कमरछठ कहानी (6) – सोनबरसा बेटा

वीरेन्द्र सरल एक गांव में एक झन गरीब माइलोगन रहय। भले गरीब रिहिस फेर आल औलाद बर बड़ा धनी रिहिस। उहींच मेरन थोड़किन दूरिहा गांव में एक झन गौटनीन रहय। ओखर आधा उमर सिरागे रहय फेर ओहा निपूत रहय। एक झन संतान के बिना ओखर जिनगी निचट अंधियार रहय। एक समय के बात आय। गरीबिन घर एक झन मंगन जोगी आइस। ओ समें गरीबिन फेर अम्मल में रिहिस। जोगी किहिस-बेटी! तैहा बड़ा किस्मत वाली अस। ये पइत तो तोर घर सउंहत भगवाने अवतरही। तोर अवइया बेटा ह घातेच गुणी होही।…

Read More

झंडा फहराबो

हमर देश होईस अजाद, आजे के दिन, आवव संगी झूमे नाचे बर जाबो। जगा जगा झंडा फहराबो, अऊ आरूग तिहार मनाबो। लईका लोग अऊ सियान, सुन ग मोर मितान, संसकिरती अऊ माटी के, मान ल सुग्घर बढ़ाबो। हमर सियान के सियानी रद्दा म, सोजे सोज जाबो। अतलंगी करैया मनखे ल, मया के भाखा सिखाबो। पुरखा के हमर सपना ल, मिर जुर के संजोबो। जग जग ले होवय ऊँजयारी, झन रहाय कोनों मुड़ा अंधियारी। कोनों मत रहाय फाका म, ककरो मत होवय लचारी। सिरतोन म अईसन, आरूग तिहार मनाबो, अऊ जगा…

Read More

छत्तीसगढ़ी म छंद बरनन के पहिली किताब

लिखित साहित्य में अपन अनुभव ल बांटे बर पद्य अउ गद्य के उपयोग करे जाथे। जेमा पद्य के उंचहा मान हवय, पद्य ल गद्य के कसौटी तको कहे गए हे। तेखरे खातिर दुनिया के अलग अलग भाखा के साहित्यप मन म पद्य विधा ह सबले पहिली अपन जघा बनाए हे अउ लोक के कंठ म समाये हवय। पद्य के अपन स्वयं के गुन अउ विसेसता होथे जेखर सेती पद्य म लिखे अभिव्यसक्ति ल जन मानस ह लउहे समझथे अउ वोला गीत के रूप म अपन कंठ म बसा लेथे। आप…

Read More

छत्तीसगढ़ी भासा के महाकाव्यकार

महाकवि कपिलनाथ कस्यप महा कवि कपिलनाथ कस्यप हमर देस के आजाद होय के पहली जनम लेइन अउ बरिस 1985, 2 मार्च के देहावसान होइस, बीसवीं सदी के उन एक साधारण अचरचित साहित्यकार रहिन उन समाचार पत्र-पत्रिका म अपन नाम छपय एकर ले परहेज करत रहिन जबि उन राष्ट्रीय कवि मैथिलीसरन गुप्त के समकालिन कवि रहिन। छत्तीसगढ़ी भासा ल एक मानकरूप म लाये म उन तीन ठन महाकाव्य ‘श्री राम कथा’, ‘श्री कृस्नकथा’, ‘महाभारत’ अउ ‘श्रीमद् भागवत गीता’ (छत्तीसगढ़ी भावानुवाद) के रचना कर अपन प्रतिभा ला बताईन -छत्तीसगढ़ के महाकवि कहाइन…

Read More

मोर गांव के फूल घलो गोठियाये : श्रीमती आशा ध्रुव

मोर गांव के फूल घलो गोठियाये। बड बिहनियां सूरूज नरायन मया के अंजोर बगराये। झुमे नाचे तरियां नदिया फूले कमल मुसकाये। नांगर बईला धर तुतारी मोर किसनहा जाये। मोर गांव के फूल घलो गोठियाये…… मोगरा फूले लाई बरोबर मोती कस हे चक ले सुघ्घर कुआं पार बारी महमहाये तनमन ला ये ह सितलाये। उंच नीच के डोढगा पाट ले अंतस मन ला कर ले उज्जर। मोर गांव के …….. गोंदा फूले पिवरा पिवरा पाटी मार खोपा मा खोचे। चटक चदैंनी अंगना मा बगरें खूंटधर अंगना ह लिपाये। पैरी बाजे रूनुक…

Read More