’लोक साहित्य म लोक प्रतिरोध के स्वर’ बर रचना आमंत्रित हे

साकेत साहित्य परिषद् सुरगी ह पीछू पंदरह बरस ले सरलग अपन सालाना कार्यक्रम म कोनों न कोनों महत्वपूर्ण विषय ल ले के विचार गोष्ठी के आयोजन करत आवत हे। निर्धारित विषय ऊपर केन्द्रित स्मारिका के प्रकाशन घला करे जाथे। विषय विशेषज्ञ के रूप म आमंत्रित विद्वान मन गोष्ठी म विचार मंथन करथें। इही सिलसिला म 23 फरवरी 2014 में गंडई पंडरिया म छत्तीसगढ़ी हाना ल ले के विचार गोष्ठी के आयोजन करे गे रिहिस। गोष्ठी म डॉ.विनय पाठक, डॉ.गोरेलाल चंदेल, डॉ.जीवन यदु, डॉ.पीसी लाल यादव, डॉ.दादूलाल जोशी जइसे विद्वान मन के अनमोल विचार…

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करगा – [लघु-कथा संग्रह ] समीक्षा

छत्तीसगढी – महतारी ला धनी – मानी बनाए के उजोग मा कतेक न कतेक वोकर सेवक मन लगे हावैं । वोमन साहित्य के जम्मो विधा म अपन लेखनी ला चलावत हावैं । एकरे गुरतुर फल देखे बर मिलत हे कि आज छत्तीसगढी – भाखा म साहित्य – लेखन के जम्मो विधा म , एक ले आगर एक कृति – मन छपत जात हावैं , फेर आज के जुग हर ” स्मार्ट – जुग ” ए , जतका छोटे मा परफॉरमेंस मिल जावय , वोतके बढिया लागथे । जादा पढे बर…

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नाचा के सियान : भुलवाराम यादव

भुलवाराम दुर्ग के तीर रिंगनी गांव के अहीर रहिस। भुलवाराम लइकई ले अपन गांव म मालगुजार, गौंटिया मन के गरूवा चरइ अउ गोबर-कोठा के काम करय। जब लइका भुलवा गरूवा चराये बर निकलय त बंसरी संग करमा-ददरिया के गीत गावय अउ सिम-साम देखके बिधुन होके नाचय। भुलवा के नचई अउ गवइ ला देख के नामी पंडवानी गायक पूनाराम निषाद के पिताजी लक्ष्‍मण निषाद अउ नामी गम्‍मतिहा ठाकुरराम के पिताजी गोविन्‍दराम मन ओला खड़े साज नाचा म परी बना के नचवाये लागिन। ओ समय भुलवा के उमर आठ साल के रहिस।…

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बड़े दाई

होवत बिहनिया गांव सन्न होगे, बड़े दाई नई रहीस सुनके मोर माथा सुखागे। बड़े दाई के सांवर चेहरा, लटी बंधाये पोनी कस फक्क सफेद बाल, अइसे लागय जइसे पटवा के रेसा के गट्ठा ल बड़े दाई ह अपन मुंड़ म खपल लेहे। ओकर बड़े – बड़े गोटारन कस आंखी मोर आंखी म झलकगे। भरे तरिया के पानी कस लहरा मारत बड़े दाई मोर आंखी म घेरी – भेरी झूले लागिस। मोर कान ल भरमा भूत धर लिस – बड़े दाई मोर नांव ल लेके बलावत हे का ? गजब दिन बाद…

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छत्तीसगढ़ी लोक म हनुमान

हनुमान जी ह हमर छत्तीसगढ़ के बड़का देंवता आय. हमर छत्तीसगढिया मनखे मन के हिरदे म हनुमान जती के अड़बड़ सरधा अउ मान सन्नमान हावय. हनुमान जी ह अकेल्ला अइसे देंवता आंय जउन ह अपन बल के खातिर अनार्य मन बर पूजित रहे हें अउ बुद्धि, विवेक संग राम जी के भगति के खातिर आर्य मन के घलव बड़का देंवता के रूप म प्रतिष्ठा पाये हें. राम ले जादा राम के भगत के महत्ता के सेती हनुमान जी ह हिन्दू मन के आराध्य देव के रूप म जन मन म…

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चुनई दंगा

-1- चुनई आगे, गुर के पाग पागे, बड़का तिहार लागे, गरीबहा के भाग जागे। बोकरा सागे, गांव भर मा पटागे, सुखरू हर मोटागे, कमजोर मन पोठागे।। हाथ जोड़ागे, जन गन ठगागे, मनखे मन मतागे, कोलिहा मन अघवागे। बतर आगे, बतरकिरी भागे, सुख्‍खा नांगर जोतागे, लागथे बिहान पहागे।। पिरीत लागे, भड़वामन आगे, गांव मड़वा छवागे, बने बने मन रोगागे। चुनई आगे, गुर के पाग पागे, बड़का तिहार लागे, गरीबहा के भाग जागे।। -2- हाथ सफाई, भगवा सादा भाई, सत्ता की दूध मलाई, दूनों बांट बांट के खाई। खेल खेलाई, हम है…

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मसखरी : देवता मन के भुतहा चाल

गोठ कई रंग के होथे, सोझ-सोझ गोठ, किस्सा कहानी, गोठ, हानापुर गोठ, बिस्कुटक भांजत गोठ, बेंग मारत गोठ, पटन्तर देत गोठ, चेंधियात गोठ, हुंकारू देवावत गोठ, ठट्ठा मढ़ावत गोठ, मसखरी ह मसखरिहा गोठ आय। येहू ह मौका कु मौका म काम देथे। केयूर भूषण जी ह येला एक अलग विधा के रूप म स्थापित करे हावय। मसखरी ह व्यंग्य विद्या ले थोरक अलग हावय। जब अइसे लागथे के मोर गोठ म सुनके आगू वाला ह मंतिया झन जाय तब ठट्ठा मसखरी मढ़ावत सिरतोन के गोठ ल गोठिया ले। अब तो…

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गरीबनवाज ला गरीब के पाती

हे अमीर मन के आनन्ददाता भगवान लाख-लाख पैलगी आसा हे के तुमन क्षीरसागर मा बने मंजा के सुते होहू अउ लछमी माता हर तुंहर चरणारबिन्दु ला हलु-हलु चपकत होहीं। तेखरे सेती ये मिरतुलोक मा का का अनियाव होवत हे तेखर तुंहला थोरको आरो नई हे। देवर्षि नारद घलो के तमूरा सुनई नई देवत हे, कोन जनी उहू कोनो ठऊर मा सुस्तावत होहीं। नहिं तो, ओ हर पृथ्वी लोक के कहूं चक्कर लगातीन, अऊ कहूं इहां के हाल तुंहला बतातीन त तुमन अभी तक कई खेप ये धरती मा अधरम के…

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बियंग : बिहतरा बाजा अउ बजनिया

बीच दुआरी म ठाढ़े बजनिया मन के बाजा के सुर लागे राहे। उंखर पोसाक ह देखेच के लाइक राहै। कोन्हों हर हाफ पैंठ पहिरे राहे त कोन्हों ह फुल पैंठ। कोन्हों कुरता त कोन्हों सेंडो। एक झन के पैंठ के पाछू कथरी सूत के टांका ल देख के अइसे लागै जइसे अभीच-अभी मरीज ल ‘आपरेशन थियेटर’ ले निकाले हावे। बिहतरा सीजन म बाजा ले जादा बजनिया के भाव बाढ़े रथे अउ बाजा बिना बिहाव म मजा आय घला नहीं। सबो के सउंख उमियाह रथे बाजा बर। बिहाव म होइस बाजा,…

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लव इन राशन दुकान

पिक्चर देखइया मन मोला गारी देवत होहू के लव इन टोकियो, लव इन पेरिस- असन महूं हा लव इन रासन दुकान- शीर्षक में लिख दे हौं, फेर का करबे घटना ओइसनेच हे, के मोला लव इन रासन दुकान लिखे बर परगे। दू साल पहिली के फ्लैशबुक आप मन ला लेगत हौं। रासन के दुकान के लाइन में माटी तेल ले बर अपन लाइन में एक लड़की अउ अपन लाइन में एक लड़का खड़े राहय। दूनो झन आजू-बाजू एके सोझ में होगे राहयं। दूनो झन पहिली एक-दूसर ला देख के मुस्कइन,…

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