पारंपरिक देवार-गीत

मार दिस पानी बिछल गे बाट
ठमकत केंवटिन चलिस बजार
केंवटिन गिर गे माड़ी के भार
केवट उठाये नगडेंवा के भार
लाई मुर्रा दीन बिछाय
शहर के लइका बिन बिन खाय
अपन लइका ला थपड़ा बजाय
पर के लइका ला कोरा मां बइठाय
दिन खवाय मछरी भात
रात ओढ़ाइस मछरी के जाल
अलको रे केंवटिन मलको रे धार
सुख सनीचर मंगलवार
भरे पूरा मां घोड़ा दौड़ाय
सुक्खा नदिया मां डोंगा चलाय
रात के केंवटिन डफड़ा बजाय
दिन के केंवटिन खपड़ा बजाय
एक ठन सीथा मां फुल के मरे
एक बूंद पानी मां बुड़ के मरे
कारी केंवटिन गर भर पोत
बरगे केंवटिन सुरुज के जोत
कोलवा केंवट के डौकी आय
नाथ केंवट के बहिनी आय
अगुवा केंवट के काकी आय
रूपवा केंवट के दाई आय
मन्‍टोरा केवंटिन के सास आय
गत गया के सारी आय
कानी आंख मां काजर लगाय
खोरी गोड़ माँ तोड़ा लगाय
बूची कान मां ढार लगाय
नकटी नाक मा गुना लगाय
कहिदे केवटिन मछरी के मोल
नइए राजा मछरी के मोल
जतके पाजा ओतके लेजा
घोड़ा हाथी लाद के लेजा
सोनहर मछरी सोनार के मोल
बामी मछरी बाम्हन के मोल
उचटन डेंवा राउत के मोल
बिजलुवा मछरी विजलुवा के मोल
डंडवा मछरी डंडवा के मोल
पढ़िन मछरी कसेर के मोल
कोतरी मछरी तेली के मोल
रुदवा मछरी कलार के मोल
सरांगी मछरी सरांगी के मोल
ओड़र कीरा ओड़िया के मोल
केंवई मछरी केवट के मोल
चिंगरी मछरी गड़रिया के मोल।

पारंपरिक रूंझू वाद्य के साथ गाए जाने वाला छत्‍तीसगढ़ी देवार-गीत