धूवा मारे : विष्णुपद छंद

(भ्रूण हत्या)

धूवा मारे काबर पापी,पाबे का मन के !
बेटा मिलही ता का करबे,चलबे का तनके !!1!!

बेटी-बेटा मा भेद करे,लाज कहाँ लगही !
नाक-कान तो बेंचे बइठे,कोन भला ठगही !!2!!

नारी-नारी बर जी जलथे,मोर इही कहना !
ममता देहव तबतो दाई,सुघर संग रहना !!3!!

धूवा सँचरे लालच ठाने,मशीन मा दिखथे !
चेक कराके फाँदा डारे,पापी मन हिलथे !!4!!

डॉक्टर बनथे संगी तुँहरे,लोभ फूल खिलथे !
नियत-धरम के सौदा करथे,कोख तहाँ मिटथे !!5!!

कतको धूवा अलहन सँचरे,मया जाल फँसके !
धूवा मारव काबर संगी,आज तुमन हँसके !!6!!

नाबालिक में धूवा परगे,बोल कोन रखही !
पाप मान के फेंकैं सबतो,कुकुर खड़े भखही !!7!!

करथव काबर अइसन गलती, रोथन मर मरके !
बिनती हे तुम रोकव अलहन,जीथन डर डरके !!8!!

जेकर उजड़े कोख जान ले,हिरदे हा जरथे !
जीथे काया दिखथे सबला,अंत्तस हा मरथे !!9!!

जानौं बढ़िया बात सबो जी,गुरुजी जब रहिसे !
छोड़व अइसन पाप करम ला, सबला तब कहिसे !!10!!

बैना संस्कृति चालू करके,क्रांत्ति करदिच सगा !
सतगुरु घासी जेकर परिचय,सबला कहवँ जगा !!11!!

कोख तरी तब लइका बाँचै,धूवा बंस पलै !
पढ़े लिखे अब पापी होगैं,कोख मरघट चलै !!12!!

गुरु घासीदास अमृतवाणी : एक धूवा मारे तेनो तोर बराबर आय

असकरन दास जोगी
सम्पर्क : 9340031332
www.antaskegoth.blogspot.com
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