पढ़व, समझव अउ करव गियान के गोठ -राघवेन्द्र अग्रवाल

एक बखत के बात ये, संतखय्याम ह अपन एक झन चेला संग घनघोर जंगल के रद्दा ले जात रहिस हे। नमाज पढे क़े बेरा म दूनू गुरू-चेला नमाज पढ़े बर बइठिन तइसने उनला बघवा के गरजना सुने बर मिलिस अउ थोरेकच्च म देखिन के बघवा ह उंकरे डहर आवत हे। चेला ह डर के बारे एकठन रुख म चढ़गे जबके वोकर गुरू खय्याम ह धियान लगा के नमाज ल पढ़त रहय। बघवा वो करा आइस अउ चुपचाप चल दिस। बघवा के जाय बाद चेला ह रुख ले उतरिस अउ नमाज…

Read More

तीजा के लुगरा – बन्धु राजेश्वर राव खरे

”सालपुर तीजहा लुगरा के गिरत दसा ल देखके एसो ओला नइ सहइस। लुगरा ल अपन तन म मन मार के लपेटे रिद्धहस फेर ओखर मन हर नंगत काच्चा होगे। ओखर ले नई रेहे गीस तब अपन भाई ल सुना दीस, मैं अभी पाठ के भाई होतेंव तब ये पुरखौती जहिजाद के दू बांटा होतीस। मैं अभी अंड़ जाहंव तब कान्हून घलों अभी ऐ जहिजाद के दू भाग कर देही। सालभर म तीजा के नाव लेके एक बेर बेटी, बहिनी के आना होथे। हमरो मान-सनमान के नेग रथे सवाल रथे। तीजा…

Read More

दुखिया बनगे सुखिया – राघवेन्द्र अग्रवाल

तइहा-तइहा के बात ये एक ठन गांव म एक झन माई लोगिन रहय। भगवान ह वोकर सुख-सोहाग ल नंगा ले रहय। वो ह अकेल्ला अपन जिनगी ल जियत रहय। वोकर एक झन बेटा रहय, नाव रहिस लेड़गा। ‘जइसना नाव तइसना गुन’ तभो ले वोकर दाई ह वोला अड़बड़ मया करय। दिन जात बेर नि लागय। नानकन ले बड़े होगे। महतारी ह वोकर लेड़गई ले संसो म परगे । कमाय-धमाय बर जांगर ह नइ चलय। ढिल्ला गोल्लर कस गिंदरत रहय। वोकर दाई सुकवारो ह मन म भंजाइस के अब ये टूरा…

Read More

सीला बरहिन नान्हें कहिनी – सत्यभामा आड़िल

सीला गांव ले आय रिहिस, त सब ओला सीला बरहिन कहांय। अपन बूढ़त काल के एक बेटा ल घी-गुड़ खवावय, त देवर बेटा मन ल, चाऊर पिसान ल सक्कर म ए कहिके पानी मं घोर देवंय। देवरानी जल्दी खतम होगे देवर तो पहिलिच खतम होगे रिहिस। नान-नान लईका देवर के फेर सीला बरहिन के बेटा ह सबले छोटे रिहिस। देवर के बड़े दूनों बेटा मास्टर होगें मेट्रिक पढ़े के बाद। सीला बरिहन अपन बेटा ल देवर बेटा घर पहुंचईस पढ़े बर। हर आठ दिन मं घी, चाऊंर ले के आवय।…

Read More

हरमुनिया – मंगत रविन्‍द्र के कहिनी

रमाएन तो कतको झन गाथें पर जेठू के रमाएन गवई हर सब ले आन रकम के होथे। फाफी राग…. रकम-रकम के गीद ल हरमुनिया म उतारे हे। जब पेटी ल धरथे ता सब सुनईया मन कान ल टेंड़ देथे। ओकर बिना तो रमाएन होबे नई करै। सरसती मंइया तैंहर बीना के बजईया…. उसाले पांव बाजे घुंघरू ओ मइया छनानना, उसाले पांव…..। नानपन ले जिंहा रमाएन होवै तिहां सुने ल चल देवै एक कोन्टा म बइठ के चित्त लगा के सुनै। कोन रात कोन बिकाल ले घर म फिरै। रमाएन सुनत-सुनत…

Read More

हरमुनिया – मंगत रविन्‍द्र के कहिनी

रमाएन तो कतको झन गाथें पर जेठू के रमाएन गवई हर सब ले आन रकम के होथे। फाफी राग…. रकम-रकम के गीद ल हरमुनिया म उतारे हे। जब पेटी ल धरथे ता सब सुनईया मन कान ल टेंड़ देथे। ओकर बिना तो रमाएन होबे नई करै। सरसती मंइया तैंहर बीना के बजईया…. उसाले पांव बाजे घुंघरू ओ मइया छनानना, उसाले पांव…..। नानपन ले जिंहा रमाएन होवै तिहां सुने ल चल देवै एक कोन्टा म बइठ के चित्त लगा के सुनै। कोन रात कोन बिकाल ले घर म फिरै। रमाएन सुनत-सुनत…

Read More

मंगत रविन्‍द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’

चारों मुड़ा लेन्टर के घर…पिछोत म नीलगिरी के ऊँचपुर रूख, दिनरात फुरहुर बइहर परोसत रहै। अंगना कती के कंगुरा म परेवा के मरकी बंधाए रहै जेमा धंवरा-धंवरा परेंवा मन ए मरकी ले ओ मरकी दउंड़-दउंड़ के घुटुर-घुटुर बोलत रहैं। बारी म पड़ोरा के पार लम्बा-लम्बा फर चुपचाप बोरमे हे। अंगना म बोरिंग के मुठिया सुरतावत अद्धर म टंगाए हे। सांझ कन अंधियारी के समाती म अघनिया के खोली म धीमिक-धीमिक दीया बरत रहै। अघनिया के तीर ओकर औतारे दु ठो बाबू… दाई के जांघ ल पोटारे चटके रहैं। अघनिया… पलंग…

Read More

मंगत रविन्‍द्र के कहिनी ‘सोनहा दीया’

चारों मुड़ा लेन्टर के घर…पिछोत म नीलगिरी के ऊँचपुर रूख, दिनरात फुरहुर बइहर परोसत रहै। अंगना कती के कंगुरा म परेवा के मरकी बंधाए रहै जेमा धंवरा-धंवरा परेंवा मन ए मरकी ले ओ मरकी दउंड़-दउंड़ के घुटुर-घुटुर बोलत रहैं। बारी म पड़ोरा के पार लम्बा-लम्बा फर चुपचाप बोरमे हे। अंगना म बोरिंग के मुठिया सुरतावत अद्धर म टंगाए हे। सांझ कन अंधियारी के समाती म अघनिया के खोली म धीमिक-धीमिक दीया बरत रहै। अघनिया के तीर ओकर औतारे दु ठो बाबू… दाई के जांघ ल पोटारे चटके रहैं। अघनिया… पलंग…

Read More

मंगत रविन्‍द्र के कहिनी ‘दुनो फारी घुनहा’

।। जीवन के सफर में जरूरत होती है एक साथी की।। ।।जैसे जलने के लिये दीप को जरूरत होती है एक बाती की।। भीख देवा ओ दाई मन…………। ओरख डारिस टेही ल सूरदास के…… जा बेटी एक मूठा चाउर दे दे, अंधवा-कनवा आय। महिना पुरे ए….. गांव म सूरदास, मांगे ल आथे। सियान ले नानकन लइका तलक सूरदास ल जानथे। अब्बड़ सीधवा ए… मन लागती तेकर इंहा मांग के खा लेय। मांगे म का के लाज? चोरी करे म डर हे…। कभू-कभू तो मुंहटा म लाठी ल भूंइया म ठेंसत…

Read More

मंगत रविन्‍द्र के कहिनी ‘दुनो फारी घुनहा’

।। जीवन के सफर में जरूरत होती है एक साथी की।। ।।जैसे जलने के लिये दीप को जरूरत होती है एक बाती की।। भीख देवा ओ दाई मन…………। ओरख डारिस टेही ल सूरदास के…… जा बेटी एक मूठा चाउर दे दे, अंधवा-कनवा आय। महिना पुरे ए….. गांव म सूरदास, मांगे ल आथे। सियान ले नानकन लइका तलक सूरदास ल जानथे। अब्बड़ सीधवा ए… मन लागती तेकर इंहा मांग के खा लेय। मांगे म का के लाज? चोरी करे म डर हे…। कभू-कभू तो मुंहटा म लाठी ल भूंइया म ठेंसत…

Read More