सावन महिना में शिव , सावन अऊ सोमवार के विशेष महत्व हे । एकरे पाय छोटे से लेकर बडे़ तक सावन सोमवारी ल मनाथे । सावन महिना के सोमवार के पूजा अऊ उपवास करे से भगवान शिव ह जल्दी प्रसन्न होथे । ये व्रत ह बहुत ही शुभदायी अऊ फलदायी होथे । सावन मास में शिव के पूजा करे से 16 सोमवार व्रत के समान फल मिलथे । भगवान शंकर के विधि विधान से पूजा करे से घर में सब परकार के सुख शांति अऊ लछमी के प्राप्ति होथे ।…
Read MoreYear: 2017
भगवान शंकर के अनेक नाव
सावन आ गे संगवारी हो, ये मौसम धरती बर जरूरी हे । किसान मन बर जरूरी हे ।ये पूरा महिना हर भगवान शंकर के भी मन पसंद हे । “देवों के देव”महादेव के पूजा अराधना के बेरा हवे,हमार कतको संगी मन कांवर बोह के जल अरपन करे बर जाथे रेंगत रेंगत, अउ कतेक बहिनी मन उपास घलाव रहिथें। भगवान शंकर ला बेल पान आंक के फूल, धतूरा के फूल, फल, कच्चा दूध, जल, गंगा जल अरपन करे जाथे। ऐ सब जिनिस हर भगवान शंकर के मनपसंद हवे। भगवान के बहुत…
Read Moreबम बम भोले
हर हर बम बम भोलेनाथ के , जयकारा लगावत हे । कांवर धर के कांवरिया मन , जल चढाय बर जावत हे । सावन महिना भोलेनाथ के, सब झन दरसन पावत हे । धुरिहा धुरिहा के सिव भक्त मन , दरस करे बर आवत हे । कोनों रेंगत कोनों गावत , कोनों घिसलत जावत हे । नइ रुके वो कोनों जगा अब , भले छाला पर जावत हे । आनी बानी के फल फूल अऊ , नरियर भेला चढावत हे । दूध दही अऊ चंदन रोली , जल अभिसेक करावत…
Read Moreकान्हा मोला बनादे : सार छंद
पाँख मयूँरा मूड़ चढ़ादे,काजर गाल लगादे| हाथ थमादे बँसुरी दाई,मोला किसन बनादे | बाँध कमर मा करधन मोरे,बाँध मूड़ मा पागा| हाथ अरो दे करिया चूड़ा,बाँध गला मा धागा| चंदन टीका माथ लगादे ,ले दे माला मूँदी| फूल मोंगरा के गजरा ला ,मोर बाँध दे चूँदी| हार गला बर लान बनादे,दसमत लाली लाली | घींव लेवना चाँट चाँट के,खाहूँ थाली थाली | दूध दहीं ला पीयत जाहूँ,बंसी बइठ बजाहूँ| तेंदू लउड़ी हाथ थमादे,गाय चराके आहूँ| महानदी पैरी जस यमुना ,कदम्ब कस बर पीपर | गोकुल कस सब गाँव गली हे…
Read Moreभगवान शंकर ला का का अर्पन करे जाथे
भगवान शंकर ला सबले अधिक भांग हर भाथे..,भांग अउ गांजा भगवान ला चढाऐ जाथे । कहे जाथे ना कि लोहा ला लोहा हर काटथे । ,जहर ला जहर काटथे..।.विषपान तो कर लिन संसार ला बचाये बर., फेर ओकर ताप हर तो रहबे करही ।ओ ताप ला थिराही कहिके..भांग, धतुरा,अउ आंक ला चढाथे । फेर शीतलता मिलही कहि के अनेक चीज चघाथें भक्त मन , जइसे..दूध,दही,शहद,गन्ना के रस,जल ऐ सब हर शीतल करथे । संसार ला गंगा के दर्शन कराईन ए पाय के गंगा जल चघाय जाथे…! फेर अउ जिनिस हवे…
Read Moreचल ना रे कांवरिया
चल ना रे कांवरिया, चल कांवर ल धरले। सिका-जोंती चुकिया में,गंगा जल भरले।। चल ना रे कांवरिया……………………. सावन के महीना हावै,शिव शंभु दानी के। कर सेवा मन भरके,कांवर ले कमानी के।। हर-हर बम भोले बाबा,पावन काम करले। चल ना रे कांवरिया…………………….. छोटे-बड़े सबो जाथे ,भोले के दरबार में। गिरे-अपटे मनखे मन, खड़े हे दुवार में।। जउने आसा करबे पाबे, बेल पतरी लेले। चल ना रे कांवरिया……………………. भोला के मंदिरवा लगे,भगत मन के मेला। दुरिहा ले कांवर धरे ,आवत, धरे भेला।। ॐ नमः शिवाय, बोधन राम तहुँ जपले। चल ना रे…
Read Moreकिसान
रदरद रदरद गिरगे पानी, चूहे परवा छानी । ठलहा काबर बइठे भइया, आगे खेती किसानी । ये गा किसान, कर ले धियान चलव खेत चलव गा । नांगर जुवाड़ी ल जोर के भइया, धर ले बिजहा धान । अदरा अदरा बइला हावय, होथे हलाकान । अब होगे बिहान , जल्दी उठव किसान चलव खेत चलव गा । झउहा रापा कुदारी धर के, चलव दीदी लइका सियान । खातू गोबर ला खेत मा डारव,खनव दूबी कांद ।। बांधव मेड़ बंधान, करव मेहनत जी जान चलव खेत चलव गा।। राहेर कोदो कुटकी…
Read Moreभोले बाबा : सार छंद
डोल डोल के डारा पाना ,भोला के गुन गाथे। गरज गरज के बरस बरस के,सावन जब जब आथे। सोमवार के दिन सावन मा,फूल दूब सब खोजे। मंदिर मा भगतन जुरियाथे,संझा बिहना रोजे। कोनो धरे फूल दसमत के ,केसरिया ला कोनो। दूबी चाँउर छीत छीत के,हाथ ला जोड़े दोनो। बम बम भोला गाथे भगतन,धरे खाँध मा काँवर। भोला के मंदिर मा जाके,घूमय आँवर भाँवर। बेल पान अउ चना दार धर,चल शिव मंदिर जाबों। माथ नवाबों फूल चढ़ाबों ,मन चाही फल पाबों। लोटा लोटा दूध चढ़ाबों ,लोटा लोटा पानी। सँवारही भोले बाबा…
Read Moreहमर हरेली तिहार
[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”] हमर हिन्दू धरम मा बच्छर भर के पबरित महीना सावन ला माने गे हे। भक्ती, अराधना, आस्था अउ बिसवास के पावन महीना सावन हा कहाथे। असाढ़ महीना हा जेठ के जउँहर जीवलेवा गरमी ले अधमरा अउ अल्लर परे जम्मों जीव जगत ला हबेड़ के उठाथे। सावन महीना धूमधाम ले आके सबो परानी मन के तन मन के पियास ला बुझाथे। सावन महीना सुग्घर रिमझिम फुहार ले खुशी के बिरवा ला पोसथे। चारो खूँट धरती दाई के कोरा हा हरियर-हरियर भर-भर दिखे ला धर…
Read Moreबरसात : गीतिका छंद
आज बादर बड़ बरसही,जाम कस करियाय हे। नाच के गाके मँयूरा ,नीर ला परघाय हे। भर जही अब ताल डबरी,एक होही खोंचका। दिन किसानी के हबरही, मन भरे ये सोच गा। ढोड़िया धमना ह भागे,ए मुड़ा ले वो मुड़ा। साँप बिच्छू घर म घूँसे,डर हवय चारो मुड़ा। बड़ चमकथे बड़ गरजथे,देख ले आगास ला। धर तभो नाँगर किसन्हा ,खेत रचथे रास ला। देख डबरा भीतरी ले, बोलथे बड़ मेचका। ढेंखरा उप्पर चढ़े हे , डोलथे बड़ टेटका। खोंधरा जाला उझरगे,रोत हावय मेकरा। टाँग डाढ़ा रेंगथे जी,चाब देथे केकरा। तीर मा…
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