- कमरछठ कहानी – दुखिया के दुःख
- मन डोले रे मांग फगुनवा …. बादर के दिन म फागुन लावत हें भाई लक्ष्मण मस्तुरिहा
- डेरहा बबा
- बाढ़ ले आये बढ़वार
- छत्तीसगढ़ी कथा-कंथली : संकलन अउ लेखन – कुबेर
- सरगुजिहा कहनी – काकर ठन बिहाव करबे
- लोक कथा : लेड़गा के बिहाव
- राजा – नान्हे कहिनी
- चलती के नाम गाड़ी, बिगड़ गे त…
- कुँआ-तरिया मा जलदेवती माता के निवास होथे
- कहिनी : बाढ़ै पूत पिता के धरम
- जय छत्तीसगढ़ महतारी
- भगवान शंकर के अनेक नाव
- फुगड़ी गीत
- कहिनी : फंदी बेंदरा
- वाह रे मनखे के मन
- वन्देमातरम् : महूं पांवे परंव तोर भुँइया
- सरला शर्मा के उपन्यास : माटी के मितान
- बलदाऊ राम साहू के छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- नइ आवै : देवीप्रसाद वर्मा ‘बच्चू जाँजगिरी’ के गीत
- तीन कबिता
- सरसती वंदना
- डॉक्टर दानी के बानी
- करिया बादर छागे
- लइका मन मं पढ़इ लिखइ के सउख कइसे बाढ़य?
- भाषान्तर : बुलबुल अउ गुलाब (मूल रचना – आस्कर वाइल्ड. अनुवाद – कुबेर )
- गनेस के पेट
- अनुवाद : टँगिया (The Axe)
- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य कविता
- नान कुन कहानी : ठौर
- पारंपरिक फाग गीत
- नान्हें बियंग कहिनी: मोला कुकुर बना देबे
- मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू
- कविता : जोंधरा
- पढ़ई-लिखई : सरला शर्मा
- रायपुर नगर निगम के मयारू : ठाकुर प्यारे लाल
- वाह रे कलिन्दर
- विष्णुपद: छंद – मोखारी
- सबले बढ़िया – छत्तीसगढ़िया
- बलौदाबाजार-भाटापारा : 4 फरवरी को होवैया कौशल परीक्षा निरस्त
- बेंगवा के टरर-टरर
- देवता मन के देवारी : कारतिक पुन्नी
- शिक्षाकर्मी के पीरा
- हिरदे जुडा ले आजा मोर गांव रे : डॉ. विनय कुमार पाठक के गीत
- शिक्षक दिवस 5 सितम्बर : सिक्छक हँव सरलग सिखथँव
- देवी सेवा गीत
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’
- कहानी : मुर्रा के लाडू
- 😜चल संगी चुनाव आगे😜
- गरीबों का सहारा है, वही ठाकुर हमारा है : ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- बहुरिया – कहिनी
- आगे सन् अट्ठारा : सार छंद
- जाड़ अब्बड़ बाढ़त हे
- झांझ के गुर्रई संग बासी के सुरता – गुड़ी के गोठ
- ढ़पोरशंख के किस्सा : भावना श्रीवास, तखतपुर
- कपड़ा
- सोनहा सावन सम्मारी
- पितर पाख के असल मान राख : जीयत मा डंडा-मरे मा गंगा
- पुस्तक समीक्छा : अंतस के पीरा के गोहार ‘लदफंदिया’
- मंय बंदत हंव दिन रात ओ
- चुनावी लघुकथा : बुरा न मानो …… तिहार हे
- किशोर तिवारी के सस्वर गीत
- तडफ़त छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढिय़ा
- देख कइसे फागुन बउरात आत हे
- ग़ज़ल : उत्तर माढ़े हे सवाल के
- लीम चउरा के पथरा
- जनकवि कोदूराम ”दलित” की पुत्र वधु श्रीमती सपना निगम के नान्हे कहिनी
- चरभंठिया को गोठ
- भारतीय संविधान अउ महतारी भाखा
- नान्हे कहिनी – फुग्गा
- तोर बघवा ल तो ढिल दे दाई
- छत्तीसगढ़-गौरव
- मेरी क्रिसमस
- खजरी असनान – गुड़ी के गोठ
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’
- पंचायत मंत्री अजय चन्द्राकर ह ‘कार्टूनों में अटल जी’ पुस्तक के करिस विमोचन
- पंडित शुकलाल पाण्डेय : छत्तीसगढ़ गौरव
- सियान मन के सीख : चोला माटी के हे राम
- मोर इस्कूल के गनेस
- छत्तीसगढ़ी गज़ल – कागज म कुआं खनात तो हे
- व्यंग्य-हनुमान के जात
- तेरा साल विकास के : गीत
- स्वक्छता अभियान
- जय सिरजनहार, जय हो बनिहार
- अंधविसवास
- सोलह सिनगार
- आऊटसोरसिंग
- दादूलाल जोशी ‘फरहद’ के छै ठन कविता
- कविता : पथरा
- तन मन होगय चंगा
- महतारी के ममता
- होले तिहार
- हमर बोली-भासा
- सोनाखान के सोन-शहीद बीर नारायण सिंह
- मया बर हर दिन ‘वेलेन्टाइन डे’ होथे
- राजागुरु बालकदास : छत्तीसगढ़ गवाही हे
- विकास के प्राथमिकता म दुर्ग, भिलाई अउ चरौदा सर्वोपरि : डॉ. रमन सिंह
- मोर मन के बात
- लोक मंच के चितेरा
- छत्तीसगढ़ी में मुहावरा के परयोग
