श्रद्धांजलि – गीत संत: डॉ. विमल कुमार पाठक

हमर जइसे कबके उबजे कोलिहा का जाने खलिहान मन के सामरथ म डॉ. विमल कुमार पाठक के व्यक्तित्व अउ कृतित्व के उपर बोलना आसान नइ हे. तभो ले हम बोले के उदीम करत हन आप मन असीस देहू. एक मनखे के व्यक्तित्व के महत्व अउ ओखर चिन्हारी अलग अलग लोगन मन बर अलग अलग होथे. इही अलग अलग मिंझरा चिन्हारी ह ओखर असल व्यक्तित्व के चित्र खींचथे. जइसे हमर मन बर ‘राम‘ ह भगवान रहिस त केवटराज बर ‘पथरा ला मानुस बनईया चमत्कारी मनखे‘, परसराम बर धनुस ला टोरईया लईका..…

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तलाश अपन मूल के

आज आसाम के दुलियाजान ले सुभाष कोंवर जी के फोन आये रिहिस। मार्च म रइपुर आये के बाद ले सुभाष के बैचैनी थोरकन ज़ादा बाढ़ गे हे। बेचैनी का बात के, अपन पुरखा मन के गांव अउ खानदान ल जाने के। सुभाष पहली घव मार्च 2017 म छत्तीसगढ़ आये रिहिन रइपुर म आयोजित पहुना संवाद म शामिल होये बर। पहुना संवाद के जुराव छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग करे रिहिस, आज ले तकरीबन डेढ़ सौ साल इंहा ले कमाए खाये बर असम गे अउ फेर उन्हें बस गेय छत्तीसगढ़िया मन…

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मजदूर दिवस म कविता: मजदूर

पसीना ओगार के मेंहनत करथे दुनिया ल सिरजाथे रात दिन मजदूरी करथे तब मजदूर कहाथे । नइ खाये वो इडली डोसा चटनी बासी खाथे धरती दाई ल हरियर करथे माटी के गुन गाथे । घाम पियास ल सहिके संगी जांगर टोर कमाथे खून पसीना एक करथे तब रोजी रोटी पाथे । बिना मजदूर के काम नइ चले दुनिया ह रुक जाही जब तक मेंहनत नइ करही त कहां ले विकास हो पाही । महेन्द्र देवांगन “माटी” पंडरिया जिला — कबीरधाम (छ ग ) पिन – 491559 मो नं — 8602407353…

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मंजूरझाल : किताब कोठी

तीरथ बरथ छत्तीसगढ म, चारों धाम के महिमा अन्न-धन्न भंडार भरे, खान रतन के संग म पावन मन भावन जुग-जुग गुन गावा अंतस किथे लहुट-लहुट ईंहचे जनम धरि — गुरतुर भाखा छत्तीसगढी — दया-मया के बस्ती बसइया ल कहिथें छत्तीसगढिया । छत्तीसगढी हे गुरतुर भाखा, मनभावन ये बढिया ।। चुहुक-चुहुक कुसियार के रस म, जीभन जउन सुख । अड्डसन हे दुध भाखा मनखे के मान बढाथै ।। भूखन के हे भूख मिटइया अन्न म भरे जस हंड्रिया । छत्तीसगढी हे गुरतुर भाखा, मनभावन ये बढिया ।। कुरिया भीतर गोठियाथै जांता,…

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छन्द के छ : एम.ए.छत्तीसगढी के पाठ्यक्रम मा जोडे जाना चाही

निगम जी के “छन्द के छ’ पढे बर मिलीस। पिंगल शास्त्र के जानकारी देवइया किताब ल महतारी भाखा म पढ के मन आल्हादित होगे। आज के लिखइया मन छन्द के नाम ल सुन के भागथे अइसन बेरा म छत्तीसगढी साहित्य ला पोठ करे खातिर निगम जी पोठ काम करे हवय। छन्द ला समझाये खातिर निगम जी ह सबले पहिली – अक्षर, बरन, यति, गति, मातरा, डांड अउ चरन (सम चरण, बिषम चरण), लघु (1) गुरू (5) काला कहिथे? तेला बिस्तार ले समझाये हे। मातरा ला कइसे गिने जाथे? मातरा ल…

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सवच्छ भारत अभियान

गांव ला सवच्छ बनाये के सनकलप ले चुनई जीत गे रहय । फेर गांव ला सवच्छ कइसे बनाना हे तेकर , जादा जनाकारी नी रहय बपरी ल । जे सवच्छता के बात सोंच के , चुनई जीते रहय तेमा , अऊ सासन के चलत सवच्छता अभियान म बड़ फरक दिखय । वहू संघरगे सासन के अभियान म । अपन गांव ल सवच्छ बनाये बर , घरो घर , सरकारी कोलाबारी बना डरीस । एके रसदा म , केऊ खेप , नाली , सड़क अऊ कचरा फेंके बर टांकी …। गांव…

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हिम्मत हे त आघु आ

लुकाके काबर चाबथच रे कुकुर हिम्मत हे त आघु आ, देखथँव के दाँत हे तोर जबङा में लुकाके तैं झन पुछी हला। मुसवा कस खुसरके बिला म शेर ल झन तै ताव देखा,, लुकाके काबर चाबथच रे कुकुर हिम्मत हे त आघु आ।। खात बुकबुकी मारत हे तुमला घर अँगना ले भटके हव, तीन सौ कुकुर ह जुरयाके पचीस झन शेर ल हटके हव। कुकुर तै मरबे कुकुर के मउत अपन बहादुरी झन जता,, लुकाके काबर चाबथच रे कुकुर हिम्मत हे त आघु आ।। 24 अप्रेल के दिन सुरता रखबे…

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गीत : मउहा बिने ल जाबो

चल बिने ल जाबो रे संगी , मउहा के दिन आगे बिनेल जाबो ।…….2 सुत उठके बड़े बिहनिया, टूकनी धर के जाबो। टुकनी टुकनी मउहा संगी, बीन के हमन लाबो। झरत हाबे मउहा संगी -2, धर के हमन आबो । चल बिने ल जाबो रे संगी, मउहा के दिन आगे बिनेल जाबो । लट लट ले फरे हाबे, अब्बड़ ममहाथे । खुसबू ल पाके ओकर, भालू घलो आथे । जगा जगा फरे मउहा -2, सबोझन खाथे । चल बिने ल जाबो …………………………. डोंगरी पहाड़ चढबो, तेंदू चार लाबो। आमा अमली…

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अकती तिहार : समाजिकता के सार

बच्छर भर के सबले पबरित अउ सुभ दिन के नाँव हरय “अक्षय तृतीया” जउन ला हमन अकती तिहार के रुप मा जानथन-मानथन। अक्षय के अरथ होथे जेखर कभू क्षय नइ होवय,जउन कभू सिरावय नही,कभू घटय नही अउ कभू मिटय नही। एखरे सेती ए दिन हा हिन्दू धरम मा सबले परसिद्ध अउ लोकपिरिय दिन माने गे हावय। अकती तीज के तिहार हा बइसाख महीना के जीज के दिन मनाय जाथे एखर सेती ए तिहार ला अकती तीजा घलो कहे जाथे। ए तिहार हिन्दू अउ जैन मन के एकठन सोनहा दिन के…

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एक बित्ता के पेट : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने मा ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा! नानकुन एक बित्ता के पेट हर मनखे से का नई करवावय रे। फेर संगवारी हो हमन उंखर बात ला बने ढंग ले समझ नई पाएन। संगवारी हो हमन 1 मई के अंतर्राश्ट्रीय मजदूर दिवस मनाथन। मजदूर दिवस सबले पहिली 1 मई 1923 के मद्रास (चेन्नई) में मनाए गै रहिस हावय जेला विश्व स्तर में मनाए के शुरूवात 1 मई 1886 से होय हावय। विश्व के 80 से जादा देश 1 मई ला मजदूर…

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