- कोइली के गुरतुरबोली मैना के मीठी बोली जीवरा ल बान मारे रेे
- 51 शक्तिपीठ म सबले बडे़ ज्वाला जी
- दू कबिता ‘प्रसाद’ के
- कोंदा मनके भजन महोत्सव – गुड़ी के गोठ
- साहित्य की वाचिक परंपरा कथा-कंथली: लोक जीवन का अक्षय ज्ञान कोश
- जस गीत : कुंडलिया छंद
- चुनावी व्यंग्य : योग्यता
- छत्तीसगढी कुंडली : रंगू प्रसाद नामदेव
- व्यंग्य : रावन संग भेंट
- बेटी मन
- वइसन बिहनिया अब कहाँ होथे
- जब बेंदरा बिनास होही
- छत्तीसगढि़या संगी मन संग जरूरी गुपचुप बात
- छत्तीसगढ़ी लोक म हनुमान
- हमर संस्कृति हमर पहिचान
- प्रेम दीप
- मया करे ले होही भाषा के विकास : अनुपम सिंह के जयप्रकाश मानस संग गोठ बात
- काकर लइका होइस – छत्तीसगढ़ी लघु कथा
- सावन मा बेलपत्र के महिमा
- छत्तीसगढ़ी प्रेम गीत
- गरमी के दिन आगे
- खतरनाक गेम
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – रतिहा
- समीक्छा : दोहा के रंग
- महिला बाल विकास परियोजना कोसीर क्षेत्र म 21 नावा ऑंगनबाड़ी केन्द्र खुलही
- मोला मइके देखे के साध लागय : रामरतन सारथी
- चिन्हारी- नरवा-गरूवा-घुरवा-बारी
- हाय रे मोर गुरतुर बोली
- होथे कइसे संत हा (कुण्डलिया)
- माटी के दियना
- मुख्यमंत्री संग संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ह सौजन्य मुलाकात करिन
- धन-धन रे मोर किसान
- मोर गाँव
- हीरा गंवा गेहे बनकचरा म…
- वाह रे तै तो मनखे (रोला छंद)
- अपन हाथ अउ जगन्नाथ
- बियंग : पारसद ला फदल्लाराम के फोन
- सेवा गीत : कोयली बोलथे
- सरगुजिहा गीत – गोई रे
- भईसा गाड़ा के चलान
- दू ठन गीत रोला छंद अउ कुण्डलियां छंद म
- लमसेना प्रथा चालू करव
- सरगुजिहा गीत
- बेरा के गोठ : फिलिम के रद्दा कब बदलही
- बम-निकलगे दम
- घर म नाग देव भिंभोरा पूजे ल जाय : नान्हे कहिनी
- छेरछेरा के तिहार – लइका मन पारत गोहार
- प्रधानमंत्री उज्जवला योजना म 3.18 लाख महिला मन ल मिलिस रसोई गैस कनेक्शन
- सुघ्घर लागथे मड़ई
- बहुरिया – कहिनी
- बरखा गीत
- आगे आगे नवा साल
- मजदूर
- गरीबा महाकाव्य (सतवया पांत : चनवारी पांत)
- कान्हा मोला बनादे : सार छंद
- अभिनय के भूख कभी मिटय नइ: हेमलाल
- माटी के दियना
- तुंहर मन म का हे
- होली के रंग – राशिफल के संग
- छत्तीसगढ़ी कविता मा लोक जागरन के सुर
- भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )
- हंडा पाय हे किथे सिरतोन ये ते लबारी
- अंगाकर रोटी कइसे चुरही
- शिक्षक के भूमिका म मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह
- छंद चालीसा – छत्तीसगढी छंद के कोठी
- बालदिवस : मया करइया कका नेहरु
- संस्कृति बिन अधूरा हे भाखा के रद्दा
- मन के बिचार
- मया के होरी
- किसान के पीरा
- दोहावली
- लोरिकायन – लाईट एण्ड साउंड (जुगुर-जागर रपट) : संजीव तिवारी
- छत्तीसगढ़ के जन-कवि स्व.कोदूराम “दलित “के दोहा
- सियान मन के सीख : चोला माटी के हे राम
- सांस म जीव लेवा धुंगिया
- मया के चंदा
- शिव शंकर
- 24 मई -जेठ दसमी : वीर आल्हा जयंती, आल्हा चालीसा (आल्हा छंद में)
- व्यंग्य : ममा दाई के मुहुं म मोबाइल
- सुवा गीत : कही देबे संदेश
- कहानी : मंतर
- पुस्तक समीक्छा : धनबहार के छांव म
- कविता : नवां अंजोर अउ जाड़
- जमुना के तीर तीर हो
- राघवेन्द्र अग्रवाल के गोठ बात : जान न जाइ नारि गति भाई
- नान्हे कहिनी – दहकत गोरसी म करा बरसगे
- मोर इस्कूल के गनेस
- लघु कथा संग्रह – धुर्रा
- मोर छत्तीसगढ़ कहां गंवागे
- कपड़ा
- ठेकेदार के नौ ठिकाना मन म इनकम टैक्स के छापा
- घटारानी हावे तोर नांव
- नाचे नागिन रेडियो-रेडियो
- व्यंग्य : सरकारी तिहार
- देख रे आंखी, सुन रे कान: भगवती लाल सेन
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे अउ मर जवान, मर किसान
- महतारी के ममता
- कविता
- गजल : कतको हे
- महतारी दिवस विशेष : महतारी महिमा
