- किसान
- मक्खी-मच्छर मारो अभियान – कबिता
- नंदिनी केहेस त मोर गांव देमार – कहिनी
- उत्तर कांड के एक अंश छत्तीसगढी म
- मजदूर दिवस म कविता: मजदूर
- समारू के दु मितान कालू-लालू
- सवनाही : रामेश्वर शर्मा
- सरद्धा अउ सराद्ध
- छत्तीसगढी गोठ बात : जंवरा-भंवरा
- प्रभु हनुमान जइसे भगत बनना चाही
- कविता – सब चीज नंदावत हे
- छत्तीसगढी फिलिम अउ लोककला मंच के’दीपक’ शिवकुमार
- छत्तीसगढ़ के आसा, छत्तीसगढ़ी भासा
- कबिता: पइधे गाय कछारे जाय
- आल्हा छंद – नवा बछर के स्वागत करलन
- मेजाई के उपहार
- कविता – महतारी भाखा
- मया के अंजोर
- तंय उठथस सुरूज उथे
- अनुवाद : आशा के किरण (The Silver Lining)
- सुनिल शर्मा “नील” के दू कबिता : कइसे कटही जेठ के गरमी अउ हर घड़ी होत हे दामिनी,अरुणा हा शिकार
- महतारी के अंचरा
- घाम जनावत हे
- नोनी मन के खेलई कुदई ह हिरदे में मदरस घोलय
- गांव के सीतला
- नाग पंचमी के महत्तम
- छन्द के छ : उल्लाला
- मोर पहिली हवाई यात्रा
- गांव के गुरूजी – कहिनी
- आडियो फाईल
- बइगा के चक्कर – नान्हे कहिनी
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’
- चिनहा
- मेला जाबोन : महेन्द्र देवांगन “माटी” के गीत
- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य : सेल्फी कथा
- छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी ‘नाचा’
- छत्तीसगढ़ ला जनम दिन के बधई
- खेती किसानी
- धर ले कुदारी
- मनखे के भाव
- जाड़ अब्बड़ बाढ़त हे
- छत्तिसगढ़ के गंगा : हरि ठाकुर के गीत
- तन मन होगय चंगा
- मैं वीर जंगल के : आल्हा छंद
- देवारी बिसेस : हमर पुरखा के चिनहा ल बचावव ग
- दारू बंदी के रद्दा अब चातर होवत हे
- कती जाथन हमन
- दू पीढ़ी के लिखे अनमोल कृति
- सरसी छंद : जनकवि कोदूराम “दलित” जी
- शिवरात्री मनाबो – महादेव में पानी चढाबो
- पताल के भाव
- जय छत्तीसगढ़ महतारी
- आसो के जाड़
- जिनगी कइसे चलही राम
- सियान मन के सीख : ए जिनगी के का भरोसा
- मोर छत्तीसगढ़ के किसान
- व्यंग्य : गिनती करोड़ के
- सीला बरहिन नान्हें कहिनी – सत्यभामा आड़िल
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – ‘दाँव गवाँ गे’ अउ ‘जहर नइये’
- सरग हे जेकर एड़ी के धोवन
- हे गुरु घासीदास – दोहालरी
- मुर्रा के लाड़ू : नान्हे कहिनी
- सुकमा म एएनएम(आरबीएसके) अभ्यर्थि मन के काउंसलिंग 10 मार्च को
- किरीट सवैया : नाँग नाथे मोहना
- सेवा गीत : कोयली बोलथे
- का होही?
- हमर शिक्षा व्यवस्था
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘अगोरा’
- पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे के वेबसाईट
- राहट, दउंरी ‘दउंरहा’ अऊ चरका
- बसंत ल देखे बर सिसिर लहुटगे
- एकलव्य
- लघुकथा – नौकरी के आस
- नान्हे कहिनी – दहकत गोरसी म करा बरसगे
- पईसा म पहिचान हे
- चिकित्सा विज्ञान अउ अभियांत्रिकी विज्ञान के हिंदी म पुस्तक प्रकाशित करे के जरूरत : श्री टंडन
- बारो महीना तिहार
- मोर गांव म कब आबे लोकतंत्र
- कका के घर : छत्तीसगढ़ी उपन्यास
- अप्रैल फूल के तिहार
- नान्हें बियंग कहिनी: मोला कुकुर बना देबे
- अक्षय तृतीया विशेष : पुतरी पुतरा के बिहाव
- भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )
- कमरछठ कहानी : देरानी-जेठानी
- व्यंग्य : कुकुर के सन्मान
- बेटी के सुरता
- न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में असिस्टेंट के 984 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’
- छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के तीसर प्रान्तीय सम्मलेन 2015
- जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका लोकभाषा विशेषांक : छत्तीसगढ़ी
- एकलव्य के द्रोनाचार्य बनगे गांधीजी
- दोखही के दुख (लघु कथा)
- अवइया चुनाव के नावा घोसना पत्र
- गऊ माता ल बचाओ – सुख समृद्धि पाओ
- साक्षरता का अकासदिया – पुस्तक समीक्छा
- लिंग परिक्छन के परिनाम
- सहे नहीं मितान
- वृत्तांत (10) : जिनगी ह पानी के, फोटका ये फोटका
- इसरो में साइंटिस्ट/ इंजीनियर के 87 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित
- मोर गांव के फूल घलो गोठियाये : श्रीमती आशा ध्रुव
