- सरसी छंद : जनकवि कोदूराम “दलित” जी
- कलजुगहा बेटा : नान्हे कहिनी
- कहिनी : चटकन
- बेटी ल झन मारव : विजेंद्र वर्मा अनजान
- माफी के किम्मत
- गीत-राखी के राखी लेबे लाज
- मन लागा मेरो यार फकीरी में – अनुपम सिंह के गोठ
- छत्तीसगढ़ी गीत नंदावत हे
- मरहा राम के संघर्ष
- जुन्ना सोच लहुटगे हमर रंग बहुरगे
- नारायण लाल परमार के कबिता
- असल रावन कोन
- लछनी काकी
- गदहा के सियानी गोठ
- कविता – महतारी भाखा
- छत्तीसगढ़ी भासा : उपेक्छा अउ अपेक्छा (एक कालजयी आलेख)
- गीत : सावन महीना
- नारी अउ सम्मान
- रमिया केतकी के कथा – सत्यभामा आड़िल
- बाल लेखक सार्थक के कहानी : संगवारी
- जादू के खेला
- मजबूर मैं मजदूर
- दौना (कहिनी) : मंगत रविन्द्र
- सुकारो दाई
- खजरी असनान – गुड़ी के गोठ
- नवा बिहान
- हमर बोली-भासा
- हरमुनिया – मंगत रविन्द्र के कहिनी
- गियान के जोत
- जोड़ी! नवलखा हार बनवा दे
- भाई -बहिनी के तिहार – राखी
- कालजयी छत्तीसगढ़ी गीत : ‘अंगना में भारत माता के सोन के बिहनिया ले, चिरईया बोले’ के गायक प्रीतम साहू
- परशुराम
- दीवाली तिहार
- व्यंग्य : नवा सड़क के नवा बात
- नई होईस बड़का धमाका : नोटबंदी के आखिरी दिन प्रधान मंत्री के घोषणा
- बरछाबारी – 19
- हम जम्मो हरामजादा आन… (डॉ.मुकेश कुमार के हिन्दी कविता के अनुवाद)
- दाई अऊ बेटी
- छत्तीसगढ़ी भांजरा
- पारंपरिक छत्तीसगढ़ी सोहर गीत
- गुरतुर गोठ : छत्तीसगढी
- तीजा लेहे बर आहूं
- गोविन्द राव विट्ठल के छत्तीसगढ़ी नाग-लीला के अंश
- दोहा
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – रतिहा
- लुए टोरे के दिन आगे
- गाँव रहिस सुग्घर, अब शहर होगे
- मुख्यमंत्री के अध्यक्षता म 336 करोड़ के निवेश प्रस्ताव उपर एमओयू
- नवरात मा दस दोहा
- कलिंदर
- नान्हें बियंग कहिनी: मोला कुकुर बना देबे
- घाम जनावत हे
- मया के रंग : लघु कथा
- नान्हे कहिनी : सिसटाचार
- छत्तीसगढ़ के बासी: टिकेंद्र टिकरिहा
- फांदा मा परगे किसानी
- खेती म हावय सब सुख – कहिनी
- मोर गाँव ले गँवई गँवागे
- नान्हे कहानी – सुगसुगहा
- सरग सुख
- सोनाखान के शान: वीर नारायण महान
- एक बित्ता के पेट : सियान मन के सीख
- मितानी के गांठ – कहिनी
- पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : भगवती चरण सेन
- मरनी भात
- अकती के तिहार आगे
- घठौंदा के पथरा
- विष्णुपद: छंद – मोखारी
- उदेराम के सपना-2
- जोहत हाबन गा अउ झन भुलाबे
- अपन रद्दा ल बनाबो
- गम्मतिहा : मदन निषाद
- सर्वगामी सवैया : पुराना भये रीत
- डबरी झन बनय डबरा – गुड़ी के गोठ
- छत्तीसगढ़ी के मानकीकरन अउ एकरूपता : मुकुन्द कौशल
- महतारी भासा
- बियंग : भइंस मन के संशो
- कँपकँपाई डारे रे
- माटी के दीया जलावव : सुघ्घर देवारी मनावव
- तोर बोली कोयली जइसन हे
- अंधियार म नाईट विजन ले वायु सेना के जवान मन करिन सराहनीय सहयोग
- फेर दुकाल आगे
- दू रूपिया के चॉंउर अउ घीसू-माधव: जगन
- चँदा दिखथे रोटी कस
- 13 मई विश्व मातृ दिवस : दाई के दुलार (दोहा गीत)
- मनखे गंवागे
- छत्तीसगढ़ महतारी के रतन बेटा- स्व. प्यारे लाल गुप्त
- अटल बिहारी वाजपेयी ‘‘राजनीतिज्ञ नई बलकि एक महान व्यक्तित्व रहिन’’
- लोक कथा : लेड़गा मंडल
- छत्तीसगढ़ी कथा कंथली : ईर, बीर, दाउ अउ मैं
- भाव के भूखे भगवान – नान्हे कहिनी
- गज़ल : छत्तीसगढ़ी गज़ल संग्रह “बूड़ मरय नहकौनी दय” ले 3
- राजिम मेला
- कबिता : बसंत गीत
- वइसन बिहनिया अब कहाँ होथे
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’
- आह! घनचकरूं वाह!!
- छत्तीसगढ़ के राजिम धाम
- खेती मोर जिंनगी
