- उत्तर कांड के एक अंश छत्तीसगढी म
- जिनगी जरत हे तोर मया के खातिर
- उस्ताद अमजद अली खां, श्रीमती तीजन बाई, शेखर सेन अउ भारती बन्धु ल मानद डी.लिट् के उपाधी
- जाड़ मा हाथ पांव चरका फाटथे
- मानसून मा : कुकुभ छंद
- पितर के कउंवा
- छत्तीसगढ़ ला जनम दिन के बधई
- छत्तीसगढ़ी वेब टीवी ‘जय जोहार’ होईस सुरू
- रुद्री के रुद्रेश्वरधाम
- मोर गांव के फूल घलो गोठियाये : श्रीमती आशा ध्रुव
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘दुनो फारी घुनहा’
- सावन के झूला
- सार – छंद : चलो जेल संगवारी
- होरी हे रिंगी चिंगी : रंग मया के डारव संगी
- लघु कथा – दरूहा
- डॉ. सम्पूर्णानन्द के आस्था : नान्हे कहिनी
- छत्तीसगढ़ी गीत नंदावत हे
- छत्तीसगढ़ के चिन्हारी आय- सुवा नृत्य
- चोला माटी के हे राम
- देवारी तिहार आवत हे
- तोर मेहनत के लागा ल…..
- शिक्षा अधिकारी अपन आफिस म करवावत हे टोना-टोटका
- सुशासन दिवस लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम के संग
- पारंपरिक लोक गीत : मोर मन के मजूर
- मोर गॉंव कहॉं सोरियावत हे : मातर जागंय
- अपन घर के देवता ल मनइबो
- छत्तीसगढ़ के गारी -प्रतिकात्मक अभिव्यक्ति
- तोर मुसकी ढ़रत रूप
- अपने घर म बिरान हिंदी महिना
- जोड़ी! नवलखा हार बनवा दे
- रेमटा टुरा के करामात
- वाह रे मनखे के मन
- छत्तीसगढ थापना परब अउ बुचुआ के सुरता
- पुस्तक समीक्षा : माटी की महक और भाषा की मिठास से संयुक्त काब्य सग्रंह- ‘जय हो छत्तीसगढ़’
- सतनाम सार हे
- कलजुगहा बेटा : नान्हे कहिनी
- पुन्नी मेला घुम आतेन
- लोक रंजनी लोक नाट्य : नाचा
- नाग पंचमी के महत्तम
- तुँहर जउँहर होवय : छत्तीसगढी हास्य-व्यंग संग्रह
- लुए टोरे के दिन आगे
- ऊँचई
- हरेली के गीत
- चुनावी व्यंग्य : बूता के अपग्रेडेसन
- आठे कन्हैया
- अंग्रेजी के दबदबे के बीच छत्तीसगढ़ी की जगह
- सुनय सबके, करय अपन मन के : सियान मन के सीख
- संवैधानिक आजादी के सुख पहुंचय आम जनता तक
- बोधन राम निषाद राज के तीन छत्तीसगढ़ी गीत
- झगरा फेंकी डबरा
- बसंत बहार : कोदूराम “दलित”
- एक चिट्ठी गनेस भगवान के नांव
- छत्तीसगढ़ी बोलबो
- खुमान लाल साव ल मिलिस संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- मंदू
- हमर होरी – कहिनी
- छत्तीसगढ़ी गजल
- गरमी बाढ़त हे
- गज़ल : किस्सा सुनाँव कइसे ?
- गरीबनवाज ला गरीब के पाती
- 14 वां वार्षिक साहित्य सम्मेलन 2010
- बसंत राघव के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- शिव भोला ल मनाबोन
- सुरता सुशील यदु
- मोर बाई बहुत गोठकहरिन हे!
- नान्हे कहिनी – मन के पीरा
- लावणी छंद : श्रद्धा के सुरता माँ मिनी माता
- कहिनी : हिरावन
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – ‘पता नइये’ अउ ‘अभागिन भुइयाँ ‘
- जाड़ हा जनावत हे
- लोककथा : कउंवा करिया काबर होईस
- घानी मुंदी (बाल गीत संग्रह) – निशीथ कुमार पाण्डेय
- छत्तीसगढ़ के चिन्हारी गोदना
- कबिता : मोर अंगना मा बसंत आगे ना
- जांजगीर-चांपा : ग्रामीण बेरोजगार मन ल डेयरी काम मं मिलही छह दिन के निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण
- अब का पोरा-जाँता जी ?
- चँदा दिखथे रोटी कस
- मोर गांव कहां गंवागे
- राखी के तिहार
- मैं वीर जंगल के : आल्हा छंद
- गीत : चौरा म गोंदा रसिया, मोर बारी म पताल हे
- मोर गॉंव कहॉं सोरियावत हे : सबके मुड़ पिरवाथें
- बाल कहिनी : अइसे धरिन चोर गोहड़ी
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – खानपान
- गियान के जोत
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’
- आल्हा छंद – नवा बछर के स्वागत करलन
- लघुकथा-किसान
- झाड़ फूंक करलौ जी लोकतंत्र के
- व्यंग्य : नवा सड़क के नवा बात
- गरियाबंद म डाटा एंट्री ऑपरेटर पद बर 526 आवेदन पात्र
- महानदी पैरी अउ सोढुर तीनो के मिलन इस्थान म लगथे राजिम मेला
- सुरता
- छत्तीसगढ़िया भाव जगाए मं, काबर लजाथन?
- गरीबा : महाकाव्य (दूसर पांत : धनहा पांत)
- मैं वीर जंगल के : आल्हा छंद
- अबिरथा जनम झन गंवा
- पछताबे गा
- छत्तीसगढ़ के जुझारू पूत अउ महतारी भाखा के मयारुक साहित्यकार पं. सुंदर लाल शर्मा
- हमर शिक्षा व्यवस्था
