धिक्कार हे

सुकमा जाय मा कांपत हे पोटा दिल्ली ले कहत हे चुनौती स्वीकार हे बंद करव अब फोकटे बोल बचन नेता जी तुंहला बड़ धिक्कार हे कतेक घव बार-बार ये बात ला दोहराहु बोलते रहि जहु फेर कुछू नइ कर पाहु दम हे ता थोरकु बने दम ला दिखावव दिल्ली वाले नेता आपो ग्राउंड जिरो ले हो आवव आतंक वाले मन तो हजार दू हजार हे तुहंर कना तो पूरा सरकार हे बंद करव अब फोकटे बोल बचन नेता जी तुंहला बड़ धिक्कार हे थोरकुन बांचे होही लाज-शरम ता अब आर-पार के उठावव कदम कब तक बस्तर…

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गांव के संस्‍कृति के धरोहर : ओरिया के छांव

“ओरिया के छांव” के मनीराम साहू “मितान” के पहिली छत्तीसगढी कृति आय। छत्तीसगढ के गॉंव-गँवई ल जेन जानना चाहथे उनला ये किताब जरूर पढना चाही। सावन, भादो, जेठ,अषाढ़, घाम, जाड जम्मो मास के सौंदर्य के बरनन मितान जी ये संघरा म करे हवय। कोन महिना म छत्तीसगढ़ के किसान का काम करथे, कोन से तिहार परथे तेकर सुघ्‍घर चित्रण ये संघरा म मिलही संगे-संग सँझा, बिहनिया, देवारी, फागुन, तीजा-पोरा, नवा बछर हमर छत्तीसगढ़ म कइसे होथे अउ कइसे मनाथे येकर जानकारी ये संघरा ल पढे़ म मिलही। कुल 51 रचना…

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बियंग : बरतिया बाबू के ढमढम

बिहाव के गोठ छोकरी खोजे ले चालू होथे अऊ ओखरो ले पहिली ले दुल्ही-दुल्हा दुनो घर वाला मन हा गहना-गुट्ठा बिसा डारे रथे। फेर अऊ नत्तादार मन ल का टिकबो, मुहु देखउनी का देबो तेखर संसो रथे। ताहन सगा पार मन ल पुछे के बुता फेर घर के लिपई पोतई, बियारा-बखरी ल छोलबे चतवारबे, पंडित बुलाबे, लगिन धराबे, कारड छपाबे त सस्ती-मंहगी अऊ आने-आने सगा बर आने-आने कारड सोंच के छपाय बर लागथे, सगा नेवते बर मुखियाच हा जाही नीते सगा रीसा जथे, अब मड़वा छाबे, समियाना परदा कुरसी दरी…

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घाम तो घाम मनखे होवई ह बियापत हे

ददा ह मोर, चौरा म बईठ के हमर खेती के कमईया गाँवे के भैय्या पुनऊ करा काहत रहय, पुनऊ ऐसो के घाम ह बाबु बड़ जियानत हे ग, कोनो मेर जाय बर सोचे ले पड़थे I त अतका सुन के पुनऊ ह तिलमिला गे, हमन कईसे करत होबो हमू मन तो मनखे यन कका, तुमन घरे म खुसरे रहिथव तभो ले अईसना गोठीयावत हौव, फेर एको अक्षर नई पढ़े राहय पुनऊ ह तभो ले अतेक गियान भरे हे ओकर मती म कि पढ़ईया लिखईया मन फेल हे ओकर आगू म…

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परघनी

जगा जगा बाजत हे, मोहरी अऊ बाजा । गांव गांव में होवत हे,विडियो अऊ नाचा । बर तरी आके , खड़े हे बरतिया । सुघ्घर परघाय बर, जावत हे घरतिया। बड़े बड़े दनादन , फटाका फूटत हे । आनी बानी गीत गाके, टूरा मन कूदत हे। पगड़ी ल बांध के, दूनों समधी मिलत हे। घेरी बेरी चकाचक , फोटू खींचत हे । कूद कूद के बजनिया मन, बाजा बजावत हे। गांव भरके मिलके, बरतिया परघावत हे। महेन्द्र देवांगन “माटी” गोपीबंद पारा पंडरिया जिला — कबीरधाम (छ ग ) पिन –…

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नवा बछर म करव नवा शुरुआत

हमर भारत म बारो महिना तिहार अऊ खुसी के दिन आवत रथे, फेर अंग्रेजी कलेंडर के एक चक्कर पुरे के बाद फेर एक जनवरी आथे अऊ ओला हमन नवा बछर के रुप म अब तिहार असन मनाये ल धर ले हन। येकर चलन हा अभी-अभी बाढ़ीस हवय, अऊ अब दिनो दिन बाढ़ते जावत हे। पहिली के मनखे मन चैत्र महिना में नवरात्रि के पहिली दिन आने वाला हिन्दी नवा बछर ल पारंपरिक ढंग ले मनाये अऊ ओला बड़ माने। अंग्रेजी हिन्दी दुनो नवा बछर के अपन-अपन ठऊर म अलग-अलग महत्ता…

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मोर लइका दारु बेचथे

महेस, लखन अऊ संतराम आज अबड़ खुस हे ऊंखर दाई ददा ,परवार के सबझन खुस हे अऊ अरोसी परोसी मन घलाव ऊंखर उछाह म संघरगे।आजेच तीनों झन ल नौउकरी म आय बर आदेस मिलीस हे। महेस ह सहर ले मिठई लाय हे तौन ल बांटत हे।लखन जलेबी बांटत हे ।संतराम के सुवारी ह तसमई अऊ सोंहारी बनाके परोसी मन घर भेजत हे। सबो संगवारीच हरय। तीनों झन गजब दिन ले बेरोजगारी , नकारा अऊ ठेलहा के ताना झेले रहीन। महेस 26 बच्छर के कुंवारा गबरु ऊंचपूर जवान लइका हे।अइसने लखन…

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छत्तीसगढी शब्द में भ्रम के स्थिति….

जेन भाखा म जतके सरलता,सहजता अउ सरलगता होही वो भाखा उतके उन्नति करही, अँग्रेजी भाखा येकर साक्षात उदाहरण हवय । अउ जेन भाखा म क्लिष्टता होही वो भाखा ह नंदाये के स्थिति म पहुंच जाथे जइसे कि हमर संस्कृत । यदि हम ये सोचथन कि छत्तीसगढी ह वैश्विक भाखा बनय त ओखर सरलता अउ सहजता उपर हमन ल ध्यान दे बर परही । खास करके संज्ञा शब्द के उपयोग करत बेरा । जडउन शब्द मन हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी या अन्य भाखा ले आय हे वो शब्द ल ज्यों के त्यौ…

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चिरई चिरगुन बर पानी निकालव

मनखे जनम बड़ भागमानी आय।चौरासी लाख योनी म इही जनम ल पुन पाय के भाग मिलथे। पुन कमाय बर जादा मिहनत करेबर नई परय।हमर बेद पुरान म सुघ्घर ढंग ले संदेस देय हावय भूखे ल भोजन, पियासे ले पानी अऊ सगासोदर के मानगऊन अतका म अबड़ेच पुन मिल जाही। मनखे मन के संगवारी म गाय गरु, कुकुर बिलई संग चिरई चिरगुन घलाव आय। घाम पियास के दिन आ गेहे। गरमी के सेती रुख राई के पाना सुखाके झरगे। दूसर कोती कुंआ बाऊली नंदावत जावत हे,अऊ जेन हावय ओखर पानी अटावत…

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खेत के मेड़

पूनाराम अपन 10 बच्छर के बेटी मोनिका ल फटफटी म बैईठार के भेलाई ले अपन पुरखौती गांव भुसरेंगा छट्ठी म लेजत रहीस।भुसरेंगा गांव पक्की सड़क ले एक कोस म जेवनी बाजू हावय।नहर के पार के खाल्हे म मुरुम के सड़क बने हे जौन ह अब डामर वाला पक्की सड़क बनईया हे। तीरे तीर गिट्टी के कुढ़ा माढ़े हे। दुनो बाप बेटी गोठियात फटफटी म बैइठ के जावत हे। पूनाराम अपन नानपन म बिताय दिन ल सुरता कर-करके नोनी ल बतावत हे।येदे गौटिया के खेत आय, येदे पटइल के, ये दाऊ…

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