छत्तीसगढ़ ल धान के कटोरा कहे जाथे । काबर इंहा धान के फसल जादा होथे ।इंहा के जादातर मनखे मन ह खेती के काम करथे । किसान मन ह अपन खेत में हरियर हरियर धान पान ल देख के हरेली तिहार मनाथे । हरेली तिहार के बाद से छत्तीसगढ़ में बहुत अकन तिहार मनाये जाथे । ओमे से एक परमुख तिहार कमरछठ भी हरे । कमरछठ ल महिला मन अपन लोग लइका के सुख सांति अऊ समरिदधि के खातिर मनाथे । भादो महिना के अंधियारी पांख के छठ के दिन कमरछठ मनाय…
Read MoreYear: 2017
मोर हतिया झन करवाबे दाई
मोर हतिया झन करवाबे दाई तोर बेटी अंव। दाई तोर बेटी अंव बाबू तोर बेटी अमल। मोला पेट में झन कटवाबे, दाई तोर बेटी अंव। बाबू तोर बेटी अंव. तोर गरभ ले जनम लेहूं दाई, खेलहूं बाबू के कोरा। अंगना में तोर किलकारी देहूं, खेलहूं चुकी पोरा। भारत भुईयां में जनम धरे के मन मा मोरो साध. दाई तोर बेटी अंव बाबू तोर बेटी अंव। मोर हतिया झन करवाबे… आज के बेटी पढ़ लिख दाई, जज इंजीनियर बनगे। रेल गाड़ी अऊ जिहाज हा दाई, बेटी मन ले चलगे। फउजी बनके…
Read Moreहमर बहू – विष्णु पद छंद
कहाँ जात हस आतो भैया,ले ले सोर पता। अब्बड़ दिन मा भेंट होय हे,का हे हाल बता। घर परिवार बहू बेटा मन,कहाँ कहाँ रहिथें। नाती नतनिन होंही जेमन,बबा बबा कहिथें। अपन कहौ हमरो कुछ सुनलौ,थोकुन बइठ जहू। बड़ सतवंतिन आज्ञाकारी,हमरो हवय बहू। बड़े बिहनहा सबले पहिली,भुँइ मा पग धरथे। घर अँगना के साफ सफाई,नितदिन हे करथे। नहा खोर के पूजा करथे,हमर पाँव परथे। मन मा सुग्घर भाव जगाथे,पीरा ला हरथे। हमर सबो के जागत जागत,चूल्हा आग बरे। दुसरइया तब हमर तीर मा,आथे चाय धरे। पानी गरम नहाये खातिर,मन चाहा मिलथे।…
Read Moreआऊटसोरसिंग
[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”] मंगलू अऊ बुधारू खुसी के मारे पगला गे रहय। लोगन ला बतावत रहय के, हमर परदेस के किरकेट टीम ल रनजी टराफी म खेले के मउका मिलगे। गांव के महराज किथे – ये काये जी ? एमा खुस होये के काये मतलब हे ? सरकार ल खुस होना चाही। किरकेट के समान बेंचइया अऊ खेलइया ल खुस होना चाही। बुधारू कहत रहय – हमर बेटा मन कालेज के बड़े किरकेट खेलाड़ी आय, ऊंखर खेल ल देखके, ऊंखर चयन, परदेस के टीम म होवइया…
Read Moreकाबर सूना हावय कलाई
भैया तैं मां के सेवा करथस दिन अउ रात मन मा लुका रखे हंव मैं हा कोनो भी हो बात कछु भी नई कहस तैं हर कतको हो आघात खुष रइबे मां के सेवा में चाहे कठिन होवय हालात हम सबके रक्षा में भाइ्र्र सुना हावय कलाई अमन शांति होवय जग मा झन होवय लडाई भारत माता के छंइहा मा काबर सुना हावय कलाइ्र्र दुष्मन के घर घलो माता हावय हावय बच्चा अउ बुढवा बहिनी ला बस ये कहना हे तैं हर हमर दुलरूवा वो चल के गिरना तोर हमन…
Read Moreराखि तिहार
बहिनी कोखरो नई हे ता जीवन बेकार हे अक्षुन्य विष्वास हावय जहां ओखरे नाम राखि तिहार ए मॉं के ममता अउ पिता के दुलार हे बहिनी के बकबक हे जहां ओखरे नाम राखि तिहार ए जीवन के कोनो मोड़ मा अनुराग मिले बेषुमार हे कृति में केंद्रित हावय मनुजत्व जहां ओखरे नाम राखि तिहार ए बहिनी के डोली के सपना अब मोर उपर उधार हे बिदाई के आषु हावय जहां ओखरे नाम राखि तिहार ए बुढवा मन के लउठी बनना हम सबों के संस्कार हे आंखि मां आतुरता हावय जहां…
Read Moreराखी के आगे तिहार
राखी के आगे तिहार मोर भईया, राखी के आगे तिहार। जल्दी आबे अबेर झन करबे, बईठे रहूं मंय तियार। मोर भईया राखी के आगे तिहार… भाई बहिनी के दया मया बर,ये तिहार हा आथे। भईया बहिनी के रक्षा करथे,रक्षा बंधन कहाथे। भाई येहा डोरी नोहय,हरय मया दुलार। राखी के आगे तिहार.. भईया रहिथे मोर ले दुरिहा,मंय रहिथंव परदेश। मोर मंयारू भईया लेवत रहिथे,मोर सोर संदेश। तीजा पोरा मा जम्मो झन सकलाबो,बाढ़थे मया दुलार। राखी के आगे तिहार.. लईका पन के सब्बो संगवारी,अभी ले सुरता आथे। खेलन कूदन पढ़न लिखन,रहि रहि…
Read Moreमया-दुलार:राखी तिहार
मया, दया अउ दुलार के चिन्हार राखी तिहार। राखी तिहार ला रक्छा बंधन के नाँव ले हमर देश भर मा सावन पुन्नी के दिन मनाय जाथे। राखी तिहार हा भाई-बहिनी के तिहार माने जाथे। ए दिन हर बहिनी मन हा अपन भाई मन के कलई मा राखी बाँध के ओखर लम्बा अवरदा के असीस माँगथे। एखर बदला मा भाई मन हा अपन बहिनी के हमेसा रक्छा करे के वचन देथे। रक्छा के बचन के संगे-संग अपन-अपन हिसाब ले बहिनी मन ला उपहार दे के तिहार राखी तिहार हा हरय। ए…
Read Moreभाई -बहिनी के तिहार – राखी
(राखी तिहार विशेष) भाई बहिनी के सबले पवित्र तिहार हरे राखी ह। बचपन में भाई बहिनी मन कतको लड़ई झगरा होत राहय, फेर राखी के दिन ओकर मन के प्रेम ह देखे बर मिलथे । राखी तिहार के अगोरा भाई बहिनी दूनो झन मन करत रहिथे। कब मनाथे – राखी के तिहार ल सावन महिना के पूरनिमा के दिन मनाय जाथे ।ए दिन भाई बहिनी मन बिहनिया ले नहा धो के तईयार हो जाथे ।भगवान के भी पूजा पाठ कर ले थे ओकर बाद बहिनी मन ह रोली, अकछत, कुमकुम…
Read Moreआगे सावन रे
आगे सावन रे बादर हा बाजे ना। हो बरखा रानी के संग संग मा पवन हा नाचे ना। हो बरखा रानी के संग संग.. झर झर झर झर झरना झरगे,भरगे ताल तलैया। कुहू कुहू बन कोइली बोले,गावत हे अमरइया। परबतिया नाचे सबो नंदिया गावे ना। हो बरखा रानी के संग … खल खल खल खल नंदिया भरगे,नरवा मन उतराय। खलबल खलबल कर जावे सब सागर में मिल जाय। मंजूर नाचे रे तीतूर गावे ना। हो बरखा रानी के संग… हिरनी हिरन खुसी मनावे,बधवा के जी जुडा़य। हाथी हथनी पानी पी…
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