- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य कविता
- राजिम महाकुंभ 2017 : काली ले सुरू
- कुरसी नी पुरत हे
- गुरू अउ सिस्य के संबंध
- बाबा के सात सिद्धांत अउ सतनाम मनइया
- जिनगी जीये के रहस्य : महाशिवरात्रि
- फील्ड सॉंग्स ऑफ छत्त्तीसगढ़
- झन बिसावव सम्मान
- तोर दुआरी
- मोर देश के किसान
- अकती तिहार
- गिरिवर दास वैष्णव के गीत
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘अगोरा’
- 24 मई -जेठ दसमी : वीर आल्हा जयंती, आल्हा चालीसा (आल्हा छंद में)
- दामाखेड़ा धरम धाम के मेला
- सुवा गीत : कही देबे संदेश
- फेसबुक म अफिसर बनकेे मोटियारी ल फंसाइस, फेर धांध दीस
- छत्तीसगढ़ी हाना
- नवा बछर के मुबारक हवै
- बरखा गीद
- घासीदास जी के अमर संदेश-पंथी गीत
- लघुकथा : अमर
- धरम बर तुकबंदी
- कबिता : बेटी मन अगुवागे
- घाम तो घाम मनखे होवई ह बियापत हे
- महतारी दिवस विशेष : दाई
- येदे पटवारी ला फेर मार परे हे काबर कि रावन नई जरे हे
- गुरू जी अउ नाँग देवता के पीरा
- नान्हे कहिनी – सवाल
- सेल्फी के चक्कर
- छत्तीसगढ़ी गज़ल – जंगल ही जीवन है
- आम जनता के गणतंत्र
- बसंत पंचमी अउ ओखर महिमा
- छत्तीसगढ़ के माटी
- दोहा छंद म गीत
- पूस के रात : प्रेमचंद के कहानी के छत्तीसगढ़ी अनुवाद
- मुख्यमंत्री ह करिस राज्य आपदा मोचन बल के प्रशिक्षण केन्द्र के शुभारंभ
- देस बर जीबो,देस बर मरबो
- छत्तीसगढ़ म होही ‘पंजाबी अकादमी‘ के स्थापना : डॉ. रमन सिंह
- कविता के थरहा- विसम्भर यादव ‘मरहा’
- गुरतुर गोठ : छत्तीसगढी
- रूख लगाय के डाढ़ – कहिनी
- सुरहुत्ती तिहार
- गरीबों का सहारा है, वही ठाकुर हमारा है : ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- आल्हा छंद : झाँसी के रानी
- अबिरथा जनम झन गंवा
- चुनावी घोसना पत्र
- पितर के बरा
- हमर घरे मा हावय दवई
- लेख : बंटवारा
- रासन कारड
- तिल सकरायत
- मोर लइका ल कोन दुलारही
- डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय के कैलेंडर के विमोचन
- जनउला (प्रहेलिकायें)
- मोर लइका दारु बेचथे
- सरगुजिहा गीत- रूख ला लगाए डारबो
- छत्तीसगढी गोठ बात : जंवरा-भंवरा
- तुलसीदास
- समय मांगथे सुधार,छत्तीसगढ़ी वर्णमाला एक बहस
- उर्दू शेर के अनुवाद
- गरीब के देवारी
- कविता-समाज ल आघू बढ़ाबोन
- मोर भाखा
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – मुहावरे
- नारी के महिमा भारी हे
- चार बेटा राम के कौडी के ना काम के
- जागव जी : अपन बुध लगावौ जी
- बियंग कबिता : काशीपुरी कुन्दन के आखर बान
- छत्तीसगढ़ी लोककथा : राजा के मया
- छत्तीसगढ़ी फिलिम अउ संस्कृति
- गीत : चौरा म गोंदा रसिया, मोर बारी म पताल हे
- ग़ज़ल : उत्तर माढ़े हे सवाल के
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – आस्था, अंधविश्वास, बीमारियाँ
- लघु कथा – दरूहा
- दू आखर
- कोजन का होही
- गरीबनवाज ला गरीब के पाती
- नान्हे कहिनी : लबारी
- दूध म दनगारा परगे…
- चरन दास चोर
- निषाद राज के छत्तीसगढ़ी दोहा
- नान्हे कहिनी : सिसटाचार
- छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पांचवा सम्मेलन के पहिली दिन
- व्यंग्य : कलम
- छत्तीसगढ़ी 8वीं अनुसूची म कब? : सुधा वर्मा
- बसंत गीत : सुशील भोले
- छेरछेरा अब आगे
- कान्हा मोला बनादे : सार छंद
- व्यंग्य : रावन संग भेंट
- जाड़ हा जावत हे
- संस्कार अउ संस्कृति : गोठ बात
- दू आखर…. : (सम्पादकीय) बुधराम यादव जी
- हमर हरेली तिहार
- गरीबा महाकाव्य (अठवइया पांत : अरसी पांत)
- गरीब बनो अउ बनाओ
- नेता मन नफरत के बिख फइलावत हे
- संसो
- कहानी – देवारी के कुरीति
- बिसवास अउ आसथा के केन्द्र – दाई भवानी , विन्दवासिनी अउ बाबा बन्छोरदेव
