- खुमरी : सरसी छंद
- अजब-गजब
- लइका बर खसरा अउ रुबैला टीका
- छब्बीस जनवरी मनाबो : वंदे मातरम गाबोन
- छत्तीसगढ़ी भाषा : समस्या अउ संभावना
- घाम घरी आगे – कबिता
- दोहालरी नवा बछर के
- ग़ज़ल
- किसानी के दिन आगे
- करम के डोरी : सियान मन के सीख
- व्यंग्य : छत मा जल सग्रंहण
- पारंपरिक देवार-गीत
- छत्तीसगढ़ी भाषा में रिश्ते-नाते
- चतुर्भुज सिरक्कटी धाम
- फुदुक-फुदुक भई फुदुक-फुदुक….
- जयंत साहू के कहिनी : मनटोरा
- छत्तीसगढ़ी कथा-कंथली : संकलन अउ लेखन – कुबेर
- चुनई के बेरा
- नाटक : रसपिरिया
- छत्तीसगढ़ी कथा कंथली : ईर, बीर, दाउ अउ मैं
- छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर गांधीवाद का प्रभाव
- छत्तीासगढ़ी म परथंम धर्म उपदेशक संत गुरू घासीदास
- बाहिर तम्बू छोड़ के, आबे कब तैं राम
- छत्तीसगढ़ी के विकास यात्रा
- सुरता (संस्मरण) – सिकरनिन दाई
- बाल गीत
- पुस्तक समीक्षा : परिवार, व्यवहार अउ संस्कार के संगम ‘‘तिरबेनी‘‘
- धर्मेन्द्र निर्मल के पाँच गज़ल
- अनुवाद : आशा के किरण (The Silver Lining)
- कहिनी : ईरखा अउ घंमड के फल
- नवा बिहान
- गऊ रक्छक : नान्हे कहिनी
- शिव शंकर
- आसो के जाड़
- अकती के तिहार
- भाईचारा अउ शांति के संदेश देथे ईद-उल-फितर
- चार बेटा राम के कौडी के ना काम के
- अपन-अपन समझ
- मया बर हर दिन ‘वेलेन्टाइन डे’ होथे
- ‘छत्तीसगढ़ म सामाजिक समरसता कल अउ आज’ संगोष्ठी के आयोजन 19 फरवरी को
- सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार बर आवेदन 25 फरवरी तक
- सरग म गदर
- दुर्ग : ग्राम पंचायत मन म ’’साथिन‘‘ पद बर आवेदन 15 फरवरी तक
- 24 मई -जेठ दसमी : वीर आल्हा जयंती, आल्हा चालीसा (आल्हा छंद में)
- छत्तीसगढ़ी भासा बर सकारात्मक संवाद जरूरी हे
- गिरिवर दास वैष्णव के गीत
- गरमी के भाजी
- दोहालरी – दामाखेड़ा धाम
- लव इन राशन दुकान
- लोक परब छेरछेरा : समाजिक समरसता के तिहार
- छत्तीसगढ़ी गज़ल – कागज म कुआं खनात तो हे
- ठेंसा
- नवा बछर के मुबारक हवै
- छत्तीसगढ़ी 8वीं अनुसूची म कब? : सुधा वर्मा
- सार छंद : पूछत हे जिनगानी
- कहानी : लालू अऊ कालू
- कँपकँपाई डारे रे
- बित्ता भर भुइयां
- उदेराम के सपना
- खेती मोर जिंनगी
- बियंग : करजा के परकार
- छत्तीसगढ़ी काव्य के कुछ महत्वपूर्ण कवि: डॉ. बलदेव
- बरस जा बादर, किसानी के दिन अउ योग करो
- नंदागे
- देवारी के दीया
- कबिता : ये देस कइसे-कइसे होवत हे
- संबंध मिठास के नांव ताय मड़ई ह
- गणेश पूजा अउ राष्ट्र भक्ति
- जिनगी के का भरोसा
- खूंटा म साख निही, गेरवा के का ठिकाना
- छब्बीस जनवरी मनाबो “
- बहुरिया – कहिनी
- गाँव गाँव आज शहर लागे
- कमरछठ कहानी – दुखिया के दुःख
- तैं ह आ जाबे मैना
- चांटी मन के कविता
- इही त आये गा छ्त्तीसगढ सरकार
- छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के तीसर प्रान्तीय सम्मलेन 2015
- छत्तीसगढ़ी काव्य चितेरे : बाबू प्यारेलाल गुप्त
- सुनिल शर्मा “नील” के दू कबिता : कइसे कटही जेठ के गरमी अउ हर घड़ी होत हे दामिनी,अरुणा हा शिकार
- दादूलाल जोशी ‘फरहद’ के छै ठन कविता
- छत्तीसगढ़ी लोककथा : राजा के मया
- करसी के ठण्डा पानी
- बेटी दमाद के करनी : नान्हे कहिनी
- आदि परब के अद्भुत रंग – सुशील भोले
- जनता जनारदन
- असाढ़ आगे
- छत्तीसगढ़ी के सरूप
- कबीर अउ बेद पुरान
- सुक्खा पर गे बेलासपुर के दाई अरपा
- मानसून मा : कुकुभ छंद
- छत्तीसगढ़ के चिन्हारी गोदना
- घाम जनावत हे
- जब ले बिहाव के लगन होगे
- बिलासपुर म जिला रोजगार अउ स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र मं प्लेसमेंट कैम्प 08 मार्च को : 400 पद
- गरीबा : महाकाव्य – दूसर पात : धनहा पांत
- मोर सुआरी परान पियारी
- बियंग: रूपिया के पीरा
- छत्तीसगढ़ की महिला रचनाकारों की साहित्य का अनुशीलन
- ढेलवानी – कहिनी
