- बस्तर के हरियर सोना संग्राहक मन ल बैंक मित्र अउ बैंक सखी मन ले सीधा मिलत हे पईसा
- गुड़ी के गोठ : आयोग ल अधिकार देवयं
- महतारी तोर अगोरा मा
- परतितहा मन पासत हे
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- राखी के तिहार
- चटनी आमा के – कबिता
- चुनावी लघुकथा : बुरा न मानो …… तिहार हे
- कान्हा मोला बनादे : सार छंद
- अंधियार म नाईट विजन ले वायु सेना के जवान मन करिन सराहनीय सहयोग
- घुरवा के दिन घलो बहुरथे
- एम्स, रायपुर में केशियर, असिस्टेंट इंजीनियर और अन्य वेकेंसी अंमित तिथि 27 मार्च
- गुने के गोठ : मोर पेड़ मोर पहिचान
- अशोक नारायण बंजारा के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- उर्दू शेर के अनुवाद
- ग़ज़ल : उत्तर माढ़े हे सवाल के
- धर ले कुदारी
- लोक मंच के चितेरा
- बाल कहिनी : अइसे धरिन चोर गोहड़ी
- मोर गॉंव कहॉं सोरियावत हे : तइहा के सब बइहा ले गय
- छत्तीसगढ़ी परिम्परिक लोक धुन छेरछेरा पुुन्नी के गीत
- छन्द के छ : यहू ला गुनव ….
- छत्तीसगढ़िया जागव जी
- कइसे उदुप ले डोकरा होगे
- नंदावत हे अंगेठा
- मटमटहा टूरा
- किसानी के दिन आगे
- पटवारी साहब परदेसिया बन गे
- हमला तो गुदगुदावत हे, पर के चुगली – चारी हर : छत्तीसगढ़ी गज़ल
- महतारी दिवस 14 मई अमर रहे : महतारी तोर महिमा महान हे
- धुर्रा-गर्दा ल झटकारे के जरूरत – गुड़ी के गोठ
- कहानी – देवारी के कुरीति
- रायपुर : प्रादेशिक सेना के पैदल वाहिनी (153 इन्फैट्री बटालियन) के भर्ती रैली 08 ले 14 फरवरी तक
- रहचुली
- नारी अऊ पुरूस दो परमुख स्तंभ
- दोखही के दुख (लघु कथा)
- ग़ज़ल : सुकवि बुधराम यादव
- पढ़ई-लिखई : सरला शर्मा
- यमराज ह पिकनिक मनाय जब धरती म आइस
- निफ्ट में एमटीएस व अन्य 38 पद, ग्रेजुएट/ डिप्लोमा होल्डर करें आवेदन
- डोंगरी पहाड़ में
- टिकेश्वर सिन्हा ‘गब्दीवाला’ के छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह : ठूठी बाहरी
- छत्तीसगढ़ी गज़ल
- तेजनाथ के गजल
- छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मेलन 2009
- सबले बढ़िया – छत्तीसगढ़िया
- जनम भूमि : कहिनी
- पातर पान बंभुर के, केरा पान दलगीर
- लेखक परिचय : सुरेश सर्वेद
- संसो झन कर गोरी
- बसंती हवा
- गांव के सीतला
- बेंदरा बिनास
- वृत्तांत (10) : जिनगी ह पानी के, फोटका ये फोटका
- गांव-गंवई के बरनन- मिश्र के कविता में – सरला शर्मा
- बियंग कबिता : काशीपुरी कुन्दन के आखर बान
- ररुहा सपनाये …….
- गरमी के भाजी
- अभिनय के भूख कभी मिटय नइ: हेमलाल
- बलदाऊ राम साहू के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- गीत-“कहां मनखें गंवागे” (रोला छंद)
- कहानी : बड़का तिहार
- पईसा म पहिचान हे
- अनुवाद : आखिरी पत्ता (The Last Leaf)
- छत्तीसगढ़ी नाटक – मतदान बर सब्बो झन होवव जागरूक
- हमर शिक्षा व्यवस्था
- दौना (कहिनी) : मंगत रविन्द्र
- सोनहा सावन सम्मारी
- आल्हा छंद : भागजानी घर बेटी होथे
- हमर छत्तीसगढ़
- भाव प्रवण सरस कृति : मनुख मोल के रखवारी
- माटी के मया
- माटी के मया सियान मन के सीख
- कविता – महतारी भाखा
- पातर पान बंभुर के, केरा पान दलगीर
- भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )
- सरग सुख
- जागो हिन्दुस्तान
- जतन करव तरिया के
- सरग हे जेकर एड़ी के धोवन
- नवा बिहान
- कविता : नवां अंजोर अउ जाड़
- बंदौ भारत माता तुमला : कांग्रेस आल्हा
- लाली चूरी
- कहा नहीं
- गियान के जोत
- कोण्डागांव : कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक अउ सहायक प्रोग्रामर के उम्मीदवार मन के सूची जारी
- कोजन का होही
- पितर के कउंवा
- जयलाल कका के नाच
- कहिनी : बमलेसरी दाई संग बैसाखू के गोठ
- लोक कथा : लेड़गा के बिहाव
- जयंत साहू के कहिनी : मनटोरा
- देशज म छा गे चंदैनी गोंदा
- गांधीजी के बानी दैनिन्दिन सोंच बिचार
- बेंगवा के टरर-टरर
- धरोहर ले निकले अनमोल रतन छत्तीसगढ़ी वियाकरन
- आगे हरेली तिहार
- कोमल यादव के कविता : बेटी बचावा अउ जाड के बेरा
- पुस्तक समीक्षा : परिवार, व्यवहार अउ संस्कार के संगम ‘‘तिरबेनी‘‘
