परेम के गौटिया घर अवई हा फलित होगे। चार महिना की बीते ले गौटनिन के पांव भारी होगे। दूनों परानी ल गजब खुसी होगे। मानो दुनिया के जम्मो सुख वोकर आगू मे आगे। लइका के लालन-पालन म दूनो परानी ह जम्मो बेरा ल पहा दय। सबो खेती -खार के देख-रेख ल परेम ह करय। एक दिन उदुप ले परेम ह गौंटिया घर ल छोड़के पटइल बाड़ा म रेहे ल चल दिस। वोकर मन के बात उही जाने मंगतू गजब पुछिस फेर परेम ह एक भाखा नई बकरिस।’ ब गांव म…
Read MoreYear: 2010
गुरूजी नमस्कार – कबिता
गुरूजी नमस्कार, काहत हावे सरकार। सिक्छक तो नई बना पायेन फेर सिक्छा म कर्मी जोड़े के खातिर मिहनत करेन अपार। गुरू जी नमस्कार॥ बने नंबर घला दे देन एक दू तीन सिक्छा कर्मी अइसन हे कानून निकाल के सिक्छित बेरोजगार मन ल, करथन बंठाधार। गुरू जी नमस्कार॥ ये गुरू के निन्दा हरे धन नोहे ग गय गुरू, माता, पिता, भगवान के जमाना अब तो गुरू जी मन ल, रोजी मं रगड़त हन अपार। गुरू जी नमस्कार॥ यह काय दयनीय दशा ये ग जनगणना के दिन आगे अब पेर-पेर के गुरूजी…
Read Moreकोंदा मनके भजन महोत्सव – गुड़ी के गोठ
अब बड़े-बड़े जलसा अउ सभा समारोह ले देवई संदेश ह अनभरोसी कस होवत जात हे, अउ एकर असल कारन हे अपात्र मनखे मनला वो आयोजन के अतिथि बना के वोकर मन के माध्यम ले संदेश देना। राजनीतिक मंच मन म तो एहर पहिली ले चले आवत हे, फेर अब एला साहित्यिक सांस्कृतिक मंच मन म घलोक देखे जावत हे। अभी छत्तीसगढ़ी साहित्य के नांव म एक बड़का समारोह होइस, एमा सबो चीज तो बने-बने लागीस, फेर छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य के कमी विषय खातिर जेन वक्ता मनला वोमा बोले खातिर बलाए…
Read Moreगांव के गुरूजी – कहिनी
”गांव के गुरूजी कहिस के छोटे-छोटे बात में सरकार के मुंह देखना ठीक नई होवय। सरकार तो हमन ल स्कूल के भवन बना के दे दे हावय। अब ये भवन के सुरक्षा अउ मरम्मत के जिम्मेदारी हमर गांव वाला मन के आय। ये स्कूल में हमर लइका मन पढ़े बर आथें। ओखर मन के सुरक्षा बर ये जरूरी हे कि हमर स्कूल के भवन मजबूत अउ साफ-सुथरा राहय। हमर ये कर्तव्य होथे कि हमन हमर स्कूल के सुरक्षा बर धियान देवन। जइसे हमन गांव वाला मन जुरमिल के गांव के…
Read Moreबेनी मा फूल गूंथे के दिन
बेनी मा फूल गूंथे के दिनफूल वाले घाटी फेर होगेसुहागिनकली मन के मुस्काए के दिन,धूप छांह के छेड़ छाड़ के दिनभंउरा मन के टोली उतरगेबाग बगीचा माकोनो मुस्काए मंद-मंदगुल मोहर के तरि मा,कोइली कुहके अमरइयापपीहा वन उपवनलाल दहकत टेसू वाला दिन,अमलताश डाली-डाली माआ गे निखारदे गे संदेशमउसम के अखबारकोनो गांव सजे मंड़वाकोनो गांव चले बारातगेहूं अउ सरसों केझूमे झामे के दिनचंदन वन ला चूम केआवत हवा देगे संकेतदूरिहा, बड़ दूरिहा तकदिखत हावय पिंयर पिंयरसरसों के खेतगोड़ मा माहूर रचाए केबेनी मा फूल गूंथे के दिन चेतन आर्यबसन्ती निवास, सुभाष नगरमहासमुंद
Read Moreगुदेलना – कहिनी
राधा अपन अंतस के पीरा ला कभू कोनो ल जनान नी देवय। फेर येकर कोनो नइहे कहिके लोगन जइसने पाथे वइसने ताना मारे मा कमी नी करय। राधा ह बिगर धियान दे अपन रसता आवत-जात रिथे। फेर ककरो बहकावा मा नी अईस। रसता मा कतको झन कुछु-न-कुछु कहात रिथे फेर लहुट के जुवाब कोनो ला नी दे अपने बूता म मगन रिथे। किसन के राधा हा जग मा मया बगराय के मिसाल बनिस। तेकरे सेती इंकर गुनगान ला हमन करथन। ये जग मा बिधाता हा हमन ला घलो बिगर छोटे-बड़े…
Read Moreगद्य साहित्य के कोठी म ‘बगरे गोठ’ के सकेला – पुस्तक समीछा
गढ़वाल के ऊंच-नीच धरती म जन्मे, प्रकृति के बीच म खेलत चन्द्रकला जी जब छत्तीसगढ़ के धरती म बहू बनके आइस। तब इंहा के प्रकृति म अपन मन ल बसा लीस। ‘मोर गोठ’ म लिखे हांवय के छत्तीसगढ़ के संस्कृति म कब घुल मिल गेंव पता नई चलिस। गांव-गांव घूमत ये कहिनी के जनम होवत गीस। ”बगरे गोठ” इही कहिनी के संकलन आय। एखर भूमिका लखनलाल गुप्त 1 जनवरी 1994 म लिखे हावंय। ये संकलन के पहिली कहिनी ह बता देथे के लेखिका ह दू संस्कृति के संगम आय। एक…
Read Moreपारसद ल प्रार्थना पत्र
विषय- गरीबी रेखा कारड बचाए बर। सेवा में, सिरीमान बोट-बटोरू पारसद जी! वार्ड-00 गरीब पालिका निगम झोलगापुर। प्रजापालक सादर सनम्र निवेदन हावै कि आपके आसीरवाद से बने फरत-फूलत हों। आशा हे आपो भोग-भोग ले फूल गै होहू। आगे समाचार जानौ के आप जऊन मोर बर गरीबी रेखा कारड बनवाय हावव ओला खतरा हो गेहे। अब तक बने मैं हर अपन उपजाय धान ला एक हजार एक सौ सत्तर रुपिया मा बेंच के, गरीबी रेखा वाले पैंतीस किलो महीना चाऊर, दू रुपिया के हिसाब से बने लेत रहेंव। अउ ओला खा-खा…
Read Moreमै मै के चारों डाहर घूमत साहित्यकार – सुधा वर्मा
एक कार्यकरम म कुछ साहित्यकार मन संग भेंट होईस। एक लेखक जेन कवि घलो आय आके पांव छुईस अउ बइठगे। थोरिक बेरा मा कुछु-कुछु गोठियाय के बाद म कहिथे, मैं ह छत्तीसगढ़ के टॉप के बाल साहित्यकार आंव। अभी-अभी थोरिक दिन पहिली एक महिला साहित्यकार फोन कर-कर के कई झन ल कहिस के मैं ह पहिली महिला साहित्यकार आंव जेखर तीन किताब छत्तीसगढ़ी म छपे हावय। मैं ह पहिली महिला उपन्यासकार आंव। एखर पहिली एक शिक्षक साहित्यकार एससीईआरटी म काहत रहय के हाना ऊपर कहिनी मैं ह पहिली लिखे हाववं।…
Read Moreगोठ बात : पानी बचावव तिहार मनावव
तैं माई लोगिन होतेस त जानतेस पानी-कांजी भरे म कतका दु:ख अउ सुख लागथे तोला काय लगे हे। भात ल खा के मुंह पोंछत निकल जाबे। मैं हर जानहा कतका दु:ख तेला सत्ररा घांव पानी भर छुही म पोत घर ल फेर रंग म पोत आजकल तो बोरिंग ले पानी घलो नई निकलत हावय। अभी म पानी नई निकलत हे त अभी तो जम्मो दिन बांचे हावय।’ देवरिहा समय एक दिन सोन साय हर बिहनिया हांसत- गोठियात रहीस। ओकर आगू-पाछू कोनो नई रहीस। मैं देवरहीया छुही रंग लाय बर दुकान…
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