- कविता -खुरसी के खेल
- छत्तीसगढ़ी बाल गीत
- अपन हाथ अउ जगन्नाथ
- जय ३६ गढ़ महतारी
- चोला माटी के हे राम
- गांव के पीरा
- जागव जी : अपन बुध लगावौ जी
- नाटक अऊ डॉ. खूबचंद बघेल
- कहिनी : बमलेसरी दाई संग बैसाखू के गोठ
- बसंत बेलबेलहा
- लोक कथा म ‘दसमत कइना’ के किस्सा
- कहिनी: तारनहार
- लघु कथा संग्रह – धुर्रा
- दिया बन के बर जतेंव
- सनत के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- विश्व जल संरक्षण दिवस : सार छंद मा गीत – पानी जग जिनगानी
- परोसी के भरोसा लइका उपजारना
- सुआ नाचेल जाबो
- मोर गॉंव कहॉं सोरियावत हे : मातर जागंय
- किताब कोठी : हीरा सोनाखान के
- अभिनय के भूख कभी मिटय नइ: हेमलाल
- छत्तीसगढ़ म ठेकेदार ह केबल ल काट के ठप कर दीस जियो 4जी के सर्विस
- जस गीत – काली खप्परवाली
- माथा के पसीना
- =वाह रे चुनाव=
- छन्द के छ : अमृत ध्वनि छन्द
- दोहालरी – दामाखेड़ा धाम
- आ, इ, ई, छत्तीसगढ़ी हिन्दी शब्दकोश
- रोवत हावय महतारी
- पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे के वेबसाईट
- कविता- बसंत बहार
- बोनस के फर
- मैं आदिवासी अंव
- दान के महा परब छेरछेरा
- धरोहर ले निकले अनमोल रतन छत्तीसगढ़ी वियाकरन
- गॉंव कहॉं सोरियाव हे : गॉंव रहे ले दुनिया रइही – डॉ. चितरंजन कर
- सतनाम पंथ के संस्थापक संत गुरूघासीदास जी
- धर्मेन्द्र निर्मल के पाँच गज़ल
- मोबाइल के बड़े-बड़े गुन
- नवा बिहान
- छन्द के छ : छप्पय छन्द
- नान्हे कहिनी- चिन्हारी
- अब के गुरुजी
- दौना (कहिनी) : मंगत रविन्द्र
- राजभासा छत्तीसगढ़ी के फैइलाव बर कोसिस
- नवरात्रि मनाबो
- मोर छत्तीसगढ़ के भुंइया
- कहिनी – नवा अंजोर
- बेटी के हाथ मा तलवार करव बिचार
- धान बेचई के करलई
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – सर्वनाम
- मोर मन के पीरा
- अक्ती तिहार
- छत्तीसगढ़ महतारी के रतन बेटा- स्व. प्यारे लाल गुप्त
- लाला फूलचंद श्रीवास्तव के कौशल प्रान्त ( छत्तीसगढ़ ) के बन्दना
- गम्मतिहा : मदन निषाद
- रूख तरी आवव
- जानबा
- चित्रगुप्त हा पेसी के पईसा खावत हे, यम के भंइसा अब ब्लाग बनावत हे.
- आगे परब नवरात के
- मया के दीया
- मरनी भात
- परतितहा मन पासत हे
- गीत – बाँसुरिया के तान अउ सूना लागे घर अँगना
- संस्कृति बिन अधूरा हे भाखा के रद्दा
- दु आखर स्वास्थ्य के गियान
- तोर बघवा ल तो ढिल दे दाई
- तीजा – पोरा के तिहार
- छंद के छ : एक पाठशाला, एक आंदोलन
- नान्हे कहिनी : डोकरा-डोकरी के झगरा
- हरि ठाकुर के गीत: सुन-सुन रसिया
- खेत खार बखरी मं गहिरागे साँझ : पवन दीवान के गीत
- व्यंग्य : छत मा जल सग्रंहण
- भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )
- कहिनी : चटकन
- कहाँ गँवागे मोर माई कोठी
- होली के दोहा
- चुनाव अउ मंदहा सेवा
- मनोज कुमार श्रीवास्तव के सरलग 41 कविता
- अटल बिहारी वाजपेयी ‘‘राजनीतिज्ञ नई बलकि एक महान व्यक्तित्व रहिन’’
- विष्णु सखाराम खांडेकर कहानी के एकांकी रूपांन्तरण : सांति
- ठुमरी
- छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर अशोक बजाज भाई ला कोरी कोरी बधई
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – क्रिया
- पर्यटन : माण्डूक्य ऋषि के तपोभूमि ‘मदकू द्वीप’
- तंय उठथस सुरूज उथे
- जय सिरजनहार, जय हो बनिहार
- दंतेवाड़ा के डीईओ के घर सोन तउले बर एसीबी ल मंगाए ल परिस मशीन
- पंच-पंच कस होना चाही
- स्वच्छ भारत के मुनादी
- जड़कला मा रउनिया तापव
- आंखीं म गड़ जाए रे चढ़ती जवानी
- माता ला परघाबो
- छंदमय गीत- तोर अगोरा मा
- पारंपरिक बांस-गीत
- कोजन का होही
- छत्तीसगढ़ी नाचा के जनक : दाउ दुलारसिंह मंदराजी
- पीरा ल कइसे बतावंव
- बाल गीत
- अरुण निगम के छत्तीसगढी गीत : मन झुमै ,नाचे ,गावै रात-दिन
