- पं.द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ के गीत
- मंतर
- अब दुरिहा नइ जाए ल परय, पहाड़ी कोरवा मन ल नजदीक के दुकान मन म मिलही पूरा राशन
- कोण्डागांव : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अउ सहायिका पद बर आवेदन आमंत्रित
- दोहा
- हमर हरेली तिहार
- सिंहावलोकनी दोहा (गरमी)
- पहिचान: भूपेंद्र टिकरिहा के कविता
- कन्या भोज (लघुकथा )
- अक्ती तिहार
- बोधन राम निषाद राज के गीत
- दुरिहा दुरिहा के घलो,मनखे मन जुरियाय अउ सार छंद – मकर सक्रांति
- संगी के बिहाव
- मोर गाँव के किसान
- वृत्तांत- (1) इंहे सरग हे : भुवनदास कोशरिया
- छत्तीसगढ़ म एके दिन दू भरती परीक्षा मन के तारीक : फूड इंस्पेक्टर अउ यूपीएससी
- विकास के प्राथमिकता म दुर्ग, भिलाई अउ चरौदा सर्वोपरि : डॉ. रमन सिंह
- अम्बिकापुर म सहायक प्रोग्रामर संविदा पद बर दावा-आपत्ति 7 मार्च तक
- जन आन्दोलन के गरेर
- सुरता: लोक संगीत म जीवन ल समर्पित करइया महान कलाकार – खुमान साव
- दौना (कहिनी) : मंगत रविन्द्र
- अकती के तिहार
- चार बेटा राम के कौडी के ना काम के
- हरि ठाकुर के गीत: सुन-सुन रसिया
- मानवता गंवागे
- सरग सुख
- वृत्तांत- (6) सबे जीव के सरेखा ..रखना हे : भुवनदास कोशरिया
- कबीरदास कोन ? एक भक्त , समाज सुधारक या एक रहस्यवादी जन कवि
- लोक कथा : लेड़गा मंडल
- अटल बिहारी वाजपेयी ‘‘राजनीतिज्ञ नई बलकि एक महान व्यक्तित्व रहिन’’
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – रतिहा
- नौ हाथ लुगरा पहिरे तभो ले देंहे उघरा
- दारू बंदी के रद्दा अब चातर होवत हे
- भगवान मोला गरीब बना दे
- तैं ठउंका ठगे असाढ
- तुँहर जउँहर होवय : छत्तीसगढी हास्य-व्यंग संग्रह
- कबिता : मोर अंगना मा बसंत आगे ना
- लोक कथा : कोपरी के महल
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – कृषि संबंधी प्रक्रियाएँ
- प्रेम दीप
- करगा – [लघु-कथा संग्रह ] समीक्षा
- अइसन दिन आये हे
- मोला कभू पति झन मिलय – कहिनी
- सुराजी वीर अनंतराम बर्छिहा
- 14 फरवरी मातृ-पितृ पूजन दिवस खास…
- मीठ बोली हे मैना कस
- गुरू अउ सिस्य के संबंध
- नान्हे कहिनी : डेहरी के दिया
- तुलसीदास
- किसना के लीला : फणीश्वर नाथ रेणु के कहानी नित्य लीला के एकांकी रूपांतरण
- उठौ उठौ छत्तीसगढ़ लाल- बंशीधर पाण्डे के गीत
- आमा के अथान – चौपई छन्द (जयकारी छंद )
- जलदेवती मैय्या के वरदान
- राखी के तिहार
- मोर छत्तीसगढ़ के माटी
- हमर योजना दिल ले बनथे अऊ दिल ल जोड़थे : डॉ. रमन सिंह
- मितान के मया देखे बर उमड़िस भीड़
- छत्तीासगढ़ी म परथंम धर्म उपदेशक संत गुरू घासीदास
- मोर गांव के फूल घलो गोठियाये : श्रीमती आशा ध्रुव
- भारत के बाग
- जाड़ के घाम
- पारंपरिक देवार-गीत
- अकती तिहार
- वृत्तांत (10) : जिनगी ह पानी के, फोटका ये फोटका
- कविता- बसंत बहार
- कारतिक महीना के महिमा
- तोर मया
- नान्हे कहिनी : रोजी
- प्रकृति के विनास
- छत्तीसगढ़ के व्यंग्यपरक हिंदी उपन्यासों की रचनधर्मिता
- लछनी काकी
- टेंशन वाली केंवटिंन दाई 1
- नरहराधाम छोटे जलप्रपात
- दुर्ग : ग्राम पंचायत मन म ’’साथिन‘‘ पद बर आवेदन 15 फरवरी तक
- मनखे के भाव
- हमर छत्तीसगढ़ योजना : रंग लावत हे महिला मन के संघर्ष
- सरगुजिहा बोली कर गोठ
- नउकरी लीलत हमर तीजतिहार
- कहानी : फूल के जघा पउधा भेंट करव
- लघु कथा : पितर नेवता
- कबिता : चना-बऊटरा-तिवरा होरा
- आमा खाव मजा पाव
- ‘तुंहर जाय ले गीयां’
- छै महीना बर ‘दंगल’ होईस टैक्स फ्री
- लघु कथा संग्रह – धुर्रा
- दाई अऊ बेटी
- माटी के दियना
- 8 बछर के पाछू सुरता आईस टाटपट्टी घोटाला
- सुरता चंदैनी गोंदा के
- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य कविता
- मुख्यमंत्री ह प्रसिद्ध लेखक अउ पर्यावरणविद अनुपम मिश्र के निधन म शोक प्रकट करिस
- असमिया धुन मा छत्तीसगढ़िया राग, छत्तीसगढ़ मा होइस पहुना संवाद
- दान लीला के अंश : पं. सुन्दरलाल शर्मा
- संत कोटि के अलमस्त कवि बद्रीबिशाल परमानंद
- छत्तीसगढ़ी भासा के महत्तम
- घाम घरी आगे – कबिता
- पारंपरिक लोक गीत : मोर मन के मजूर
- सुन वो नोनी के दाई, आदमी
- राजा – नान्हे कहिनी
- साला छत्तीसगढि़या
