- कबिता : मनखे के इमान
- मया के अंजोर
- नान्हें बियंग कहिनी: मोला कुकुर बना देबे
- हरियर तरकारी
- आजादी के दीवाना : सुभाष चंद्र बोस (23 जनवरी जयंती विशेष)
- बसे हो माया मोरो नैन
- भोरमदेव – छत्तीसगढ़ के खजुराहो
- अकती तिहार
- महतारी बरोबर भउजी
- जवारा अउ भोजली के महत्तम
- फील्ड सॉंग्स ऑफ छत्त्तीसगढ़
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- छत्तीसगढ़ी प्रेम गीत
- जीतेंद्र वर्मा खैरझिटिया के मत्तगयंद सवैया
- आगू दुख सहिले
- मोर छत्तीसगढ़ के किसान
- हमर माटी हमर गोठ
- छत्तीसगढ़ी गज़ल – जंगल ही जीवन है
- गढ़बो नवा छत्तीसगढ़
- दिनेश चौहान के गोहार : महतारी भाखा कुरबानी मांगत हे
- चारो जुग म परसिद्ध सिवरीनरायन
- मोर गाँव के बिहाव
- छत्तीसगढ़ी गीत ‘हाथी हाथी’
- मुकुन्द कौशल के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- डेंगू के कारण कोन
- आमा के चटनी
- गजल : कतको हे
- गिरिवर दास वैष्णव के गीत
- फेसबुक म अफिसर बनकेे मोटियारी ल फंसाइस, फेर धांध दीस
- भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )
- जिनगी जीये के रहस्य : महाशिवरात्रि
- ये भोले तोर बिना….
- नोनी-बाबू के बिहाव
- जय सिरजनहार, जय हो बनिहार
- गजल : दिन कइसन अच्छा
- छत्तीसगढी कुण्डली (कबिता) : कोदूराम दलित
- मया के रंग : लघु कथा
- छत्तीसगढ़ी दिवस 28 नवम्बर विशेष
- कविता संग्रह : रउनिया जड़काला के
- हाईकू
- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह तुंहर जंउहर होवय के होईस विमोचन
- होली के रंग – राशिफल के संग
- नान्हे कहिनी – फुग्गा
- बेरा के गोठ : सुखी जिनगी जियेबर छत्तीसगढ़िया सिखव बिदुर नीति
- परजातंत्र
- कविता: बराती
- रायपुर : प्रबंधक व सुपरवाइजर के निःशुल्क प्रशिक्षण बर पंजीयन 10 फरवरी तक
- छत्तीसगढ़ी बोले बर लाज काबर
- नारी अऊ पुरूस दो परमुख स्तंभ
- छत्तीसगढ़ी संस्कृति म गोदना
- अम्बिकापुर म सहायक प्रोग्रामर संविदा पद बर दावा-आपत्ति 7 मार्च तक
- कबिता : चना-बऊटरा-तिवरा होरा
- अक्ती परब सीता ल बिहावय राजा राम – परब तिहार
- छत्तीसगढ़ी भाषा ल पहचान देवाबोन : दयाल दास बघेल
- कमरछठ कहानी – दुखिया के दुःख
- छत्तीसगढ़ी भाषा परिवार की लोक कथाऍं
- छेरछेरा अब आगे
- सरद्धा अउ सराद्ध
- तिल सकरायत
- असल जिनगी म तको ‘नायक’ हाबे मनु फिल्म मेकर
- कमरछठ कहानी (6) – सोनबरसा बेटा
- दान के महा परब छेरछेरा
- व्यंग्य : बटन
- तीजा-पोरा के तिहार
- पुन्नी मेला घुम आतेन
- मंहगाई
- छत्तीसगढ़ी बाल गीत
- तेरा साल विकास के : गीत
- हे गुरु घासीदास – दोहालरी
- कबिता : होरी के उमंग नोनी……
- एकलव्य के द्रोनाचार्य बनगे गांधीजी
- रूख लगाय के डाढ़ – कहिनी
- पद्मश्री डॉ॰ मुकुटधर पाण्डेय के कविता
- गरीबा : महाकाव्य (नउवां पांत : गंहुवारी पांत) – नूतन प्रसाद शर्मा
- लोक कथा : कोपरी के महल
- दान-पुन के महापरब-छेरछेरा
- कोउ नृप होउ, हमहि …
- चुनावी घोसना पत्र
- सरगुजिहा जाड़ा कर गीत
- दारू छोड़व
- छत्तीसगढ़ गौरव के रचियता पंडित शुकलाल पांडेय
- हाय मोला मया लागे अउ रतिया तँय पूस के
- सोनाखान के सोन-शहीद बीर नारायण सिंह
- छत्तीसगढ़ी उपन्यासों में सामाजिक चेतना
- छत्तीसगढ़ म जनचेतना के उन्नायक संत गुरु घासीदास
- ठगही फेर सकरायेत
- आमा के अथान – चौपई छन्द (जयकारी छंद )
- तोर बघवा ल तो ढिल दे दाई
- अब बंद करव महतारी के अपमान
- गउ हतिया
- महू तोर संगी : बालमुकुंद शर्मा ‘गूंज’ के गीत
- किरीट सवैया : पीतर
- फांदा मा परगे किसानी
- चुनाव ल देखत भाजपा ह साधत हे अप्रवासी प्रदेशवासी मन ल
- गुरतुर गोठ : छत्तीसगढी
- भोले बाबा : सार छंद
- होरी हे रिंगी चिंगी : रंग मया के डारव संगी
- संस्कार अउ संस्कृति : गोठ बात
- देखो फुलगे, चंदइनी गोंदा फुलगे
- कती जाथन हमन
