- हेमलाल साहू के कविता
- पंच-पंच कस होना चाही
- गोठ बात : पानी बचावव तिहार मनावव
- छत्तीसगढ़ी भासा के महाकाव्यकार
- कहिनी : डोकरा डोकरी : शिवशंकर शुक्ल
- अग्यातवास
- संत कोटि के अलमस्त कवि बद्रीबिशाल परमानंद
- बुधारू के जीवन
- रखवारी
- छत्तीसगढ़ी कविता : सीडी महिमा
- जड़कला मा करव योग रहव निरोग
- वृत्तांत (10) : जिनगी ह पानी के, फोटका ये फोटका
- करिया बादर
- दर्रा हनागे
- अडहा बईद परान घाती : पटवारी साहेब जब डाग्डर बनिस
- परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास : सरसी छंद
- व्यंग्य : गवंई गांव के रद्दा म बस के सफर
- देवउठनी एकादशी अऊ तुलसी बिहाव
- जाड़ हा जनावत हे
- गँवई गाँव : शक्ति छंद
- महिला आरक्षण के लाभ छत्तीसगढ़ के मूल निवासी महिला मन ल देहे जाही
- नान्हे कहिनी- चिन्हारी
- मुख्यमंत्री हर नक्सली मन ले करिस बंदूक छोड़े अऊ शांतिपूर्ण विकास के मुख्यधारा ले जुड़े के गिलौली
- किताब कोठी : अंतस म माता मिनी
- केसरिया रंग मत मारो कान्हा
- गरीब बनो अउ बनाओ
- फसल के पहली खेत मन के माटी के जांच जरूर करवाव
- सोनचिरई
- सार छंद : पूछत हे जिनगानी
- मया के गीत
- भोले बाबा
- मेकराजाला म चार बरिस के गुरतुर गोठ : दू आखर
- नारी सक्ति
- ये भोले तोर बिना….
- आठे कन्हैया
- तिल सकरायत
- चिरई चिरगुन बर पानी निकालव
- परकिती के परती आत्मियता के तिहार ये हरेली
- अब बंद करव महतारी के अपमान
- मया के रंग : लघु कथा
- छत्तीसगढ़ी भाखा हे : डॉ.विनय कुमार पाठक
- सुजान कवि के सुजानिक छन्द कविता : छन्द के छ
- बेटी ल झन मारव : विजेंद्र वर्मा अनजान
- आल्हा छंद – नवा बछर के स्वागत करलन
- हमर घर गाय नइए
- बूढ़ी दाई
- महतारी दिवस विशेष : दाई
- कहानी – सुरता
- छत्तीासगढ़ी म परथंम धर्म उपदेशक संत गुरू घासीदास
- छत्तीसगढ़ी नवगीत : पछतावत हन
- दीया अउ जिनगी
- महादेव के बिहाव खण्ड काव्य के अंश
- टुरी देखइया सगा
- लड़ते पंचायत चुनाव
- माटी के मया सियान मन के सीख
- मितानी के बिसरत संस्कृति
- नवा बिहान
- गरीबा : महाकाव्य (पहिली पांत : चरोटा पांत)
- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य : नोट बंदी के महिमा
- हमर घरे मा हावय दवई
- मोबाइल के बड़े-बड़े गुन
- प्रेम दीप
- व्यंग्य : बड़का कोन
- धन्यवाद ल छत्तीसगढ़ी मँ का कइथें ?
- कहाँ गँवागे मोर माई कोठी
- सुरता : पद्मश्री डॉ. मुकुटधर पाण्डेय
- अनुवाद : टँगिया (The Axe)
- भूतपूर्व सैनिक मन ले सहायक ग्रेड 3 के सीधा भर्ती बर आवेदन आमंत्रित
- बेरोजगारी
- अरुण कुमार शर्मा ल एसो के “पद्म श्री” सम्मान
- छत्तीसगढ़ के माटी अंव
- मया करबे त करले अउ आन कविता : सोनु नेताम “माया”
- मइया पांचो रंगा
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – अव्यय
- वृत्तांत- (4) न गांव मांगिस ,न ठांव मांगिस : भुवनदास कोशरिया
- जय ३६ गढ़ महतारी
- कबिता : नवा बछर के गाड़ा -गाड़ा बधाई
- गांव गंवई के चुनई
- डुमर डारा : कबिता
- चलती के नाम गाड़ी, बिगड़ गे त…
- छन्द के छ : छप्पय छन्द
- छत्तीसगढी उपन्यास : भुइयाँ
- सुकारो दाई
- चँदा दिखथे रोटी कस
- सावन सरल सारदा मैया : जगन्नाथ प्रसाद भानु
- हिन्दू नवा बच्छर के बधाई..
- अनुवाद : पतंगसाज (The Kite Maker)
- विचार के लहर : सियान मन के सीख
- छत्तीसगढ़ म जनचेतना के उन्नायक संत गुरु घासीदास
- सेठ घर के नेवता : कहिनी
- किसान मन के अन्नदान परब छेरछेरा पुन्नी
- राजिम महाकुंभ कल्प 10 फरवरी ले
- सेहत के खजाना – शीतकाल
- छत्तीसगढ़िया कहाबो, छत्तीसगढ़ी बोलबो अउ चल संगी पढ़े ला
- डर
- सरगुजिहा कहनी – हिस्सा-बांटा
- हमर छत्तीसगढ़ राज म आनी-बानी के तिहार हे
- निषाद राज के दोहा अउ गीत
- छत्तीसगढ़ फिलिम के दर्सक ग्रामीण
- कलाकार के सबले बड़े दुसमन गरब हर होथे