान अऊ हरियाणा के मनखे मन जमीन ल लीज म लेके साग-भाजी, फल-फलहरी के खेती करत हें बड़ फायदा उठात हावयं अऊ हमर किसान मन खेती ल बेंचे परत हें ! बाहर के मनखे मन दारू के ठेंका चलाके इहां के मनखे ल नसेढ़िया बनात हें , हमर छत्तीसगढ़ के कतको देबी-देवता के मंदिर टुटत फुटत हे अऊ बाहिर राज ल आके मनखे मन इहां मंदिर बनात हें हमर मंदिर टुटथे त कोनो चिंव-चावं नई करयं ,बाहिर वाले मन के बनाय मंदिर टुटे ल करथे त आंदोलन होय ल धर लेथे ! छत्तीसगढ़ के महापुरूष मन ल बदनाम करथैं कोनो चिंव नई करयं मन म सोंचथैं जेकर जात के महापुरूष तेने जानय हमला का फेर ये नई गुनयं आज ओकर उपर आय हे काल हमरो उपर आही , कोनो सरकारी आफिस, पराईबेट आफिस जाबे त छत्तीसगढ़ी के नाव लेवईया नईहे छत्तीसगढ़ी म गोठिया देबे त तोरे उपर हास देहीं अईसन हमर हाल हे ! भूमि अधिग्रहन जईसन बिमारी बिकास के नाव म नेवतत हें जेकर ले छत्तीसगढ़िया किसान के जमीन ल अधिग्रहित करके बाहर के बैपारी ल कारखाना , कम्पनी बनाय बर जमीन देहीं ओ कम्पनी म बाहर के मनखे मन ल काम-बुता म भरहीं हमर मन के घर,खेत,खार सब चले जाही अऊ छत्तीसगढ़िया मन धारे-धार बोहाहीं इंकर कोनो थिरबाहं नईहे !

छत्तीसगढ़िया,छत्तीसगढ़ी अऊ छत्तीसगढ़ के बिकास अईसने होही कईके हमर पुरखा मन देखे रहिन का ? सब जगा बाहिर ले आय मनखे मन रपोट के बईठ गे हावयं अब पुछत हवं बता दव ग….छत्तीसगढ़िया मन कहां हें ? …

असकरन दास जोगी
गांव : डोंड़की ( बिल्हा, बिलासपुर )
मो.नं. 9770591174



नवा बछर के आवभगत


अघ्घन अउ पूस के पाख चलत हे जेला सरमेट के अंगरेजी कलेंडर म दिसम्बर महिना कहे जाथे ! जब तक सुरुज निटोरही नही सहर भर जाड़ बरसत रइथे ! जाड़ के मारे ए मेर ल ओ मेर के मनखे मन सब गरम ओढ़ना मं दिखथैं !

गाड़ी-मोटर मन रात-बिकाल अउ बिहनहे के झुलझुलहा होत ले सरपट-सरपट दउँड़त रइथे ! गाड़ी मोटर तो बड़ बाय होगे हे हारन ल अतका बजाथें के कान के परदा घलो हर फुट जाही सड़क तीर के मन कइसे बसर करथें ओही मन जानहीं ! हमर छत्तीसगढ़ बर अघ्घन अउ पूस पाख ह बहुंते पावन होथे पूस पाख ह छत्तीसगढ़ म नव जन जागरिति के संदेस लेके आथे अघ्घन पाख के पहिलिच तारिख मं विस्व एड्स दिवस परथे जेमा कतको संगठन मन कार्यकरम कर कर के लोगन मन ल एड्स के जानकारी देथें ! उहिंचे हमर छत्तीसगढ़ सासन के डाहर ले विग्यापन,नाटक,पर्चा,गीत कईठन उदिम करके लोगन मन तक एड्स ले बांचे के सावचेत रहे के अउ दुखिया लंग कईसन बैवहार करना चाही एकर प्रति जागरुक होय के संदेस देथैं ! एड्स दिवस के बाद अघ्घन ५ सुक्ल के तुरते अघ्घन ४ दिसम्बर के जल सेना दिवस पड़िच ! जल सेना दिवस ल सासन बिभागी रुप म बने मनईस ,जल सेना के जानकारी पेपर अउ टीबी मन म देखाईस ! अब बात काहत अघ्घन ७ लग गे जेला अंगरेजी कलेंडर ६ दिसम्बर कइथे ! ६ दिसम्बर के वों परब आय जेन दिन आधुनिक भारत के पिता अउ हमर देस के संविधान सिल्पि बोधिसत्व बाबा साहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर जी के स्मृतिदिवस महापरिनिरबान होय रहिस अउ मानवता के महामानव ल छत्तीसगढ़ सासन के संगे संग छत्तीसगढ़िया जनता मन श्रध्दांजलि अरपित करके सुरता करिन !

महामानव के सुरता म दिन अइसे बितिच के गम नई लागिस के कब १० दिसम्बर आ गईस ! आज के दिन ल विस्व भर म मानवता के हक अधिकार के रुप म मनाय जाथे जेला हमन सब मानव अधिकार दिवस के नाव ले जानथन ! १० दिसम्बर ल यूनेस्को हर दुनिया भर के मनखे के हक अधिकार के दिन के रुप म घोसित करे हे जेला जम्में देस म मनाथैं !

अघ्घन १३ दिसम्बर १२ के ईदमिलादुन्नवी के तिहार मुसलिम भाई मन जोर सोर से मनाईन ! पुरा छत्तीसगढ़ एक दूसर ल ईद के बधाई लेईन अउ देईन !

पूस के कुड़कुड़ावत जाड़ हर सच म पावन पाख हे जेमा हमन ल अपन धरम,सुरक्छा,अधिकार के प्रति जागरुक होय के संदेस मिलथे ! ये धार ह अइसने नइ टूटै मिलकी मारत साठ पूस १ के १४ दिसम्बर के दिन उर्जा संरक्छन दिवस के रुप म जबर संदेस लेके आगे जोन हमला हमर भभिस के रक्छा करे के संदेस देथे ! उर्जा बचत करके भभिस ल घलो अंजोर राखे के गियान बांटिच ! आज के लकर लउहा जिनगी म बिजली के बड़ महात्तम हे बिजली बिना सरी दुनिया अंधियार हो जाथे , त हमला ये बचत करना बहुंते जरुरी हे !

देखते देखत पूस दिसम्बर के ओ दिन आगे जेन हमर छत्तीसगढ़ के राजकीय तिहार आय ये तिहार म सत,अहिंसा,छिमा, दया,करुना,परेम, परहित , मनखे ल मनखे लंग कोनो भेद नइ करे के, नारी ल सम्मान करे के, पसु उपर अत्याचार नइ करे के, संसार म मानवता बगराय के , समाजिक जागरिति के संगे संग अध्यात्म अउ धरम के जागरिति संदेस देथे ! पूस ५ के ये परब ल गुरुपरब के रुप म सिरोमनी गुरु घाँसीदास बाबा जी के जयंती १८ दिसम्बर के कारन मनाय जाथे जेमा सतगुरु जी के संदेस म जम्मे छत्तीसगढ़ झुमर झुमर के पंथी नाचथे अउ लहरत धौंरा पालो कस छत्तीसगढ़ के घट-घट ह पबरित हो जाथे ! येकर थोकिन दिन के बाद २४ दिसम्बर ल सरकार ह गिराहिक दिन घोसित करे हे जेमा गिराहिक मन के लाभ हानि के जानकारी दे जाथे अउ उपभोगता ल सजग होय के बात जगा जगा सुने ल मिलथे ! चार पाहर रात बितिच दूसर दिन २५ दिसम्बर के क्रिसमस डे आईस क्रिसमस हर पुरा संसार म बहुंते देस म मनाय जाथे , जेला छत्तीसगढ़ म हमर क्रिसचन भाई बहिनी मन धूम धाम ले मनाईन पुरा छत्तीसगढ़ क्रिसमस मनाय के बाद नवा बछर के आवभगत म लग गे ! नवा नवा कपड़ा लत्ता , बिसाइ चालू होइस, मिठाई,फटाखा, छप्पन भोग , कतको अपन परवार सहिंत कोनो चिड़िया घर घुमें जाय के तैयारी म लगे हें त कोनो , कोनो जगा के नदिया, मंदिर,धाम यातरा सबे जगा घुमें के तइयारी में लगे हें ! कतको जगा नाचा गम्मत के तइयारी हे त कोनो जगा कवि सम्मेलन के पुरा व्यवस्था चलत हे ! पूस १२ सुक्ल/रोहनी के ६ दिन बाद लकर धकर नवा बिहान लेके पूस सुक्ल ३ सरवन के नवा बछर लग गे आज पुरा संसार के संगे संग हमर भारत देस अउ हमर छत्तीसगढ़ घलो नवा बछर के आवभत म लगे हे सबला नवा बछर के बधाई देवत हें ! नवा बछर के बधाई अखबार, टीबी, सोसल मिड्या मन म सब एक दूसर ल देवत हें अउ लेवत हें !

नवा बछर के इतिहाल ल थोकिन आवव झांक लन …

बुड़ती(पश्चिमी) नवा साल के तिहार ४००० बछर पहिली बेबीलोन में मनात रहिन ! फेर वो बेरा म नवा बछर के तिहार ल २१ मार्च के मनात रहिन , जेन हर बसंत रितु के आगमन के दिन घलो आय !
निच्चट तइहा रोम के तानासाह जूलियस सीजर ह ईसा पहिली ४५ वे बछर मं जब जूलियन कलैंडर चालू करिस वो बखत दुनिया म पहिली बार १ जनवरी के नवा साल के तिहार मनाईन ! अईसन करे बर जूलियस सीजर ह पाछू बछर यानि ईसा पहिली ४६ इस्वी ल ४४५ दिन म बांट दिस !
हिब्रू नवा बछर :- हिब्रू मान्यता के अनुसार बिधाता हर दुनिया ल सात दिन म बनाईस ! इही सात दिन के गढ़े के बाद नवा बछर मनाय जाथे ! ये दिन ग्रेगरी के कलैंडर के अनुसार ५ सितम्बर ले ५ अक्टूबर के बीच आथे !
चीनी नवा बछर:- चीनी नवा बछर चीनी कलेंडर के अनुसार पहिली पाख के पहिली चंदा के दिन नवा बछर के रुप म मनाथैं ! ये हर अकसर २१ जनवरी ले २१ फरवरी के बीच परथे !

इसलामी नवा बछर :- इसलामी कलेंडर के नवा बछर मुहर्रम के दिन मनाय जाथे ! इसलामी कलेंडर पुरा पुरा चंदा के उपर अधारित होथे ! जेकर कारन एकर बारा महिना के चक्र ३३ बछर मं सुरुज कलेंडर ल एक बार घूम डारथे ! जेकर कारन नवा बछर चलागित ग्रेगरी कलेंडर म अाने-आने पाख म परथे !
भारतीय नवा बछर :- भारत अईसन देस हे जिहां अलग अलग बाखा बोली के अउ अलग अलग धरम मान्यता ल मानने वाला रईथें जे पाय के सबे सभियता वाले मन अपन अपन अनुसार से नवा बछर के खुसी मनाथैं ! भारत म अधिकतर नवा बछर के दिन ह मार्च अउ अप्रेल माने फागुन अउ चईत के दिन होथे ! हिंदू नवा बछर चईत नव रात्रि के पहिली दिन मनाय जाथे !

पंजाब म नवा बछर बइसाखी नाम ले १३ अप्रेल के मनाथैं ,सिख नानकसाही कलेंडर के अनुसार!
१४ मार्च होला तिहार होथे इही दिन के तिर तखार म बंगाली अउ तमिल नवा बछर घलो होथे ! तेलगु नवा बछर मार्च अप्रेल के बीच म आथे , आंध्रप्रदेस म एला उगादी कइथैं , एहर चईत पाख के पहिलिच दिन म मनाय जाथे ! तमिल म पोंगल १५ जनवरी के नवा बछर के रुप मं घलो मनाथैं !

कसमिरी कलेंडर वगेरह १९ मार्च के होथे ! महारास्ट्र म गुड़ी पड़वा के रुप म मार्च अप्रैल के महिना म मनाय जाथे ! कन्नड नवा बछर उगादी कर्नाटक के मन चइत पाख के पहिलीच दिन मनाथैं ! सिंधी नवा बछर चेडरी चंड उगादी अउ गुड़ी पड़वा एके दिन मनाय जाथे ! मदुरै म चईत पाख मं चित्रैय तिरुविजा नवा बछर के रुप म खुशी मनाथैं ! मारवाड़ी मन नवा बछर देवारी के दिन , गुजराती मन देवारी के दूसर दिन, जेन अक्टूबर या फेर नवम्बर मं आथे ! बंगाली नवा बछर पोहेला बइसाखी १४ या १५ अप्रेल के मनाथैं ! बुड़ती(पश्चिम) बंगाल अउ बांग्लादेस मं इही दिन मनाय जाथे ! सबे डहर नवा बछर के खुसी तिहार के रुप म अलग अलग बेरा म अलग अलग ढ़ंग ले मनाय जाथे ! फेर नवा बछर के आवभगत करे बर सब पहिली ले तईयार रइथैं !

आप सब ल हमर डाहर ले नवा बछर के गाड़ा-गाड़ा बधाई …

असकरन दास जोगी
ग्राम-डोंड़की,बिल्हा
मो. 9770591174