डोंगरी पहाड़ में

डोंगरी पहाड़ में ओ, अमरईया खार में। दूनों नाच लेबो ओ.. करमा के डाँड़ में।। डोंगरी पहाड़ में…….. आमा के पाना हा डोलत हावै ओ। सुआ अउ मैना हा बोलत हावै ओ।। ए बोलत हावै ओ…. रुखवा के आड़ में। दूनों नाच लेबो ओ…. करमा के डाँड़ में। डोंगरी पहाड़ में………. मया के बिरुवा हा फूलत हावै गा। तोर मोर भेद अब खुलत हावै गा।। ए खुलत हावै गा……फुलवा के मार में। दूनों नाच लेबो गा…..करमा के डाँड़ में। डोंगरी पहाड़ में……… फुले हे परसा ए दे लाली लाली ओ।…

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जाड़ हा जावत हे

बिहनिया बिहनिया थोर कुन जडावत हे चिरई चिरगुन पंख फडफडावत हे सुरूज अपन कहर दिखावत हे लागत हे जाड हा जावत हे भइया थोरकुन मुचमुचावत हे भउजी घलो लजावत हे अमरइया मा मउर घलो ममहावत हे लागत हे जाड हा जावत हे डोकरा डोकरी ला गुर्ररावत हे भइसी बइठे पगुरावत हे राउत ला भइसी लतियावत हे लागत हे जाड हा जावत हे कोटवार हांका लगावत हे जम्मो ला आंट मा बलावत हे साल स्वेटर ला झन पहिरिहा संगी लागत हे जाड हा जावत हे कोमल यादव मदनपुर खरसिया [responsivevoice_button voice=”Hindi…

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छत्तीसगढ़ी भाषा : समस्या अउ संभावना

छत्तीसगढ़ी भाषा के अपन अलग महत्तम हवय जइसे कि हर भाषा के होथे। छत्तीसगढ़ी भाषा में गोठियाय ले हमन ला अड़बड़ आनंद के अनुभव होथे काबर कि ये हर हमर माई भाखा आय। जब ले जनमें हावन ये भाखा हर तब ले हमर कान में घर कर ले हावय। अपन दाई-बबा के अउ महतारी-बाप के गोठ-बात ला हमन यही भाखा में सुने हावन। अपन अंतस के सुख अउ दुख ला हमन यही भाखा में बताथन तभे हमर जीव ला संतोष मिलथे फेर जइसे-जइसे हमन तरक्की करत जावत हावन हमन अपने…

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देख कइसे फागुन बउरात आत हे

लुका झन काहत बड़ ठंडी रात हे, देख कइसे फागुन बउरात आत हे! झराके रुखवा चिरहा जुन्ना डारापाना, नवा बछर म नवा ओनहा पहिरात हे! रति संग मिलन के तैय्यारी हे मदन के कोयली ह कइसे रास बरस मिलात हे! मउहा कुचियाके बांधे लगिन दिन बादर, फुलके परसा सरसो महुर मेंहदी रचात हे! फगुवा के राग म निकले तियार बराती, बनके लगनिया आमा मउर चढ़ात हे! माते पुरवाई झुमरत बन के बंडोरा, सुनावत सब ल सरसर बधाई गात हे! ललित नागेश बहेराभांठा(छुरा) [responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”]

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झन बिसावव सम्मान

अभी के बेरा म कला अउ कलाकार के कमी नई हे। किसिम किसिम के कलाकार ह अपन कला ल देखाथे। हमर बीच म कतको अकन अइसन कलाकार रिहिस जेन मन अपन कला के बल म सरी दुनिया ल दांत तरी अंगरी चाबे बर मजबूर कर दिन। फेर उन कलाकर मन मान अउ सम्मान के थोरको आस अपन मन म नई राखिस। पहिली के कला ह कलाकार मन बर एक साधना रहय। इही साधना ल पूरा करत करत कतको बछर ह बीत जावय। अउ अब्बड़ सुग्घर कला ह उपजय। कलाकर मन…

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मांघी पुन्नी के मेला

जगा जगा भराय हाबे, मांघी पुन्नी के मेला । कोनो जावत जोड़ी जांवर, कोनो जावत अकेला । कोनो जावत मोटर गाड़ी, कोनो फटफटी में जावत हे। कोनों रेंगत भसरंग भसरंग, कोनो गाना गावत हे। हाबे संगी अब्बड़ भीड़, होवत रेलम पेला। जगा जगा भराय हाबे, मांघी पुन्नी के मेला। लगे हाबे मीना बजार, होवत खेल तमासा । जगा जगा बेचावत हाबे, मुर्रा लाई बतासा । डोकरी दाई खावत हाबे, बइठ के केरा अकेल्ला। जगा जगा भराय हाबे, मांघी पुन्नी के मेला । महेन्द्र देवांगन माटी पंडरिया [responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये…

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मेला जाबोन

लगे हाबे जगा जगा मड़ई अऊ मेला। जाबोन हमूमन अऊ देखबो जी ठेला। मंदिर के दरसन बर लाइन लगाबोन । फूल पान बेल पतरी नरियर भेला चढाबोन । झूला ल झूलबोन अऊ अब्बड़ मजा पाबोन । रंग रंग के मिठाई अऊ पेडा ल खाबोन । मुर्रा लाइ अऊ बतासा अब्बड़ बेचाथे । नान नान लइका मन कूद कूद के खाथे। डोकरी दाई ल केरा अऊ अंगूर भाथे। मड़ई मेला जाबे त उहीच ल मंगाथे। मांघी पुन्नी के मेला संगी अब्बड़ मजा आथे। लइका सियान अऊ सबो झन घूमे ल जाथे।…

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मोर गांव गवा गे

अब कहा पाबे जी? जुन्ना गांव गवां गे। बिहनिया के उगती सूरज, अउ संझा के छाव गवां गे। दाई के सुग्घर चन्दा लोरी, लईका के किलकारी गवां गे। माटी के बने घर कुरिया, अंगना के नाव गवां गे। बखरी म बगरे अमली-आमा के रूख सिरागे। गाय-गरुवा ह किंजरत हे रददा म, अउ कुकुर ह घरो-घर बँधागे। कहा पाबे जी संगी? मोर सुग्घर गांव गवां गे। रुख रई सिरागे, तरिया नदिया ह सुखागे। चिरई-चुरगुन के चहकना, कुकरा के बांग गवां गे। गांव-गांव म बने चउक-चौराहा, घर-कुरिया के चौरा सिरागे। गांव के…

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मेला घुमाई दे

ए जोड़ीदार,चल मोला मेला घुमाई दे। राजिम धाम के संगम मा, मोला डुबकी लगाई दे।। ए जोड़ीदार…. लगे हावय मोला आसा,महुँ चली देतेंव। महानदी के धारी मा,तन डुबोई लेतेंव।। राजिम लोचन स्वामी ला, पान अउ सुपारी चढ़ाई दे। ए जोड़ीदार….. महादेव कुलेश्वर हा,नदिया बीच पधारे हे। चारों मुड़ा लगे रेला,अपन रूप पसारे हे।। जघा जघा साधू संत बिराजे, अमरित बानी सुनाई दे। ए जोड़ीदार….. पावन भुइयाँ राजिम,एला कइथे प्रयाग। इहाँ पापी तरतहे,दुःख जाथे गा भाग।। चुरुवा भर संगम के जल, महादेव मा चढ़ाई दे। ए जोड़ीदार…… बोधन राम निषाद राज…

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संबंध मिठास के नांव ताय मड़ई ह

खेत के सोनहा धान ल जब किसान मन बियारा म काटके लाथे, उहा ले मींज के माई कोठी म लाके रखथे त घर म लक्ष्मी के वास से सबो मनखे मन के हिरदे म एक खुशी झलकत रीथे। उही बीच म थोरकिन मिहनत करैईया सबो मनखे मन ह अपन आप ल ठलहा अऊ काम के बोझ ले उबर गेन कहिके गाँव के पंचाईत म सबो कोही जुरियाथे जेमे मड़ई मनाय के तारिख ल मिरजुर के करार करथे। अईसे कहिबे त हमर छतीसगढ़ के संस्कीरति अऊ परमपरा ल पहिचान देय के…

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