- अब्बड़ सुग्घर मोर गांव
- संपादकीय : करिया तसमा म आंखी के उतियईल अउ उल्टा लटके के डर ले मुक्ति
- बसंत उपर एक छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- हमर देस : जौन देस में रहिथन भैया, ये ला कहिथन भारत देस
- नान्हे गम्मत : झिटकू-मिटकू
- हमर पूंजी
- छत्तीसगढ़ी गुरतुर अऊ नुनछुर भाखा ए
- छत्तीसगढ़ी बाल गीत
- तोर बघवा ल तो ढिल दे दाई
- आगे सन् अट्ठारा : सार छंद
- नानकिन किस्सा : प्याऊ
- पारंपरिक लोक गीत : मोर मन के मजूर
- अकती के तिहार आगे
- किसान के पीरा : आरे करिया बादर
- आनी बानी : 14 भाषा के कविता के छत्तीसगढ़ी अनुवाद
- कहानी : मुर्रा के लाडू
- कीरा – मकोरा
- छ्न्द बिरवा : नवा रचनाकार मन बर संजीवनी बूटी
- भोरहा में झन रईहूँ
- सुमिरव तोर जवानी ल
- खेती किसानी
- अंगरेजी परेमी छत्तीसगढिया मन के घलव जय हो !
- सुकवि बुधराम यादव जी के गज़ल
- किसान मन के अन्नदान परब छेरछेरा पुन्नी
- भिनसार (काव्य संग्रह) – मुकुंद कौशल
- पितर पाख म साहित्यिक पुरखा के सुरता – कोदूराम दलित
- तंय उठथस सुरूज उथे
- नवा बछर के मुबारक हवै
- मुख्यमंत्री हर नक्सली मन ले करिस बंदूक छोड़े अऊ शांतिपूर्ण विकास के मुख्यधारा ले जुड़े के गिलौली
- पुस्तक समीक्षा : चकमक चिंगारी भरे
- सरग असन मोर गांव
- लोरी
- व्यंग्य : बड़का कोन
- दुखिया मन के दुःख हरैया
- नंदाजाही का रे कमरा अउ खुमरी
- 13 मई विश्व मातृ दिवस : महतारी महिमा (सरसी छंद)
- फोकट के गियान झन दे सियान :पटवारी के गोठ-बात
- छत्तीसगढ़ के चार झन हिम्मती लइका मन ल मिलही 2016-17 के राज्य वीरता पुरस्कार
- कहिनी : चटकन
- अमरैया के छाँव म
- छत्तीसगढ़ी नवगीत
- जस गीत – काली खप्परवाली
- बरी-बिजौरी मा लुकाय बिग्यान
- लघुकथा : अमर
- जय ३६ गढ़ महतारी
- संस्कृति बिन अधूरा हे भाखा के रद्दा
- व्यंग्य : गिनती करोड़ के
- हंडा पाय हे किथे सिरतोन ये ते लबारी
- लिंग परिक्छन के परिनाम
- गुरू जी अउ नाँग देवता के पीरा
- सावन अऊ शिव
- पान के मेम
- रीतु बसंत के अवई ह अंतस में मदरस घोरथे
- जनतंत्र ह हो गय जइसे साझी के बइला
- चैत-नवरात म छत्तीसगढ़ी दोहा 5 : अरुण कुमार निगम
- छत्तीसगढ़ी नवगीत : पछतावत हन
- सावन
- नारी सक्ति
- मुख्यमंत्री संग संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ह सौजन्य मुलाकात करिन
- काम दहन के आय परब- होली
- जल अमरित
- छत्तीसगढ़ के अनन्या हर राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता म पाइस पहिली स्थान
- नान्हे कहिनी : सिरिफ एक पेड़
- हमर घरे मा हावय दवई
- संगवारी के पंदोली
- अक्षर दीप जलाबोन
- चुनाव आयोग म भगवान : व्यंग्य
- दीवाली तिहार
- विष्णु सखाराम खांडेकर कहानी के एकांकी रूपांन्तरण : सांति
- छत्तीसगढ़ी उपन्यास : जुराव
- नान्हे कहिनी : नवा बछर के बधाई
- अंगरेजी नवा साल!!
- दु आखर स्वास्थ्य के गियान
- कबिता : बेटी मन अगुवागे
- आन के तान
- मंतर
- देशज म छा गे चंदैनी गोंदा
- अपन घर के देवता ल मनइबो
- हमर भाग मानी ये तोर जईसन हितवा हे
- जनउला (प्रहेलिकायें)
- मोला करजा चाही
- छत्तीसगढ़ के दू साहसी लईका मन के राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार खातिर चयन
- लींग परीक्छन के परिनाम
- बस्ता
- दिखय नही ओर-छोर, त का करन
- असम के छत्तीसगढ़ वंशी मन के गीत
- चुनाव अउ मंदहा सेवा
- मुठिया के पेड़
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था म सहकारिता के महत्वपूर्ण योगदान : डॉ. रमन सिंह
- बात सुनव छत्तीसगढ़ के, बन औषधि के जड़ के
- बइगा के चक्कर – नान्हे कहिनी
- पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : नरसिंह दास
- असम में जीवंत छत्तीसगढ़
- अक्ती परब सीता ल बिहावय राजा राम – परब तिहार
- बरतिया बर पतरी निही, बजनिया बर थारी
- संपादकीय: टमड़ ले पहिली अपनेच कान
- बरीवाला के कहिनी : बंटवारा
- पारंपरिक राउत-नाच दोहा
- मिर्चा भजिया खाये हे पेट गडगडाये हे
- अगहन बिरसपति के पूजा
