सिसिर रितु, पतझड़ ल न्यौता दिस ‘आ अब तैं आ मैं दूसर जगह के न्यौता म जात हावंव। तोला इंहा बसंत के आय के तइयारी करना हे। प्रकृति ल अइसे संवार दे के बसंत आके देखय त नाचे ले लग जाय।’ भौंरा, तितली, कोयली सब कान दे के सुनत रहिन हे। पतझड़ ह जझरंग ले कूद परिस आमा के डारा म। आमा के रंग, रूप ल संवारे बर कुछ तो करना हे, ये सोचत पतझड़ ह ओला धियान लगा के देखिस। सिसिर कहिस ‘चल मैं चलत हावंव, तैं सब ल…
Read MoreYear: 2010
चल जाबो राजिम कुम्भ – कहिनी
माघी पुन्नी ले महाशिवरात्रि तक पन्दरा दिन बर हर साल राजिम के तिरवेणी संगम मं कुंभ मेला भरात हे। दुरिहा-दुरिहा के साधु संत ऋषि मुनि मन आए रथे ओकर मन के परवचन म अमरित बरसथे, नदिया के पानी मं नहाय बर कुण्ड बने हे, एमा नहाए ले मन ह पवित्र हो जथे, कहावत हे, के जइसे कौंवा मन के मरे के बेरा आथे त कासी मं जाके मरथे। जेन मनखे ह कोन्हो महानदी मं जाके मर जथे वोहा सीधा बैकुण्ठ लोक मं जाथे।” बिहनचे जुआर पारा के टुरा मन आगी…
Read Moreलड़ते पंचायत चुनाव
भइया बबा दीदी हो सुन लेवा मोरो नाव। तुहर मन के किरपा होतीस लड़ते पंचायत चुनाव पांच सौ रुपया देहुं तुमन ल काकी भौजी बर इलियास लुगरा। घर-घर जाय बर चालू करव खा-खा के देशी कुकरा॥ चेता देबे कका ल भइया अन्ते तन्ते बिछाथे। पइसा मांगही त पइसा देबो गाविन्दा कका बताथे॥ आज पारा के बइठक करवाहु परतेव सब बड़े-बड़े के पाव। बोकरा दारू खवातेव पियातेव लड़ते पंचायत चुनाव॥ पांच पेटी दारू मंगवाहू सौठन बनारसी सारी। एक साडी एक पऊवा एक घर म बाटे जाहू घर-घर के दुवारी॥ दुबराज धान…
Read More‘छत्तीसगढ़ के कलंक आय लोककला बिगड़इया कलाकार’
अनाप शनाप एलबम के सीडी म रोक लगना चाही: प्रतिमा पंडवानी गायिका प्रतिमा बारले संग विजय मिश्रा ‘अमित’ के गोठ बात छत्तीसगढ़ म लोककथा अउ लोकगाथा के भरमार हांवय। घर परिवार के डोकरी-डोकरा अउ सियान मन लइका मन ल लोककथा ल सुनावत-सुनावत बने-बने गुन के बीजा ल नोनी बाबू मन के दिल दिमाक म बों देथें। फेर लोकगाथा ल लइका-सियान एके संग मिलजुल के रात-रात भर चौपाल म बइठ के सुनथें। लोकथा ल साधारण मनखे घलो सुना सकत हे फेर लोकगाथा ल सुनाय बर बिसेस कलाकारी के गुन होना चाही।…
Read Moreसबले बड़े पीर
फोरा परे जे हाथ मे मिटगे हे लकीरपीरा के संसार में सबले बड़े पीर।सबले बड़े पीर लिख्रय देश के तकदीर।पीरा के संसार में … माथा ले चुचुवाय कतको कारी पछीनामिहनत संग जीना इंखर मिहनत हे मरना।बिपत संग खेले ये मन तक-धीन, धी-धीना,सीखे हे शंकर कस, करू-कासा ल पीना।पसिया ल पी खुद, खवाए दूसर ल खीर॥पीरा के संसार में … बड़े-बड़े बांध, महल, राज अउ राजधानी,मिहमत के देवता के बरनत हे कहानी।जोंते जांगर, कमाए, खेती अऊ किसानी,बहती धारा ल मोड़े, पथरा ल करे पानी।काट सके नई तभो ले, गरीबी के जंजीर॥पीरा…
Read More14 वां वार्षिक साहित्य सम्मेलन 2010
ये दिन हा कतका धन्य हे के 14 फरवरी 2010 दिन इतवार म महावर धरमसाला धमतरी के बडक़ा ठउर म छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति रायपुर (छत्तीसगढ़) के सवजन ले 14वां वार्षिक साहित्य सम्मेलन 2010 के आयोजन करे गिस। ये सम्मेलन के रद्दा सबो साहित्यकार जुन्ना अउ नवा सन देखत रहिथे। एक बछर पाछू अइसन समागम बने महत्तम के होथे। ये दिन जम्मो छतीसगढ़ी राज ले डेढ़ सौ साहित्यकार मन एक ठउर म सकला के अपन-अपन गरिमामय उपस्थिति के संग अइसे लागत राहय जइसन हमर साहित अगास म चंदैनी मन जग-जग, झग-झग…
Read Moreनेता टेकनसिंह कहाय के सऊक
एसो के चुनई म महूं खड़े हावंव अऊ ये गांव के जम्मो वोट हा मोला मिलना चाहिए। ये बुता ल मेंहा आज ले तोला सौंपत हंव। काबर अब वोट डारे बर सिरिफ दस दिन बांचे हाबे। ऐती बर अब्बड़ अकन गांव किंजरे बर घलो हाबे। हो सकत हे कहूं अऊ आय बर नई मिलही। ये कागज पथरा ल धर, मोला फटफटी छाप मिले हाबे, बने सबो घर किंजर-किंजर के बता देबे। माइ पिल्ला गांव भर के मनखे मन इही फटफटी छाप म वोट डारहीं तब बनही जी, तोला काहीं कुछु…
Read Moreसलंग गे देवारी
”लइका के पीरा कतेक अऊ कइसे होथे बनवाली ले जादा बहुत कमेच्च जानथे। दूसर बिहाव के चरमुड़िया राग बनवालीच करा तीन साल ले अटके रिहिस लइका आय के होही ते आबे करही। पांच बरस पाछू अपन दाई ल 26 घंटा पीरा खवाके पहलात गुड्डुराजा आईस। रात भर पाछू खांसी म टेटका होगे, कतकोन बेर खांसत सांस छुटे कस हो जाय।” बीते देवारी मं हितेश अपन हात ला फटाका मं जरो डारे रिहिस अऊ दीपेश के गाल, सितेश के माथा मं दाग पर गेय रिहिस। फेर ओमन ला तो अपन तमंचा-टिकली…
Read Moreमया के गीत
नदिया नरवा मा बोहावत हे पबरित मया के गीत हरियर भुइंया म लहरावत हे पबरित मया के गीत। बनिहारिन गुनगुनावत हे खेत म मुचमुचा के… मंडल गरीब मिलके गावत हे पबरित मया के गीत। सीतला दाई के ठंडई म बाड़हत हे दया मया… बइरी मन ल मीत मनावत हे पबरित मया के गीत। कोयली निक सुर म सोरियावत हे आमा डार म… सुग्घर जिनगी म पहावत हे पबरित मया के गीत। जय होवय छत्तीसगढ़ दाई जम्मो लइका कहत हन… चारो कोती धूम मचावत हे पबरित मया के गीत। चम्पेश्वर गोस्वामी…
Read Moreभाव के विचरन- नौ रस ले मन तक
पुस्तक समीक्छा ‘राम पियारी म दुर्गा जागीस’ छत्तीसगढ़ी कहानी संगरह म नारी के मन के बात हावय। एक पुरुष नारी के रूप म अपन महतारी ल देखथे। ओखर मन के पीरा, खुसी, दु:ख-दरद म, एक प्रौढ़ पुरुष, एक किशोर, एक लइका हर दिन ओखर संग रहिथे। अऊ इही म जीथे। बिहाव के बाद एक नारी गोसइन के रूप म अउ जुर जथे। येखर दु:ख पीरा के रंग अलग होथे। मां के पीरा अऊ खुसी के संग लइका दुनिया ल समझथे। अपन तीर- तार के नता, रिस्ता के किस्सा ल सुनथे…
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