बलदाऊ राम साहू के गज़ल

गोरी होवै या कारी होवै। सारी तब्भो ले प्यारी होवै। अलवा-जलवा राहय भले जी एकठन हमर सवारी होवै। करन बड़ाई एक दूसर के काकरो कभू झन चारी होवै। राहय भले घर टुटहा-फुटहा तब्भो ले ओ फुलवारी होवै। बेटा कड़हा – कोचरा राहय मंदहा अउ झन जुवारी होवै। ‘बरस’ कहत हे बात जोख के, जिनगी म कभु झन उधारी होवै। तब्भो = तो पर भी, अलवा-जलवा= समान्य, चारी= निंदा, कड़हा-कोचरा =अनुत्पादक, मंदहा =मद्यपान सेवन करने वाला, मन मा जब तक अहसास हावै जी। अंतस मा सब उल्लास हावै जी। कब तक…

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मंगल पांडे के बलिदान : 8 अप्रैल बलिदान-दिवस

अंगरेज मन ल हमर देस ले भगाए बर अउ देसवासी मन ल स्‍वतंत्र कराए बर चले लम्बा संग्राम के बिगुल बजइया पहिली क्रान्तिवीर मंगल पांडे के जनम 30 जनवरी, 1831 के दिन उत्तर प्रदेश के बलिया कोति के गांव नगवा म होय रहिस। कुछ मनखे मन इंकर जनम उत्‍तर प्रदेश के साकेत जिला के गांव सहरपुर म अउ जन्मतिथि 19 जुलाई, 1927 घलोक मानथें। मेछा के रेख फूटतेच इमन सेना म भर्ती हो गये रहिन। वो बखत सैनिक छावनी मन म गुलामी के विरुद्ध आगी सुलगत रहिस। अंग्रेज मन जानत…

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राजा के मुड़ी म सिंग

ऐ बात तब के आय.जब हमन छुट्टी बिताए बर गांव म जान, हमर कुंती दई अब्बड किस्सा कहनी कहे..संझा ढलत देरी नई की सब्बो लईकामन खटिया ल जोर के बइठ जाए, तहां ले कुतीं दइ के कहनी सुरु हो जाए…एक ठन राजा रहिस..हव कहत रहू त कहनी ल आगू कहहू.. नइ हूकारू भरहू त कहनी ल इहिच मेर खतम समझहू..त सब्बो झिन ह.. ह… हव..अइसे कहत रहन…त ओ राजा ल चम्पी मालिस के सौकिन रहे…आगू गुडी़ म एक झिन बदरू नांव के न उ सियान रहे..अब्बड तान दे ,देके चम्पी…

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नंदावत हे रूख-राई : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने मा ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन बने-बने स्वादिश्ट फल के बीजा ला जतन के धरे राहय। उॅखर पेटी या संदूक ला खोले ले रिकिम-रिकिम के बीजा मिल जावत रहिस हे। जब हमन छोटे-छोटे रहेन तब हमर दाई-बबा के संदूक ले कागज के पुड़िया में रखे कोहड़ा, रखिया, तुमा, छीताफल अउ कई परकार के बीजा मिल जावत रहिस हे। देख के बड़ अचरज होवय के दाई-बबा मन बीजा ला अतेक सम्हाल के काबर धरे हावय। पूछन तब बतावय। कहय-बेटी! जब पानी…

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लेख : बंटवारा

बुधारु अऊ समारु दूनों भाई के प्रेम ह गांव भर में जग जाहिर राहे ।दूनों कोई एके संघरा खेत जाय अऊ मन भर कमा के एके संघरा घर आय । कहुंचो भी जाना राहे दूनों के दोस्ती नइ छूटत रिहिसे ।ओकर मन के परेम ल देख के गाँव वाला मन भी खुस राहे अऊ बोले के एकर मन के जोड़ी तो जींयत ले नइ छूटे । बिचारा बुधारु अऊ समारु के बाप तो नानपन में ही मर गे रिहिसे ।बाप के सुख ल तो जानबे नइ करत रिहिसे ।ओकर दाई…

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पीथमपुर के कलेसरनाथ : भोला बबा के महत्तम

हसदो नदिया के तिर म कलेसरनाथ भगवान। दरसन जउन ओखर करिहि, आ बइकुंठ जाही।। – प्रोफेसर अश्विनी केसरवानी छत्तिसगढ़ प्रांत म घलो बड़कन जियोतिरलिंग जइसन काल ल जितवइया भोला बबा के मंदिर-देवालय हवय जेखर सावन म दरसन, पूजा-पाठ अउ अभिसेक करे म सब पाप धुल जाथे। अइसनहे एक ठन मंदिर जांजगीर-चापा जिला म हसदो नदिया के तिर म बसे पिथमपुर म हवय। सावन महिना म, महासिवरात्रि म अउ चइत परवा से अम्मावस तक 15 दिन इहां मेला भरथे अउ धूल पंचमी के दिन इहां भोला बबा के बरात निकलथे जेला…

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बाबू जगजीवनराम अऊ सामाजिक समरसता : 5 अप्रैल जन्म-दिवस

हिन्दू समाज के निर्धन अऊ वंचित वर्ग के जऊन मनखे मन ह उपेक्षा सहिके घलोक अपन मनोबल ऊंचा रखिन, ओमां बिहार के चन्दवा गांव म पांच अप्रैल, 1906 के दिन जनमे बाबू जगजीवनराम के नाम उल्लेखनीय हे। ऊंखर पिता श्री शोभीराम ह कुछ मतभेद के सेती सेना के नौकरी छोड़ दे रहिस। उंखर माता श्रीमती बसन्ती देवी ह गरीबी के बीच घलव अपन लइका मन ल स्वाभिमान ले जीना सिखाइस। लइकई म बाबू जगजीवनराम के स्‍कूल म हिन्दू, मुसलमान अउ दलित हिन्दु मन बर पानी के अलग-अलग घड़ा रखे जात…

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माफी के किम्मत

भकाड़ू अऊ बुधारू के बीच म, घेरी बेरी पेपर म छपत माफी मांगे के दुरघटना के उप्पर चरचा चलत रहय। बुधारू बतावत रहय – ये रिवाज हमर देस म तइहा तइहा के आय बइहा, चाहे कन्हो ला कतको गारी बखाना कर, चाहे मार, चाहे सरेआम ओकर इज्जत उतार, लूट खसोट कहीं कर …….. मन भरिस तहन सरेआम माफी मांगले …….। हमर देस के इही तो खासियत हे बाबू …….. इहां के मन सिरीफ पांच बछर म भुला जथे अऊ कन्हो भी, ऐरे गैरे नत्थू खैरे ला, माफी दे देथे। भकाड़ू…

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आरटीओ चेकिंग : समसामयिक हास्य संस्मरण

एक्सीलेटर ल मुठा म चीपे जोर से अइंठत सुन्ना रोड म फटफ़टी ल भगावत रहेंव, सनसन..सनसन… बोंअअ…ओंओंअअ ..। रद्दा में देखेंव त आठ दस झन मनखे मन तिरयाये अपन मोटरसाइकिल धरके खड़े रहय। एक झन नवरिया बिहतिया कस लागिस ओखर सुवारी कनिहा के आत ले मुड़ ला ढांके रहय। एक झन बनिया व्यापारी टइप मनखे गाड़ी के पाछू म बोरा लादे अउ आघू पुट्ठा म सामान धरे तीर मा ठाढे रहय। दू झन मनखे जबरन गाड़ी के प्लक ल खोल के साफ़ करत रहय, सब्बो गाडी वाले मन ल ठाढ़े…

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दोहा छंद म गीत

काँटों से हो दोस्ती, फूलों से हो प्यार। इक दूजे के बिन नहीं, नहीं बना संसार।। काँटों से हो दोस्ती……………….. कठिन डगर है जिंदगी, हँस के इसे गुजार। दुनिया का रिश्ता यहीं, निभता जाये यार।। काँटों से हो दोस्ती……………….. दुख हो सुख हो काट लो, ये जीवन उपहार। राम नाम में जोड़ लो, साँसों का ये तार।। काँटों से हो दोस्ती……………….. धूप छाँव बरसात हो, मिले ग़मों की मार। हँसता हुआ गुलाब ज्यों, छाये सदा बहार।। काँटों से हो दोस्ती………………… खो जाओ मजधार में, चलता हुआ बयार। हरि का मनमें…

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