“दाई ददा हर जनम तो देथे, फेर करम ल नई देवय” अइसे कहत सुनत सगर दिन ले आवत हन। ये बात ला भले कोनो मानँय के झन मानँय फेर छोटे बाबू ला देखके लगथे सोरा आना सही नइ होही। जउन दाई ददा अपन लइका बच्चा ल, नान पन ले बने बात के सिखौना देथे, तव ओही लइका मन, एक ल कोन कहय, सात पीढ़ी ल तार देथे। हां भाई। सिखौना देवइय्या ल, सवांगे बने बने काम करे बर परथे। तभे लइका मन धरथें। कोनो कइही, कहे भर ले बन जाही तव राम के नांव लेबे। जरी नई धरय। सुनइय्या हर घलाव कहइय्या के काम ल देख लेथे, तव पतियाथे, नई तो ओहू् कथे- आन ला सिखौना दय अपन बइठ रवनिया लय।
हां ! तव मैं तो छोटे बाबू के बात बतावत रहेंव। ओकर गांव हर अच्छा बड़का छै आगर छै कोरी छान्ही के, पांच तारा बाला बड़हर बस्ती रहिस।
असगई पसगई मा ओ गांव के सोर उड़य उहां के गौटिया के का बात ल कहिते ? हप्ता पन्द्रा दिन म कलकत्ता बम्बई के गजट ला डँकहार हर सवांगे अमरावै। बंधेजू घोड़ा अइसना, जेहर नानमुन झोरका ल एक कुदान म नहाक देतिस। दू घोड़ा बाला बग्गी गाड़ी तउन अलग, ओकर बइठक म कुंदाये खूरा के बड़े जनिक बाजवट तेमा गद्दा अउ उपर म बकुला पांखी कस उज्जर चद्दर दसे रहेय। चार छै ठन खुरसी माढ़े। गांव के मन ओला कछेरी कहँय। ओमेर ले नाहकत म पछीना छूट जाय। तरी मुड़ करके सुटुर सुटुर रेंगइय्या हर रेंगतिस। बजनी पहनी पहिरइय्या हर ओलंग ले पनही ल हांथ म धरके नहाक तिस। पूंजी पसरा के का कहिते ? बड़े-बड़े ढाबा जेमा धन गोड़ा नांग देवंता रहय कहँय। कोनो कुछू काम बर जातिन तव गौटिया के गोठ म हुंकारु भरेचबर परतिस। ओकर बात ल काटके कोन गोड़ के पथरा ल मुंड़ मा कचारतिस ? बाल बच्चा वाला आदमी ल, जमो कती ल देखके चले बर परथे न ?
कोनो गौटिया के कछेरी म फिरियाद देइस तिहां भई तो गै। का होही न का, काकर कसूर निकलही, काकर कतका डांड़ बोड़ी परही ?
काला गांव छोड़े बर परही, कोन जानतिस ? जउन गौटिया के मुह ले निकलगे, ओही हर नियाव ये। बइठे बर चार सियान अऊ बइठे रहय फेर उंकर काम “ठउका कहे मालिक” अतके कहे के रहय गौंटिया के बात ल मानेच बर परै। चार झन घंसिया घलाव तो रहंय ओ लंग। नइ माने ले का होतिस तेहर कहे के नो है, गुने समझ के बात ये। गौंटिया के कतको मिलान के खेत मन, येई कछेरी के परभूता म बाढ़े रहिन। रमायेन पोथी के पढ़िय्या मन गुनँय, ओधा बेधा म कहंय का रावन के राज हर येही किसम के रहिस होही ?
तपथे तेहर एक दिन खपथे। ये बात अबंच नई जाय, फेर खप लेथे तभे सब पतियाथें जब तपथे तउन बेर म सब छइंहाये रथें लुकाय रथें, घिरमिटकी मारत कलेचुप दबके रथें। फेर हां। भगवान के जुड़ तरवार हे, खपोये के ओकर हर चलत रथे, भले ओहर दिखै नहीं।
छोटे बाबू हर येई गांव के एक बाम्हन छोकरा रहिस। लइकाई म ददा हर भगवान घर गय, तंव महराजिन दाई हर, ददा दाई दूनू हो गइस। दाई का देबी दाई कहना चाही। लइका के मुंह ला देखत देखत दिन काटत भगवान ला बिनोवय। भगवान। मोर लइका के गोड़ मा कांटा झन गड़तिस अइसने कोनो के लइका के पेट के चारा ल कोनो झन लूटे सकतिन। असत्ती करइय्या के बंदरोबिनास करते उदेनाथ। छोटे बाबू तउन- दाई के तोलगी ला एकोछिन नई छोड़य। संगे म नहावै, पूजा पाठ रमायेन पोथी पढ़य संगे म खावै पीवै। दाई हर भौंरा कीरा कस कुछू – कुछू बने बात के सिखौना देत रहय। कथा पुरान के बात निकालै तो बड़े बड़े अन्यायी मन के कइसे कइसे सत्यानास होइस, ऊंकर डीह म दिया बरइय्या नई रहिन ओ बात ल बतावै। प्रहलाद, कृष्ण, रामभगवान के बात ला तो घेरी भेरी करतिस अउ गोठे गोठ म गउंटिया के अनीत के बात ल निकाल के दुख करय छोटे बाबू ल लगय मोर दाई के मन मा जउन गौंटिया के अन्नेत ला जरी ले टूटे देखे के साध हे, तेला मैं हर करके देखाहौं थोरक आऊ बाढ़ लेलंव। रखमखा जावै।
छोटे बाबू अपन जंवरिहा मन के एक ठन रमायेन मंडली बनाइस। रमायेन गावैं अऊ कभू कभू गौंटिया के लूटा पुदगा जबरा निबली के गोठ ला निकाल के उंकरो मन म बिरास के बीजा ल बोवै “ओमा पानी रितोवै। धीरे धीरे एक ठन अपन गुनान के लइकन मन के, गुट्ट असन बनावत रहय। दाई हर छोटे बाबू के सबो संगी मन ला कुछू कांही खाजी देवय। चना मूर्रा, लडुवा, लायचीदाना तब कभू भुरमूंग एको दिन चीला, अंगाकर, कभू होरा। कुछू न कुछू देने च हे दाई ल। ओहर जानै लइकन मन बर खाई मीठ के माई मीठ”।
झंझट उठे के कुछू मुड़ी पूछी नइ रहय। कब कोन बात ले का उठ जाही कोनो गम नई पावै। उठ तो गे एक दिन। छोटे बाबू ल, गौंटिया घर के बाम्हन भोजन के बलाव आइस। आने सब तो गइन फेर येहर नई गइस। गौंटिया पूछिस सबो झन आ गइन का गा ? एक झन छोड़ के जमो आइन हें – मालिक। कोने नई आये हे तेहर ? महराजिन दाई के छोटे बाबू हर। हूं sss गउंटिया के मुंह हर रिस के मारे ललिया गे। फेर मन ल मार के कहिस – जा, एक घौं अऊ बला दे। दूसर बलाव म छोटे बाबू आ गइस। गौंटिया कथे – कइसे नई आवत रहे पंडित? देखा गउंटिया। तूं हमला गरीबहा ललहा समझ के बला था। तुंहर पहुना मन ओती खावत हें। ऐती बाम्हन भोजन हो ये नइये। फेर एक कती घिवहा सोंहारी तब येती तेलहा ल परोस था। दुआ भेदी करथा, तूंमन तेकरे बर नई आवत रहेंव। जउन जगा म मान गउन नई होवय, तिहां जाना नइ चाही। चाहे, उंहा सोन बरसय।
छोटक छोकरा के अतेक बड़ आदमी ल अइसना सफ्फा जुवाब। गोड़ के रिस हर तरूआ म चढ़गे। मिरचा खाये बरोबर आंखी ललियागे। जतका झन सुनिन अकबका गइन। मने मन मा संहराइन घलाव, चर्रा चर्रा बात करे वाला बेटा, अइसने होना चाही। कोनो अनदेखना मन ला लगिस अब ये चटरहा टूरा के चटरही हर सटकही। सवा सेरिया के पाही परेहे।
छोटे बाबू हर घर म आके अपन दाई ल सब बिरदंत ला बताइस। दाई हर पोटार लिस बेटा ल। बने कहे बेटा दुआभेदी ल नई सहे। छोटे बाबू के उछाह हर दाई के पोटारे अउ सँहराये ले अंदरमा म नइ समाइस। आंखी हर चुहचुहागे रोवां गुरगुरागे।
बिहान भय ले गउंटिया के उपदरो चले लगिस। कभू इंकर खेत म गरुआ पेले हे, तव कभू कोला के साग भाजी के चोरी। गाड़ा के जुआड़ा एक दिन उछीन्द होगे। रात म अना चकरित छान्ही मँ ढेला पथरा। किसम किसम के हर्रवाय गौंटिया हर घंसिया मन ला काबर राखे हे ? अतको ल नई करहीं ? जब बंधेज करिय्या हर संवागे अन्नेत करत हे तव फेर का ठिकाना ? सब सुनंय, फेर कहे कोन सकतिस ?
गेंद ला तरी कती मारबे तव आऊ ऊपर कती उचक थे। तइसने छोटे बाबू के मन म अन्नेतहा के सब मसरमोटी ल सटकाये के गुनान हर भंभकत रहय, फेर, गुनय के अपन रस्ता घलाव हर नेत परवान होना चाही दाई के येहू सिखौना तो हय।
गांव म अपने अपन बीच म जगा जगा गोठिआवैं गउंटिया हर रांडी अनाथिन के चीज बस के नकसान करते हे। ये बने बात नोहय। फेर बघवा के मुंह म कोन सौंहाही। करही तेहर भरही, तपही तेहर खपही कोनो कहंय बड़े बड़े गइन खमर छठ आइन रकम रकम के गोठ फेर सब के मन म छोटे बाबू कती सोग पीरा हर बाढ़त गइस।
महिना दू महिना के गये ले एक ठन नावा डमफान उठगे। तलाव पार के कुरिया म रहे तउन खोरी नवाइन बुढ़िया हर, गाड़ा रसन होइस तहां चटका पटका मर गे। आन जात ल बना ले हे रहिस तब सगा ले छुट्टा रहिस। डांड भात के डर मा परजातक मन दाग माटी कइसे करंय ये अलकर हे गौटिया सो गइन तव कहिस – मेहत्तर सो फेंकवा देबो। महराजिन दाई के मन मा भारी दुक्ख होगे। एक अनाथिन नारी परानी के गती बिगड़त हे। ठउका दिन म ओकर हुकुम के हाजिर बेटा तउन गांव गये हे। कइसे नइ आवत हे भगवान ! मोर बेटा हर आ जातिस दुआरी म कुछू खुटका होवय तहां दउंड़ के देखय। ये येदे आतो गे। दाई ल सिसिआये देखके छोटे के जीव हर दक्क ले करिस। पूछे नइ पाइस बेटा हर। दाई हर कहते कहिस – बेटा ! खोरी हर परोदिन के मरके अपन कुरिया म परे हे। गंधावत हे रे। ओकर माटी गोंटी के कुछू उजोग कर देता बेटा ! गांव म एक ले एक तालेवन्त पोथी
रमायेन के पढ़इया सुनइय्या बहंगर आदमी हावैं फेर एक रांडी अनाथिन के मुरदा ल माटी देहे कोनों के जांगर नइ चलत हे। जर जाय अइसन जितरभ ला।
तव तैंहर ओकर लहांस म लुगरा ओढ़ाबे अऊ आरती करबे दाई ? ह हो मैं सब करहूं। जा तो खंझा ल मढ़ावा। छोटे बाबू अपन संगी मन ला खंधोइस तव चार छोकरा मन लटपट निकलीन। तमासा देखइय्या रस्ता रस्ता म खड़े हें। पहिली तो आधा सेर डामर गोली ल पीस के लहांस म भुरक दिहीन मुंह कान ल अपन बांधके दू ठन सूर ला खटिया तरी डार के फेर निकालीन। तिहां रामनाम सत्त हे कहत निकल गें। ओती महराजिन दाई कोसा धरी के बरहँथ्था लुगरा अउ दियाबंती धरे तियार अगोरत रहय। दुआरी म लान के उतार दिन तिहां महराजिन दाई हर लुगरा ल ओढ़ाइस, आरती करिस अऊ पउवा भर गुलाल ल छींच के असीस देइस। अतका ल देखिन तहां घरो घर ले आरती निकलगे। चार पांव नई जावै तहां फेर उतारे बर परै। देखा सिखी जमो महराजिन दाई के बोहात गंगा म हाथ धोये लागिन। भई तो गय माटी देवइय्या के रेर परगे ओकर गत गंगा सब होइस। महराजिन दाई जीजाबाई हर शिवाजी बना डारिस छोटे बाबू ल। ये करवंट्टी पथरा हर ओ केरवंट्टी लहुट गे। गौटिया के तपनी हर सूरज नरायेन कस बूड़गे अब पुन्नी के चन्दा के जुड़ अऊ जग जग ले अंजोर जमो के जीव जुड़ाये लगिस।
छोटे बाबू हर फेर तो पंडिताई पढ़िस चारों मुड़ा ओकर सोर होगे गउंटिया हर गांव के आदमी मन ला मामला मुकदमा म कचेहरी चढ़ा देवै तव फेर ओकलात पास करिस। ले अब कइसे करबे ? बिन पैसा के मामला ल लड़य। धीरे-धीरे ओकर दंद फंद अपन आप सकलाये लगिस। जउन आदमी गौंटिया के आघू मा चिंव नइ करे सकंय तउन मन हांव ले करे लगिन। काबर नइ करतिन ? पोठ्ट धरखन तो पा गये हें। छोटे बाबू हर जइसे जइसे जस बाला होइस तस तस आऊ निचट नवें लगिस फरबाला पेंड कस। ओ गांव के असगई पसगई म अब्भो ले सोर हावै फेर घंसिया घोड़ा कछेरी बाला के सेतिर नsही अब तो छोटे बाबू पंडित वकील महाराज के सेतिर हे। कोनो ओकर आघू म बड़ाई करथें तव कथे, मोर नहीं, मोर दाई के बड़ाई करौ मैं तो ओकर कठवा के पुतरी आंव। दाई हर अब नइये फेर “हांथी बूले गांव गांव, जेकर हाथी तेकर नांव” कस दाई के जस ला गोठिआये बिना नई रहय।
मोर किस्सा पूरगे, दार भात चूरगे।
पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के कहिनी : छोटे बाबू के बड़े बात
