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तीजा पोरा

तीजा पोरा के दिन ह आगे , सबो बहिनी सकलावत हे।
भीतरी में खुसर के संगी , ठेठरी खुरमी बनावत हे।।

अब्बड़ दिन म मिले हन कहिके, हास हास के गोठियावत हे।
संगी साथी सबो झन,  अपन अपन किस्सा सुनावत हे।।

भाई बहिनी सबो मिलके , घुमे के प्लान बनावत हे।
पिक्चर देखे ला जाबो कहिके, लईका मन चिल्लावत हे।।

नवा नवा लुगरा ला , सबोझन लेवावत हे ।
हाँस हाँस के सबोझन,  एक दूसर ल देखावत हे।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया  (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़

सावन के झूला

सावन के झूला झूले मा , अब्बड़ मजा आवत हे।
सबो संगवारी मिलके जी ,सावन के गीत गावत हे।।

हंसी ठिठोली अब्बड़ करत , झूला मा बइठे हे।
पेड़ मा बांधे हाबे जी , डोरी ला कसके अइठे हे।।

दू सखी हा बइठे हे जी , दू झन हा झूलावत हे।
पारी पारी सबो संगी, एक दूसर ला बुलावत हे।।

हांस हांस के सबोझन हा , अपन अपन बात बतावत हे।
सावन के आगे महीना जी ,सबोझन झूला झूलावत हे।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया (कवर्धा)
छत्तीसगढ़

सेल्फी के चक्कर

सेल्फी ले के चक्कर में ,
दूध जलगे भगोना में।
सास हा खोजत हे अब्बड़,
बहू लुकाय कोना में ।
आ के धर लिस चुपचाप सास हा हाथ,
बहू हा देखके खड़े होगे चुपचाप ।
घर दुवार के नइहे कोनो कदर ,
मइके से ला हस का दूध गदर।
एक बात बता ऐ मोबाइल मा का हे खास,
सबो झन करथे इही मा टाइम पास।
चींटू अऊ चींटू के दादा इही म बीजी रहीथे,
थोकिन मांगबे ता जोर से चिल्लाथे।
का जानबे डोकरी आजकाल के ऐप ला,
घर मा पानी नइहे भर दे एक खेप ला।
डोकरी हा भाग गे , बइठगे कुरीया मा,
बहू घलो चुप होगे,  चल दीस धुरिया मा।
थोकिन देर बाद बहू हा बोलिस,
सासू मा आ तहू ला।
बतावत हो मोबाइल के ऐप ला,
बहू बताइस ऐ हरे फेसबुक ,
दुनिया भर के मिलथे ऐमा।
तोरो आइडी बना देथो,
तहू चलाबे फेसबुक।
बहू तुरते आइडी बनाइस,
सास ला ओकर बचपन के,
बिछड़े सहेली से मिलवाइस।
ओकर बाद से बदल गे घर के हालात,
सास बहू दूनो , सेल्फी लेवत साथ – साथ।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया  (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
priyadewangan1997@giml.com

गरमी के दिन आगे

गरमी के दिन आगे संगी , मचगे हाहाकार ।
तरिया नदियाँ सबो सुखागे , टुटगे पानी धार ।।

चिरई चिरगुन भटकत अब्बड़ , खोजत हावय छाँव ।
डारा पाना जम्मो झरगे , काँहा पावँव ठाँव ।।

तीपत अब्बड़ धरती दाई , जरथे चटचट पाँव ।
बिन पनही के कइसे रेंगव , जावँव कइसे गाँव ।।

बूँद बूँद पानी बर तरसे , कइसे बुझही प्यास ।
जगा जगा मा बोर खना के , करदिस सत्यानास ।।

बोर कुवाँ जम्मो सुख गेहे , धर के बइठे माथ ।
तँही बचाबे प्राण सबो के, जय जय भोलेनाथ ।।

कु. प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
priyadewangan1997@gmail.com

आमा खाव मजा पाव

गरमी के मौसम आते साठ सब झन ला आमा के सुरता आथे।लइका मन ह सरी मंझनिया आमा टोरे ला जाथे , अऊ घर में आ के नून – मिरचा संग खाथे।लइका मन ला आमा चोरा के खाय बर बहुत मजा आथे।मंझनिया होथे तहान आमा बगीचा मा आमा चोराय ला जाथे।
आमा एक प्रकार के रसीला फल होथे।ऐला भारत में फल के राजा बोले जाथे।आमा ला अंग्रेजी में मैंगो कहिथे एकर वैज्ञानिक नाम – मेंगीफेरा हे।

आमा के किसम – आमा भी कई किसम के होथे अउ सबके सुवाद अलग अलग होथे।
जइसे – तोतापरी आमा , सुंदरी आमा , लंगडा आमा , राजापुरी आमा , पैरी अउ बंबइया आमा ।

फल के राजा – आमा ला फल के राजा कहे जाथे ।
आमा ला फल के राजा काबर कहिथे जबकि सबो फल हा स्वास्थ्य वर्धक होथे ।
दरअसल ,भारतीय आमा अपन स्वाद के लिए पूरा दूनिया में मशहूर हे।भारत में मुख्य रूप से 12 किसम के आमा होथे ।

आमा के उपयोग – आमा के उपयोग सिरिफ फल के तौर में नही बल्कि सब्जी , चटनी , पना , जूस , कैंडी , अचार , खटाई, शेक , अमावट (आमा पापड़) अऊ बहुत से खाये – पीये के चीज के सुवाद बढाये बर करे जाथे।

आमा के फायदा – आमा के बहुत से फायदा भी हे ।
जइसे – (1) कैंसर से बचाव – आमा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोलोन कैंसर , ल्यूकोमिया अऊ प्रोटेस्टेट कैंसर के बचाव में फायदामंद हे ।ऐमा बहुत से तत्व होथे जो कैंसर से बचाव में मददगार होथे।

(2)आख के रौशनी बाढथे – आमा में विटामिन ए भरपूर होथे , जो आॅखी के लिए बरदान हे।
एकर से ऑखी के रोशनी बने रहिथे।

(3) त्वचा बर फायदामंद हे – आमा के गुदा ला
चेहरा मा लगाय से चेहरा में निखार आथे।

(4) पाचन क्रिया ला ठीक रखथे – आमा में कई
प्रकार के एंजाइम होथे जेहा प्रोटीन ला तोड़े
के काम करथे।एकर से खाना जल्दी पच
जाथे।

(5) गरमी से बचाव – गरमी के दिन मा कही
घर से बाहर निकलना रहीथे ता एक गिलास
आमा के पना पी के निकलना चाहिए ।एकर
से लू नइ लगे।

ये परकार से आमा हा बहुत उपयोगी चीज हरे । एला सबझन ला खाना चाहिए अउ मजा लेना चाहिए ।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया छत्तीसगढ़
priyadewangan1997@gmail.com

पुतरी पुतरा के बिहाव

पुतरी पुतरा के बिहाव होवत हे, आशीष दे बर आहू जी।
भेजत हाँवव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।।

छाये हावय मड़वा डारा, बाजा अब्बड़ बाजत हे।
छोटे बड़े सबो लइका मन, कूद कूद के नाचत हे।।
तँहू मन हा आके सुघ्घर, भड़ौनी गीत ल गाहू जी।
भेजत हावँव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।।

तेल हरदी हा चढ़त हावय, मँऊर घलो सौंपावत हे।
बरा सोंहारी पपची लाड़ू, सेव बूंदी बनावत हे।।
बइठे हावय पंगत में सब, माई पिल्ला सब आहू जी।
भेजत हावँव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।।

आये हावय बरतिया मन हा, मेछा ला अटियावत हे।
खड़े हावय बर चौंरा मा, मिल के सब परघावत हे।।
नेंग जोग हा पूरा होगे, टीकावन मा आहू जी।
भेजत हावँव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
priyadewangan1997@gmail.com

कलिंदर

बारी में फरे हाबे सुघ्घर, लाल लाल कलिन्दर।
बबा ह रखवारी करत, खात हावय जी बंदर।।
लाल लाल दिखत हे, अब्बड़ मीठ हाबे।
बाजार मे जाबे त, बीसा के तेहा लाबे।।
एक चानी खाबे त, अब्बड़ खान भाथे।
नइ खावँव कहिबे त, मन हा ललचाथे।।
चानी चानी खाबे त, सुघ्घर मन ह लागथे।
सोनू मोनू जादा खाथे, बारी डाहर भागथे।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
Priyadewangan1997@gmail.com

मैगी के जमाना

जब ले आहे मैगी संगी, कुछु नइ सुहावत हे।
भात बासी ला छोड़ के, मैगी ला सब खावत हे।।
दू मिनट की मैगी कहिके, उही ला बनावत हे।
माई पिल्ला सबो झन, मिल बाँट के खावत हे।।
सब लइका ला प्यारा हावय, एकरे गुन ल गावत हे ।
स्कूल हो चाहे पिकनिक हो, मैगी धर के जावत हे।।
लइका हो चाहे सियान, सबला मैगी सुहावत हे ।
कोनो कोती जावत हे, पहिली मैगी बनावत हे।।
कोनो आलू प्याज डार के, त कोनो सुक्खा बनावत हे।
कोनो सूप बनावत त, कोनो सादा खावत हे।।
फरा मुठिया के नइ हे जमाना, मैगी के जमाना हे।
दू मिनट की मैगी बनाके, माइ पिल्ला ल खाना हे।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
Priyadewangan1997@gmail.com


गरमी के भाजी

गुरतुर हे इहां के भाजी ह , बड़ सुघ्घर हे लागय।
अम्मट लागथे अमारी हा, सोनू खा के भागय।।

किसम किसम के भाजी पाला , हमर देश मा आथे।
सोनू मोनू दूनो भाई , खोज खोज के लाथे।।

लाल लाल हे सुघ्घर भाजी , अब्बड़ खून बढाथे ।
चैतू समारु खाथे रोजे , सेहत अपन बनाथे ।।

बड़ उलहाये हवय खेत मा , चना लाखड़ी भाजी ।
गुरतुर लागय दूनो हा जी , रांधे सुघ्घर भौजी।।

आये हवय बोहार भाजी , गली गली चिल्लाये।
अमली डार दाई ह रांधे , घर गोहार लगाये।।

लंबा लंबा चेंच भाजी ल , बरी डार के रांधय।
सोनू मोनू दूनो झन हा, जूरी ला हे बांधय।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
Priyadewangan1997@gmail.com



नवरात्रि मनाबो

चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो ,
मिलजुल के माता रानी ला सजाबो ।
विराजे हाबे हमर घर दुर्गा दाई हा——
चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो।।

फूल पान से सुघ्घर आसन ल सजाबो,
लाली लाली चुनरी माता रानी ल ओढाबो।
सोलह श्रृंगार करबो दुर्गा माता के——
चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो।।

मंदिर म सुघ्घर नवजोत जलाबो,
माता रानी ला आसन बइठाबो।
सेवा गाबो दुर्गा माता के ——–
चलो संगी आज नवरात्रि मनाबो।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
Priyadewangan1997@gmail.com