गरमी के भाजी

गुरतुर हे इहां के भाजी ह , बड़ सुघ्घर हे लागय। अम्मट लागथे अमारी हा, सोनू खा के भागय।। किसम किसम के भाजी पाला , हमर देश मा आथे। सोनू मोनू दूनो भाई , खोज खोज के लाथे।। लाल लाल हे सुघ्घर भाजी , अब्बड़ खून बढाथे । चैतू समारु खाथे रोजे , सेहत अपन बनाथे ।। बड़ उलहाये हवय खेत मा , चना लाखड़ी भाजी । गुरतुर लागय दूनो हा जी , रांधे सुघ्घर भौजी।। आये हवय बोहार भाजी , गली गली चिल्लाये। अमली डार दाई ह रांधे ,…

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नवरात्रि मनाबो

चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो , मिलजुल के माता रानी ला सजाबो । विराजे हाबे हमर घर दुर्गा दाई हा—— चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो।। फूल पान से सुघ्घर आसन ल सजाबो, लाली लाली चुनरी माता रानी ल ओढाबो। सोलह श्रृंगार करबो दुर्गा माता के—— चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो।। मंदिर म सुघ्घर नवजोत जलाबो, माता रानी ला आसन बइठाबो। सेवा गाबो दुर्गा माता के ——– चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो।। प्रिया देवांगन “प्रियू” पंडरिया जिला – कबीरधाम (छत्तीसगढ़) [email protected]

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जस गीत – काली खप्परवाली

काली खप्परवाली आगे ,काली खप्परवाली लप लप लप जीभ लमावत, रूप धरे विकराली सब दानव ल मरत देख के, शुम्भ निषुम्भ गुस्सागे चंड मुंड कहाँ हौ कहिके , जल्दी तीर म बलाए जावव पकड़ के तुम दुर्गा ल , लावव मोर आगू म साम दाम अउ दंड भेद से , ले आहू काबू म सीधा सीधा नइ आही त , बाल पकड़ के खीचैं नइच मानही तुरते ओकर , लहू बोहाहू लाली शेर उपर बइठे हे माता , अउ मुच मुच मुसकावय ओतके बेरा चंड मुंड हॅ , सेना लेके…

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धुरसा-मुरमुरा के झरझरा दाई

जिला मुख्यालय गरियाबंद से लगभग 60-65 किलोमीटर के दुरिहा में बसे नानकुन गाँव धुरसा-मुरमुरा,ये गाँव जंगल के तीर मा बसे हे।अउ इही गाँव के डोंगरी में दाई झरझरा अपन सुग्घर रूप ला साज के डोंगरी भीतर डेरा लगाके बइठे हे।जेनला लोगन मन दाई झरझरा रानी के नाव से मानथे।अउ डोंगरी के तीर मा बसे जम्मों गाँव के मनखे मन जुरीया के दाई के पुजा पाठ करथे।अउ लोगन मन के मानना हे की ये दाई झरझरा रानी हा दाई जतमाई के परथम रूप आय।ये क्षेत्र के लोगन मन मानथे की दाई…

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अब्बड़ सुहाथे मोला बासी

गरमी म तो गरम भात हा, खाये बर नि भाय। चटनी संग बटकी म बासी, सिरतो गजब सुहाय। हमर राज के विरासत ये, अउ सबला येहा सुहाथे। ये गरमी म तन के संग म, मन हा घलो जुड़ाथे। मिले न बासी ते दिन तो, लागे अब्बड़ उदासी। सिरतो कहत हावौं संगवारी, अब्बड़ सुहाथे मोला बासी।। बइला जोड़ी धरे नगरिहा अपन खेत म जाथे। बासी खा के जुड़ छांव म तन ल अपन जुड़ाथे। किसम किसम के अन्न उगा के, जग के करथे पालन। परिवार अउ जग के खातिर, इखर बितथे…

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बियंग : लहू

लोकतंत्र के हालत बहुतेच खराब होवत रहय। खटिया म परे परे पचे बर धर लिस। सरकारी हसपताल म ये खोली ले ओ खोली, ये जगा ले वो जगा किंजारिन फेर बने होबेच नी करय। सरकारी ले छोंड़ाके पराइवेट हसपताल म इलाज कराये के, काकरो तिर न हिम्मत रहय, न पइसा, न समय, न देखरेख करे बर मनखे। बपरा लोकतंत्र हा लहू के कमी ले जूझत हसपताल के एक कोंटा म परे सरत बस्सावत रहय। तभे चुनाव के घोसना होगे। जम्मो झिन ला लोकतंत्र के सुरता आये लगिस। चरों मुड़ा म…

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गजल : दिन कइसन अच्छा

दिन कइसन अच्छा आ गे जी। मरहा खुरहा पोक्खा गे जी ।। बस्ती बस्ती उजार कुंदरा महल अटारी तना गे जी ।। पारै हाँका हाँसौ कठल के सिसका सिसका रोवा गे जी ।। पीए बर सिखो के हमला अपन सफ्फा खा गे जी।। हमला देखावै दरपन उन मुँह जिन्कर करिया गे जी ।। कोन ल इहां कहिबे का तै जम्मो अपनेच लागे जी ।। बाते भर हे उज्जर निर्मल तन मन मुँह बस्सागे जी ।। धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346

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बंदत्त हंव तोर चरन ल

गांव के मोर कुशलाई दाई बिनती करत हंव मैं दाई सुन ले लेते मोरो गुहार ओ दुखिया मन के दुख ल हर लेथे बिपति म तै खड़ा रहिथे अंगना म तै बैठे रहिथे जिनगी सफल हो जाथिस सुघ्घर रहथिस मोरो परिवार ओ तोरे चरन के गुन गांवों ओ ये मोर मैय्या सुन लेथे मोरो अरजी सुना हे मोरो अंगना भर देथे किलकारी ओ जनम के हं मैं ह दुखिया नइये मोरो कोनो सुनैया मया के दे आसीस तै मोर मैय्या नव रात म तोर गुन ल गांहंव ओ दे दे…

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माता ला परघाबो

आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो । नाचत गावत झूमत संगी, आसन मा बइठाबो ।। लकलक लकलक रूप दिखत हे, बघवा चढ़ के आये । लाली चुनरी ओढे मइया, मुचुर मुचुर मुस्काये ।। ढोल नँगाड़ा ताशा माँदर, सबझन आज बजाबो । आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो ।। नव दिन बर आये हे माता, सेवा गजब बजाबो । खुश होही माता हमरो बर, आशीष ओकर पाबो ।। नव दिन मा नव रुप देखाही, श्रद्धा सुमन चढाबो । आवत हावय दुर्गा दाई, चलव आज परघाबो ।। सुघ्घर चँऊक पुराके…

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राम जन्म : सबके बिगड़े काम सँवारथे श्रीराम

तुलसीदास हा रामचरित मानस लिखके,गाके अपन जिनगी ला तो सँवारिस अउ संगे संग कलियुग के राम नाम लेवाइया मन के बिगड़ी ला बना दिस।हर कल्प मा राम हा उँखर नाम लेवइया मनके उद्धार करे हे,भाग्य सँवारे हे। प्रभु राम के नाम जपत अहिल्या ला एक जुग पखरा बने बीतगे रहिस।ओकर गृहस्थी हा थोकिन गल्ती मा बिगड़ गे।राम जब ऋषि विश्वामित्र के संग जावत रहिस तब ओकर उद्धार करिस।भीलनी शबरी के जिनगी घलाव बिगड़े रहिस वहू हा अबड़ बच्छर ले राम नाम लेवत रद्दा जोहत रहिस।आखिर मा राम प्रभु उनला दरस…

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