छतीसगढ़ के पबरित भुईया जस गावत जहान हे वीर जनमईया बलिदानी भुईया मोर छतीसगढ़ महान हे होवत बिहनिया सुरुज के लाली नित नवा अंजोर बगरावय मटकत रुखवा पुरवईया म डोंगरी पहाड़ी शोभा बढ़हावय जन जन के हिरदे म मानवता मया के खदान हे मोर छत्तीसगढ़ महान हे मोर छत्तीसगढ़ महान हे करिया तन म मनखे ईहा सत ईमान के ढांचा रिस्ता नाता जबर पोठ हे राम ईहा के भाचा मया पीरा बर घेच कटईया मनखे गुणवान हे मोर छत्तीसगढ़ महान हे मोर छत्तीसगढ़ महान हे कल कल बोहावत महानदी संग…
Read MoreMonth: April 2018
तेजनाथ के रचना
बड़ उथल-पुथल हे मन म, आखिर का पायेंव जीवन म? जंगल गेयेंव घर,परिवार छोड़ के, घेर लिस ‘तियागे के अहम’ उंहा भी बन म। देह के बंधन ले मुक्ति बर देह मिले, कहिथें, अउ पूरा जिनगीए सिरागे देह के जतन म। अमका होही, ढमका होही, कहिथें, फलाने दिन,दिसा,फलाने लगन… म। बड़ दिक्कत हे, दुख हे दुनों हाल म, लइका हे अउ नइहे तभो आंगन म। कमा -कमा के मर गेंव मैं, दूसर मरगे सिरिफ जलन म। ये जीवन-वो जीवन,सरग-नरक, पाप-पुन…, महिं जस मथागे जिनगी,उलझन म। थक गेंव सांति अउ खुसी…
Read Moreआँखी मा आँखी
आँखी मा आँखी तँय मिला के देख ले। जिनगी के बीख ला पीया के देख ले।। आँखी मा आँखी……… पथरा के मुरती नो हँव महुँ मनखे आँव, नइ हे बिसवास तँय हिलाके दे ख ले। आँखी मा आँखी……… हिरदे मा तोर नाँव के लहू दउड़त हावै, धक-धक ए जिवरा धड़काके देख ले। आँखी मा आँखी………. नइ हे कोनों तोर सहीं नाँव के पुछइया, मया के चिन्हारी ओ चिनहाके देख ले। आँखी मा आँखी…………. दुनिया मा मया के बजार हावै “बोधन”, एको दिन तो तहुँ हा बिसाके देख ले। आँखी मा…
Read Moreबेटी के हाथ मा तलवार करव बिचार
ओ दिन छग ले परकासित सबो अखबार मा फोटू छपे रहिस, संगे संग लिखाय रहिस -“बेटियों ने थामी तलवार” । पढ़के मोर आत्मा कलप गे। जौन बेटी ल ओकर दाई ह चूल्हा फूकेबर, बर्तन मांजे बर,घर लिपेबर, साग भात रांधेबर, पढ़लिख के अपन गोड़ मा खड़े होयबर अउ ममता, मया के संग जिनगी बिताय के गुन सीखे के सिच्छा देथय।आज समाज मा हमर बेटी के हाथ मा तलवार धरात हे।हमर बेटी मन घलो,चाहे पढ़े लिखे होय चाहे अनपढ़, परबुधनीन बनत जात हे।गुनीक मन बिचार करव।का ये बने होवत हे?कुछेक बच्छर…
Read Moreजब ले बिहाव के लगन होगे
संगी, जब ले बिहाव के लगन होगे बदल गे जिंनगी,मन मगन होगे। सात भांवर, सात बचन, सात जनम के बंधन होगे। एक गाड़ी के दू चक्का जस, दू तन एक मन होगे। सांटी के खुनुर- खुनुर, अहा! सरग जस आंगन होगे। भसम होगे छल-कपट सब, बंधना पबरित अगन होगे। नाहक गे तन्हाई के पतझड़, जिंनगी तो अब चमन होगे। समे गुजरगे तेन गुजर गे भले अइसने, अब ले एक-दूसर के जीवन होगे। मोर जीवन साथी सबले सुघ्घर, देखके ये भाव, सब ल जलन होगे। एक ले भले दू कहिथें, दूनों…
Read Moreकहानी – बड़की बहू
कमला के बिहाव होय 24 बच्छर होगे हे।ओ हा अपन बड़े नोनी के बिहाव घलाव कर डारिस।ओकर नानकुन बेटी नतनीन घलो आगे,फेर कमला के बुढ़ी सास अऊ ओकर सास ह आज ले गारी देयबर नी छोड़िन अउ न कमला ल बड़की बहू मानिन। कम पढ़े लिखे घलो नई हे कमला! अपन मईके के पहिली नोनी रहिस जौन दू कोस रोज साइकिल म आन गांव जाके 8वीं पास होय रहिस ।तहसील मा चपरासी बर नउकरी के चिट्ठी घलो आय रहिस,फेर दाई ददा मन मना कर दिस।अऊ लगती अठारा बच्छर मा परोसी…
Read Moreपानी हे जिंदगानी
कोनो तो समझ, का चीज ये पानी । जिए के एक ठन चीज, किथे ओला पानी। गांव गली सड़क नाला, झन बोहावव पानी ल। जिए पिए के काम आहि, ओ दीन मांगहू पानी ल। पानी बिना हे बन ह सुन्ना, चिरई चिरगुन उन्ना जी। पानी बचाबोन नई बोहावन, छोड़बो करनी जुन्ना जी। एक दिन अईसे आही जी, सबो परानी पछताबो जी । पानी बचबो पेड़ लगाबो, तभे जिनगी ल पबो जी। युवराज वर्मा बरगड़ा (साजा) जिला बेमेतरा 9131340315
Read Moreपंचू अऊ भकला के गोठ : चुनई ह कब ले तिहार बनगे
पंचू अऊ भकला के गोठ बात चलत रिहिस हे, थोरकिन सुने बर बईठ गेंव पंचू काहत रहय भकला ल, सुन न रे भाई भकला, चुनई आवत हे हमर गाँव गंवई के मईनखे बर बड़का तिहार ये। भकला- किथे, पंचू भईया चुनई ह कबले तिहार बन गेहे नवा बनाय हे का ? पहिली तो अईसनहा तिहार सुने नीं रेहेंव। दसेरा, देवारी, होली, हरेली ल जानथव अऊ सबो गाँव वाले मन मिरजुर के मनाथे, फेर ये चुनई ह तिहार कबले बनगे ? पंचू- किथे, जबले अंगरेज मन हमर देश ल छोड़े हे,…
Read Moreबारी के फूट
वाह रे बारी के फूट, फरे हस तैं चारों खूँट । बजार में आते साठ, लेथय आदमी लूट । दिखथे सुघ्घर गोल गोल, अब्बड़ येहा मिठाय । छोटे बड़े जम्मो मनखे, बड़ सऊंख से खाय । जेहा येला नइ खाय, अब्बड़ ओहा पछताय । मीठ मीठ लागथे सुघ्घर, खानेच खान भाय । बखरी मा फरे हावय, पाना मा लुकाय । कलेचुप बेंदरा आके, कूद कूद के खाय । नान नान लइका मन, चोराय बर जाय । कका ह लऊठी धर के, मारे बर कुदाय । कूदत फांदत भागे टूरा, नइ…
Read Moreससुर के नखरा
बिहाव के सीजन चलत हे, महु टुरी देखे बर गेंव, टुरी के ददा ह पूछथे, तोर में का टैलेंट हे, मैं केहेंव टैलेंट के बात मत कर, टैलेंट तो अतका हे, गाड़ी हला के बता देथव, टंकी में पेट्रोल कतका हे। रिस्ता केंसल। दूसर जघा गेंव, टुरी के ददा ह कथे का करथस? मैं केहेंव, वइसे तो पूरा बेकार हव, मैं एक साहित्यकार अव, गांव गली चौराहा में कविता सुनाथव, मनखे के मन बहलाथव, समय नई मिलय मोला बईठ के सुरताय बर, अपने मजाक बना लेथव मनखे ल हसाय बर।…
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